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सफाई में भ्रष्टाचार की गंदगी!:सफाईकर्मी गैरहाजिर, फिर भी स्टेटमेंट में प्रजेंट, उठाया जा रहा वेतन...कहीं पार्षदों के रिश्तेदाराें-परिचितों तक के नाम

कोटा24 दिन पहलेलेखक: शैलेंद्र माथुर
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जमादार का एवजी भर रहा सफाईकर्मियों की हाजिरी - Dainik Bhaskar
जमादार का एवजी भर रहा सफाईकर्मियों की हाजिरी
  • पार्षद कमल मीणा के सफाईकर्मी से रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद भास्कर ने 150 वार्डों में सफाई व्यवस्था का स्टिंग कर खोली भ्रष्टाचार की परतें

शहर की सफाई व्यवस्था में भ्रष्टाचार की गंदगी पसरी पड़ी है। चार दिन पहले एसीबी ने पार्षद कमल मीणा को सफाईकर्मी को फिर से ड्यूटी पर रखने के नाम पर पांच हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। इसके बाद भास्कर ने शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर 150 वार्डों में स्टिंग ऑपरेशन किया तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।

पड़ताल में सामने आया कि कुछ सफाई कर्मचारियों की रजिस्टर में एब्सेंट रहती है और कई इंस्पेक्टर से लेकर हेल्थ ऑफिसर तक उसे वेरिफाई कर पूरे महीने की प्रजेंट बता रहे हैं। वहीं, कुछ पार्षद ठेके पर सफाई कर्मचारी लगाने की बजाय अपने रिश्तेदाराें व परिचिताें के नाम रजिस्टर में लिखकर फर्जीवाड़ा कर रहे हैं।

उत्तर निगम के एक वार्ड में तो पार्षद के बेटे का नाम रजिस्टर में बतौर अस्थायी कर्मी लिखा हाेने और एक वार्ड में जमादार की जगह उसके बेटे द्वारा कर्मचारियों की हाजिरी भरने तक की शिकायतें हैं। कई वार्डों के रजिस्टर में तो अस्थायी सफाईकर्मियाें में ऐसे लोगों के नाम दर्ज हैं, जाे कभी सफाई करने ही नहीं आते। जबकि शहर की सफाई पर दाेनाें निगमों का सालाना करीब 148 कराेड़ रुपए खर्च हाे रहे हैं, जो कुल बजट का 20 प्रतिशत है।

जमादार का एवजी भर रहा सफाईकर्मियों की हाजिरी

शहरवासियों की शिकायत है कि कई जमादारों ने अपनी जगह एवजी रखे हुए हैं, जो रजिस्टर में सफाईकर्मियों की हाजिरी लगाने का काम करते हैं।

हाजिरी रजिस्टर से लेकर सैलेरी स्टेटमेंट तक फर्जीवाड़े के हर सबूत

निगम में कई स्थायी कर्मचारियाें की पूरे माह एब्सेंट हाेने के बाद भी उन्हें पूरा वेतन मिल रहा है। नाम गुप्त रखने की शर्त पर खुद सफाई कर्मचारियाें ने बताया कि उन पर दबाव बनाया जाता है कि वाे घर बैठें और हमें 7 हजार रुपए महीना दे दें, पूरा वेतन मिलता रहेगा, वरना काम किया ताे ऐसी जगह लगाएंगे कि परेशान हाे जाओगे। जिन कर्मचारियाें की पकड़ मजबूत नहीं है, वाे इनकी बात मान लेते हैं।

22 दिन अनुपस्थित फिर भी पूरा वेतन

> निगम के स्थायी सफाईकर्मी रमेश की दिसंबर-जनवरी में पूरे माह में 22 दिन एब्सेंट लगी है। स्टेटमेंट में स्वास्थ्य निरीक्षक, मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक व हेल्थ अाॅफिसर ने उसकी 31 दिन की प्रजेंट बताकर वेरिफाई किया। उसे पूरा वेतन मिल गया।

पूरे माह गैरहाजिर, पर पगार पूरी

> नगर निगम में स्थायीकर्मी रविकांत 16 दिसंबर से 15 जनवरी तक एब्सेंट रहा। रजिस्टर में 13वें नंबर पर उसका नाम है। पूरे माह क्राॅस लगा। जब जनवरी में वेतन के लिए स्टेटमेंट बना ताे पूरे माह उपस्थित बताया और पूरा वेतन मिल गया।

ड्यूटी अधूरी लेकिन सैलेरी पूरी

> नगर निगम में स्थायी कर्मचारी कमल 16 दिसंबर से 15 जनवरी तक 22 दिन एब्सेंट रहा। जनवरी में स्टेटमेंट बना ताे पूरे 31 दिन उपस्थित बताया गया था। इस स्टेटमेंट के अाधार पर पूरे माह का नेट वेतन 29130 रुपए मिल गया।

सफाई कर्मचारियाें के लगातार गायब रहने और बाद में उनकी प्रजेंट लगने की शिकायत हमारे पास भी आई है। इस पर हेल्थ ऑफिसर रिचा गाैतम काे सुबह सेक्टर कार्यालय पर भेजकर जाे नहीं आया है, उस कर्मचारी के आगे लाल लाइन खींचना शुरू करवा दिया गया है। कई बार कर्मचारी गायब मिले, उनके खिलाफ कार्रवाई भी की है। जहां ठेकेदार के कर्मचारी गायब मिलते हैं, वहां उसे नाेटिस देकर पैनल्टी लगाई जाती है।

-कीर्ति राठाैड़ आयुक्त दक्षिण नगर निगम

सफाई व्यवस्था की माॅनीटरिंग के लिए सिस्टम बना हुआ है। जमादार से लेकर हेल्थ ऑफिसर तक नियुक्त हैं। उसके बाद भी इस तरह की गड़बड़ी हाे रही है ताे इसे पकड़ने के लिए और काेई तरीका अपनाया जाएगा। सेक्टर ऑफिस और वार्डाें में जाकर ताे औचक निरीक्षण करते ही हैं। लापरवाही बरतने वाले सफाई ठेकेदार पर पैनल्टी लगाकर उसके वेतन में से काटा जाता है।

-वासुदेव मालावत आयुक्त उत्तर नगर निगम

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