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स्मृति शेष:कोटा कोचिंग के पायोनियर थे कोचिंग गुरु बंसल सर, ट्यूशन को कोचिंग में रिप्लेस किया

कोटा9 दिन पहले
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वीके बंसल के शिष्य सचिन झा ने फ्रॉम लैंटर्न टू लाइट हाउस नाम से उनजी जीवनी लिखी है। - Dainik Bhaskar
वीके बंसल के शिष्य सचिन झा ने फ्रॉम लैंटर्न टू लाइट हाउस नाम से उनजी जीवनी लिखी है।
  • यूएसए की वॉल स्ट्रीट जनरल मैग्जीन ने वीके बंसल को बताया था कोटा कोचिंग का पायोनियर, वे कहते थे-जीवन एक प्रश्न पत्र है, जिसे हल करने के लिए कॉम्प्रिहेंशन की जरूरत नहीं

गाेविंद माहेश्वरी, डायरेक्टर | एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट
बात करीब साढ़े चार दशक पुरानी है। जेके कॉलोनी में हम ई-12 में और बंसल अंकल (वीके बंसल सर) का परिवार डी-13 में रहता था। वे घर पर बच्चों को बुलाते थे तो आवाज हमारे घर तक आती थी। लेम्ब्रेटा स्कूटर उनकी पहचान थी। 1971 में बीटेक के बाद उन्होंने जेके सिंथेटिक्स में मैकेनिकल इंजीनियर से जॉब शुरू की। तीन साल बाद मस्कुलर डिस्ट्रॉफी बीमारी ने घेर लिया। कहते हैं कि इस बीमारी में जीवन ज्यादा लंबा नहीं चलता लेकिन, उन्होंने बीमारी को हावी नहीं होने दिया।

मेकेनिकल इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडलिस्ट रहे बंसल अंकल ने जेके छोड़ व्हीलचेयर पर 1974-75 में कॉलोनी के बच्चों को घर पर ही पढ़ाना शुरू कर दिया। यही उनका जुनून था। मैं खुद कई बार सवाल पूछने के लिए उनके पास गया। पास ही में बीवी राव भी पढ़ाते और फिर 1986 में छोटे भाई राजेश माहेश्वरी ने भी घर पर पढ़ाना शुरू कर दिया। बंसल सर ने कोटा का आर्थिक परिदृश्य ही बदल दिया। वे कोटा काेचिंग के पायोनियर थे। ट्यूशन शब्द को कोचिंग से रिप्लेस करने का श्रेय उन्हीं को है।

आत्म विश्वास उनके आत्मविश्वास से देशभर से मैथ्स पढ़ने के लिए स्टूडेंट्स यहां आने लगे। उन्होंने विज्ञान नगर में कोचिंग शुरू की तो हमारे छोटे भाई बृजेश माहेश्वरी भी पढ़ाने गए। पिछले साल मैं थोड़ा बीमार हुआ तो मुझसे मिलने घर आए। बोले मैं अभी कुछ बच्चों को पढ़ाता हूं। मुझे बहुत अच्छा महसूस होता है।

जिंदादिली वे पूरी गली की रौनक थे। होली खेलने के खूब शौकीन थे। शारीरिक समस्याओं के बावजूद सामाजिक सक्रिय रहने की पूरी कोशिश करते थे। दो साल पहले नेशनल मैथ्स काॅन्फ्रेंस में उन्हें सम्मानित किया गया।

लीजेंड ऑफ कोटा
एलन के गोविंद माहेश्वरी, रेजानेंस के आरके वर्मा, वाइब्रेंट के एमएस चौहान, मोशन एजुकेशन के नीतिन विजय, कॅरिअर प्वाइंट के ओम माहेश्वरी और आकाश इंस्टीट्यूट के अखिलेश दीक्षित ने शोक जताया है।

1986 में जब मैंने जेईई टॉप किया तो उन्हें लगा क्यों न और बच्चों को इस लायक बनाया जाए

  • संजीव अरोरा| प्रोफेसर, प्रिंसटन यूनिवर्सिटी अमेरिका, सन 1986 के जेईई टॉपर

बंसल सर ने घर पर चंद बच्चों को मैथेमेटिक्स की कोचिंग देना आरंभ किया था। वे मुझे कुछ मैथ्स की प्रोब्लम भेजते थे और मैं उनका यथासंभव हल भेजता था। उन्होंने उम्रभर इस सिद्धांत का पालन किया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। उन्हाेंने बताया कि जब मैंने जेईई टॉप किया तो उनको लगा की जब कोटा का एक छात्र जेईई टॉप कर सकता है तो क्यों न कोटा के बच्चों को कोचिंग देकर उन्हें इस लायक बनाया जाए। वाे बाद में घर पर व्हीलचेयर कुछ बच्चों को निशुल्क पढ़ाने लगे। 11वीं एवं 12वीं के बच्चों को मैथ्स पढ़ाने से 1-2 साल बाद 70 में से 50 बच्चे आईआईटी में चयनित होने लगे। इसके बाद उन्होंने विज्ञान नगर में बंसल क्लासेस से कोचिंग की नींव रखी।

बंसल क्लासेज के निदेशक वीके बंसल जी का निधन समूचे शैक्षणिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। कोटा को शैक्षणिक नगरी के रूप में स्थापित करने में उनका अग्रणी योगदान रहा।
-ओम बिरला, लोकसभाध्यक्ष

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