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महामारी का दंश:कोरोना ने पिता, ब्लैक फंगस ने मां को छीना...बेसहारा हुई बेटियां

कोटा2 महीने पहले
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महज एक माह के अंतराल में दाे बेटियाें के सिर से माता-पिता का साया उठ गया। - Dainik Bhaskar
महज एक माह के अंतराल में दाे बेटियाें के सिर से माता-पिता का साया उठ गया।
  • अजय सक्सेना की 27 अप्रैल को हुई थी मौत, एक माह बाद विमलेश भी चल बसी

महामारी का ये दंश झकझोरने वाला है... महज एक माह के अंतराल में दाे बेटियाें के सिर से माता-पिता का साया उठ गया। पिता और मां काे बचाने के लिए मीनाक्षी (30) और तोषिका (25) ने खूब संघर्ष किया। अस्पतालाें में दाैड़ीं, हर किसी से मदद मांगी, डाॅक्टराें के आगे गिड़गिड़ाईं, लेकिन दोनों को ही नहीं बचा पाईं। मां विमलेश (56) ने बीती रात ब्लैक फंगस से दम तोड़ दिया तो इससे पहले 27 अप्रैल को पिता अजय सक्सेना (60) की कोरोना से मौत हो गई। गुरुवार को दोनों बेटियों ने मां को मुखाग्नि दी तो हर किसी का कलेजा भर आया।

बेटी मीनाक्षी और तोषिका ने खूब संघर्ष किया लेकिन...

प्राइवेट जॉब करने वाले अजय सक्सेना और विमलेश अपनी दाेनों बेटियों के साथ नयापुरा मुक्ति मार्ग पर किराए का मकान में रह रहे थे। हंसता-खेलता परिवार था। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में चारों को कोरोना जैसे लक्षण दिखे। टेस्ट कराए तो माता-पिता और एक बेटी पॉजिटिव आए। 27 अप्रैल को पिता की तबीयत बिगड़ी तो दोनों बेटियां उन्हें एमबीएस अस्पताल लेकर गई। दोनों ओपीडी में डॉक्टरों के सामने बेड के लिए गिड़गिड़ाती रहीं। बेड नहीं मिल पाया और ओपीडी में ही अजय की सांसें उखड़ गई।

पिता की अंत्येष्टि और तीया हुआ ही था कि मां को तकलीफ शुरू हो गई। घर में कोई जमा पूंजी नहीं होने के बावजूद 29 अप्रैल को मां को जगपुरा स्थित निजी हॉस्पिटल में एडमिट कराया। इलाज के लिए कायस्थ समाज, परिचितों व मोहल्लेवासियों ने यथासंभव मदद की। मां कोविड निगेटिव हो गईं और रिकवर होने की स्थिति में थी, तभी उन्हें ब्लैक फंगस हो गया और करीब 7 दिन पहले प्राइवेट से एमबीएस हॉस्पिटल में शिफ्ट करा दिया। एमबीएस में उनका दो-तीन पहले ऑपरेशन भी हो गया, लेकिन बीती रात करीब 2 बजे मां का भी दम टूट गया।

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