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लापरवाही:निगम की नई गोशाला की फाइल दो साल तक कोटा-जयपुर घूमती रही, फिर जीरो पर पहुंची

कोटाएक महीने पहले
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  • वर्क ऑर्डर हो गए थे, अब डीएलबी ने कहा-दोबारा से टेंडर कराओ
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काेटा में नई गाोशाला का निर्माण नगर निगम की लापरवाही के कारण एक बार फिर अटक गया। इसके निर्माण के लिए 15 कराेड़ रुपए का बजट नगर निगम बाेर्ड की बैठक में पास करवा चुका था, टेंडर जारी हाे चुके थे, यूआईटी ने जमीन दे दी थी। दाे साल से चल इस गोशाला के निर्माण की फाइल काेटा नगर निगम से लेकर जयपुर मुख्यालय तक घूमती रही।

6 माह पहले वर्क ऑर्डर तक जारी किए जा चुके थे, लेकिन नगर निगम जमीन खाली करवाकर निर्माण के लिए नहीं साैंप पाया। जब निर्माण के लिए तैयार हुए तब पता चला कि सबकुछ टाइम बांड हाे गया। डीएलबी ने इस पर राेक लगाकर नए सिरे से टेंडर करने के लिए आदेश दिए हैं। अब नगर निगम वापस से टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगा और उसमें फिर दाे से तीन माह का समय लग जाएगा। नगर निगम की माैजूदा दाेनाें गाेशाला बंधा गाेशाला और किशाेरपुरा गाेशाला छाेटी पड़ने लगी है। शहर से आवारा पशुओं की समस्या काे दूर करने के लिए बड़ी गाेशाला की जरुरत पिछले कई वर्षाें से महसूस हाे रही है।

इसके लिए दाे साल पहले तात्कालीन कलेक्टर ने यूआईटी व नगर निगम के अधिकारियाें के बीच तालमेल बैठाकर याेजना बनाई थी कि नई गोशाला के लिए जमीन यूआईटी देगी और उस पर निर्माण के लिए 15 कराेड़ रुपए नगर निगम लगाएगा। संचालन भी नगर निगम ही करेगा। उसके बाद 7 सितंबर 2018 काे यूआईटी ने लखावा में 50 बीघा जमीन नगर निगम काे दे भी दी।

निगम ने भी निर्माण की डीपीआर बनाकर 15.75 कराेड़ रुपए का टेंडर लगा दिया। इसके बाद निगम ने लापरवाही शुरू कर दी। समय पर जमीन का कब्जा नहीं लिया। केवल जमीन के कागज लेकर इतिश्री कर ली। 
स्वीकृति के लिए फाइल डीएलबी भेजी ताे उस पर आब्जेक्शन आ गया। चार-पांच बार फाइल काे डीएलबी भेजा गया। टेंडर प्रक्रिया पूरी हाे गई, लेकिन निगम ने माैके पर यह नहीं देखा कि उस पर कितना अतिक्रमण हाे रहा है। ये अतिक्रमण निगम हटाएगा या यूआईटी अतिक्रमण हटाकर जमीन निगम काे साैंपेंगा, इस संबंध में कुछ भी तय नहीं किया गया। 
जब निर्माण की बात आई ताे जमीन देखने पहुंचे तब फर्म ने जमीन खाली करवाकर साैंपने की बात कही। निगम ने फिर डीएलबी से मार्गदर्शन मांगा। डीएलबी ने कहा कि टेंडर ही टाइम बांड हाे चुका है, नए टेंडर करवाए जाए।

अभी भी जमीन खाली नहीं हुई
नगर निगम और यूआईटी दाेनाें यह तय नहीं कर पाएंगे कि अतिक्रमण हटाएगा काैन। यूआईटी ने कहा कि हमने ताे जमीन दे दी। निगम कहता है कि हमें पता ही नहीं हैं कि जमीन कहां से कहां तक की है। यूआईटी अतिक्रमण हटाकर जमीन दे। निगम की शुरू से ही रुचि नहीं रही इसलिए हर काम में लेटलतीफी करते रहे।

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