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पहली बार भास्कर में देखिए नन्हे मगरमच्छ:चंबल की कोख में बढ़ रहा है मगरमच्छों का कुनबा; रावतभाटा क्षेत्र में आबोहवा भी आई रास

कोटा21 दिन पहले
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भैंसरोडगढ़ वन्य जीव अभयारण्य में बने सेटलडैम रिलोकेशन सेंटर के क्रोकोडाइल प्वाइंट पर इन दिनों मगरमच्छ के अंडों से निकलकर छिपकली के आकार के और कुछ उससे बड़े बच्चे पानी में अठखेलियां करते नजर आ रहे हैं। - Dainik Bhaskar
भैंसरोडगढ़ वन्य जीव अभयारण्य में बने सेटलडैम रिलोकेशन सेंटर के क्रोकोडाइल प्वाइंट पर इन दिनों मगरमच्छ के अंडों से निकलकर छिपकली के आकार के और कुछ उससे बड़े बच्चे पानी में अठखेलियां करते नजर आ रहे हैं।

चंबल का नैसर्गिक सौंदर्य, पहाड़, नदी और जंगल किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। यह जलीय जीवों के प्रजनन के लिए भी उपयुक्त जगह बनती जा रही है। भैंसरोडगढ़ वन्य जीव अभयारण्य में बने सेटलडैम रिलोकेशन सेंटर के क्रोकोडाइल प्वाइंट पर इन दिनों चंबल की कोख में बड़ी संख्या में मगरमच्छों का प्रजनन हुआ है। अंडों से निकलकर छिपकली के आकार के और कुछ उससे बड़े मगरमच्छ के बच्चे चंबल में अठखेलियां करते हुए दिखे हैं।

1000 से अधिक मगरमच्छ हैं अकेले रावतभाटा स्थित चंबल नदी में। रावतभाटा क्षेत्र में घड़ियाल एक भी नहीं है।
1000 से अधिक मगरमच्छ हैं अकेले रावतभाटा स्थित चंबल नदी में। रावतभाटा क्षेत्र में घड़ियाल एक भी नहीं है।