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पर्यावरण दिवस विशेष:एक फल तक नहीं तोड़ते, यहां की वनस्पति और फलों-फूलों पर सिर्फ पशु-पक्षियों का अधिकार

कोटा3 महीने पहले
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  • 225 बीघा बंजर जमीन पर पांच साल में उगा दिया जंगल

कोटा के बिजनेसमैन कमल हिसारिया ने बस्सी के पास बंजर पड़ी 225 बीघा जमीन पर पांच साल में जंगल उगा दिया। यहां विभिन्न प्रजातियों के लाखों पौधे पनप रहे हैं। खासबात ये है कि इन वनस्पतियों और पेड़-पौधों पर लगने वाले फल-फूलों पर सिर्फ आसपास के जानवरों और पक्षियों का अधिकार है।

हिसारिया बताते हैं कि उन्होंने सात साल पहले यह जमीन खरीदी थी। आसपास के लोग यहां से लकड़ियां काट कर ले जाते थे, जिससे धीरे-धीरे यह जमीन बंजर हो गई। उन्होंने सबसे पहले इसके तीन हिस्सों में करीब पांच किलोमीटर में बाउंड्रीवॉल करवाई। इतने बड़े एरिया में बाउंड्रीवॉल करवाना बड़ा टास्क था। इसके बाद यहां सीताफल जैसे अनगिनत फलदार पौधे लगाए जिनसे पशु-पक्षी पेट भर सकें। साथ ही इनके पानी पीने के लिए जगह-जगह पॉट भी बनाए हैं।

मिनी रिजर्व की तरह किया है डवलप, स्वछंद घूमते हैं जानवर
करीब पांच सौ मीटर ऊंचाई पर स्थित निजी खाते की इस जमीन का एक हिस्सा पहाड़ से सटा है। इस वजह से यहां वन्यजीव भी आसानी से विचरण करते हैं। यह जगह मिनी रिजर्व की तरह है। यहां हर तरह के जानवर स्वछंद घूमते हैं और उनके लिए प्रेबेस और हैबिटेट भी डवलप हुआ है।
प्रकृति ने दिया है तो उसे लौटना भी हमारा फर्ज है : कमल हिसारिया कहते हैं कि हमें इस प्रकृति को लौटाना भी चाहिए। हम इसे सहेज लें तो यह खुद को अपने आप ही विकसित कर लेती है। यहां जो भी उगता है, वह इन वन्यजीवों पक्षियों के हिस्से का है। यहां से एक फल भी नहीं तोड़ते हैं।

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