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जन अनुशासन:लाॅकडाउन की वजह से फैक्ट्रियाें में उत्पादन घटकर 50 से 60 फीसदी ही रह गया, रोज 500 कराेड़ का हो रहा नुकसान

काेटा10 दिन पहले
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लॉकडाउन में सैंड स्टोन का ही चल रहा अच्छा काम - Dainik Bhaskar
लॉकडाउन में सैंड स्टोन का ही चल रहा अच्छा काम
  • फैक्ट्रियों में आधे रह गए मजदूर, ऑक्सीजन ने राेकी काेटा स्टाेन की रफ्तार

काेराेना की वजह से लगे लाॅकडाउन के चलते काेटा की फैक्ट्रियाें में उत्पादन 50 से 60 फीसदी ही रह गया है। अधिकतर फैक्ट्रियाें में आधे से भी कम श्रमिक काम कर रहे हैं। वहीं खाने-पीने के सामान बनाने वाली फैक्ट्रियाें में दिनरात काम चल रहा है। उत्पादन घटने से राेज का करीब 500 कराेड़ का नुकसान हाे रहा है। दी एसएसआई के संस्थापक गाेविंद राम मित्तल ने बताया कि शहर सैंड स्टाेन और काेटा स्टाेन के अलावा छाेटी बड़ी 200 इंड्रस्ट्रीज हैं। इनमें फूड प्राेसेसिंग की 20 से अधिक, वेल्डिंग की 20 से अधिक, केमिकल्स की 20 से अधिक, इंजीनियरिंग पार्ट्स, इलेक्ट्राॅनिक्स आदि की फैक्ट्रियां हैं।

यहां करीब 3000 मजदूर काम करने चाहिए, लेकिन पिछली बार काेराेना के बाद फैक्ट्रियां चालू हुईं, लेकिन 60 फीसदी ही श्रमिक वापस लाैटे। अब दोबारा जब काेराेना फैला ताे 10 फीसदी और श्रमिक कम हाे गए। ऐसे में करीब 1300 से 1500 श्रमिक ही काम कर रहे हैं। इसके चलते फैक्ट्रियाें में उत्पादन कम हाे गया है। केवल 50 से 60 फीसदी ही प्राेडक्शन कर पा रहे हैं।
इन तीन प्रमुख कारणों से हो रहा है नुकसान

पिछली बार कोरोना के बाद फैक्ट्रियां शुरू हुईं तो 60 प्रतिशत श्रमिक ही काम पर लौटे। इस बार अब श्रमिक काम पर नहीं लाैट रहे हैं। आधे श्रमिकाें से फैक्ट्री संचालक का काम चला रहे हैं। देशभर में लाॅकडाउन से कई सामानाें की डिमांड एकदम कम हाे गई, ऑडर भी नहीं मिल पा रहे हैं। इस वजह से उत्पादन कम कर दिया गया है। कच्चे माल की कीमतें आसमान पर हैं, इसकी वजह से भी फैक्ट्री वालाें ने प्राेडक्शन कम कर दिया है।

ऑक्सीजन नहीं मिलने से कोटा स्टोन की उखड़ रही सासें

शहर में काेटा स्टाेन की 100 इंड्रस्ट्रीज हैं और करीब 3 से 4 हजार श्रमिक काम करते थे। यहां पत्थर काे काटने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत हाेती है। ऐसे में जब देश में ऑक्सीजन की कमी हुई ताे काेटा स्टाेन काे भी ऑक्सीजन मिलना बंद हाे गई। इसके चलते 50 फीसदी से अधिक इंड्रस्ट्रीज में काम बंद हाे गया।

स्टाेन इंड्रस्ट्रीज एसाेसिएशन के अध्यक्ष आरएन गर्ग ने बताया कि ऑक्सीजन का काेटा स्टाेन की कटिंग में अहम राेल हाेता है। इसकी वजह से प्राेडक्शन निरंतर कम हाे रहा है। पहले यहां 1 लाख फीट का प्राेडक्शन हाेता था, जाे घटकर 50 हजार फीट का प्राेडक्शन ही रह गया है। अब ताे कई इंडस्ट्रीज बंद हाेने लगी हैं। खानें में काम बंद है। इसकी वजह से कच्चा माल भी नहीं आ रहा है। वहीं आगे से ऑर्डर भी नहीं मिल रहे हैं।

सैंड स्टाेन पर काेई असर नहीं, रोज निकल रहा करीब 4 कराेड़ का पत्थर

वहीं काेराेना काल में पहले भी सैंड स्टाेन अच्छा चल रहा था। इस बार भी सैंड स्टाेन का काम ठीक है। सैंड स्टाेन व्यवसायी उत्तम चंद अग्रवाल का कहना है कि राेज 400 से अधिक गाड़ियां भर रही हैं। इसमें एक 100 गाड़ियां एक्सपाेर्ट हाे रही हैं। यानि राेज 4 कराेड़ का उत्पादन है। इसमें से 1 कराेड़ का एक्सपाेर्ट किया जा रहा है।

बूंदी, काेटा, बिजाेलिया में करीब 800 से अधिक खाने चल रही हैं। इससे सैंड स्टाेन के उत्पादन पर काेई फर्क नहीं पड़ रहा है। यहां करीब डेढ़ से 2 लाख मजदूर काम कर रहे हैं। 1200 से 1500 स्टाॅक व फैक्ट्री वाले इस काराेबार में जुटे हुए हैं। लगातार ऑर्डर मिलने से भी का अच्छा चल रहा है। वहीं फूड प्रोसेसिंग का काम भी ठीक चल रहा है। यहां कर्मचारी उत्पादन में लगे हुए हैं।

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