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भास्कर इंपैक्ट:कोविड के कारण डेढ़ साल से बंद नेत्र चिकित्सा शिविर अब फिर से शुरू होंगे, सरकार ने दी अनुमति

काेटाएक महीने पहले
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भास्‍कर में प्रकाशित खबर। - Dainik Bhaskar
भास्‍कर में प्रकाशित खबर।

राज्य में करीब डेढ़ साल से काेविड के चलते बंद नेत्र चिकित्सा शिविर अब फिर से लगाए जा सकेंगे। इसके लिए राज्य कार्यक्रम समिति (अंधता) के अध्यक्ष ने अनुमति दे दी है। इसके साथ ही सभी सीएमएचओ को निर्देशित किया गया है कि वे मोतियाबिंद सर्जरी का बैकलॉग को पूरा करने के लिए संबंधित संस्थाओं के सहयोग से फिर से कैंप शुरू कराएं।

ज्वॉइंट डायरेक्टर (अंधता) डॉ. दिनेश पारीक ने बताया कि निदेशक के स्तर पर दो दिन पहले ही इस संबंध में नीतिगत निर्णय हो गया था कि अब फिर से कैंप शुरू कर दिए जाएं। इसके ऑर्डर भी जारी हो गए। अब हमने सभी सीएमएचओ को कहा है कि वे अपने-अपने जिले के एनजीओ से बात करके फिर से कैंप लगवाएं।

साथ ही कैंपों में कोविड प्रोटोकॉल फॉलो करना भी सुनिश्चित करें। डॉ. पारीक ने बताया कि हम इस वित्त वर्ष का टारगेट अचीव कर लेंगे, राज्य में सालाना 3 लाख सर्जरी का टारगेट होता है। इसमें से ज्यादातर सर्जरी अक्टूबर से मार्च के बीच ही होती है। अब तक करीब 44 हजार ऑपरेशन हो चुके हैं, बचे 6 माह में ढाई लाख सर्जरी का टारगेट रहेगा।

इस बार हम सभी मेडिकल कॉलेजों को इनवॉल्व करने का प्रयास कर रहे हैं कि वे भी कैंपों में सहभागी बनें, ताकि बेहतर क्वालिटी से अच्छी संख्या में सर्जरी हो पाए। इसके लिए मेडिकल कॉलेज की टीम के साथ अलग से बैठक भी करेंगे।

गौरतलब है कि भास्कर ने गुरुवार के अंक में ही यह मुद्दा उठाया था कि बीते डेढ़ साल में प्रदेश में करीब दो लाख मोतियाबिंद सर्जरी का बैकलॉग हो गया, इनमें से करीब 10 हजार लोगों के मोतियाबिंद पक गए। भास्कर ने एक्सपर्ट के हवाले से यह भी बताया था कि इसे लेकर तत्काल प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में घातक दुष्परिणाम हो सकते हैं। मोतियाबिंद ज्यादा समय तक रहने की स्थिति में काला पानी की स्टेज पर पहुंच जाता है, जो आंखों की रोशनी खत्म कर देता है।

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