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हिम्मत नही टूटने दी:3 बार RAS व 2 बार IAS में असफल रहे, 9 साल संघर्ष किया, इंटरव्यू के 1 माह पहले पिता की मौत हुई, चौथे प्रयास में 176 वीं रैंक हासिल की

कोटा22 दिन पहले
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अजहर बैग  ने RAS 2018 में 176 वीं रैंक हासिल की है - Dainik Bhaskar
अजहर बैग ने RAS 2018 में 176 वीं रैंक हासिल की है

शहर के माला फाटक, महात्मा गांधी कॉलोनी निवासी अजहर बैग (29) ने RAS 2018 में 176वीं रैंक हासिल की है। इससे पहले अजहर बैग 5 प्रयासों में असफल रहे थे। 3 बार RAS व 2 बार IAS एग्जाम में असफलता मिलने पर हिम्मत जवाब देने लगी थी। लेकिन पिता ने हौसला बढ़ाया,अजहर की हिम्मत नहीं टूटने दी। आखिरकार अजहर ने RAS के चौथे प्रयास में सफलता के झंडे गाड़े।ओर परिवार का नाम रोशन किया।

अजहर ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में उनके पिता भी संक्रमित हुए थे। एमबीएस अस्पताल में भर्ती रहे। अस्पताल में रहकर उनकी सेवा की। इस दौरान शारिरिक व मानसिक रूप से कमजोर हुआ। उस दौरान भी पिता ने सपोर्ट किया। हार नही मानने दी। एक माह पहले ही पिता की मौत हुई है।

रोज 6 से 8 घण्टे पढ़ाई की। इस दौरान हॉकी खेलना नहीं छोड़ा। 2015-16 में दिल्ली जाकर IAS की कोचिंग की।
रोज 6 से 8 घण्टे पढ़ाई की। इस दौरान हॉकी खेलना नहीं छोड़ा। 2015-16 में दिल्ली जाकर IAS की कोचिंग की।

9 साल संघर्ष

अजहर ने बताया कि RAS 2012, 2015,2016 के एग्जाम में 5-7 कट ऑफ से रह गया था। इसके बाद IAS की तैयारी शुरू की। साल 2017 में 40 नम्बर से रह गए। साल 2018 में दुबारा प्रयास किया लेकिन 1 नम्बर से चूक गए। 774 कट ऑफ गई। अजहर के 773 मार्क्स रह गए। सफर संघर्षपूर्ण रहा। हर बार मुख्य परीक्षा में बहुत कम नंबर से रह जाता था।अंतिम रूप से चयन नहीं हो पाता था।

2018 की RAS परीक्षा में इंटरव्यू से 1 महीना पहले पिता कोरोना संक्रमित हुए। 20 दिन बाद उनका निधन हो गया। ये वक्त काफी मुश्किल भरा था। परंतु हिम्मत बनाए रखी,और इंटरव्यू दिया। लम्बे संघर्ष से सफलता मिली।

अजहर दो भाइयों में सबसे बड़े है। एक बहिन है जिसकी शादी हो चुकी। पिता की मौत के बाद छोटा भाई बिल्डिंग मेटीरियल का काम संभालता है। अजहर को बचपन से ही हॉकी खेलने का शोक है। हॉकी के स्टेट प्लेयर रहने के साथ साथ कोटा यूनिवर्सिटी की हॉकी टीम का कप्तान रह चुके है। अजहर बताते है कि स्कूल,कॉलेज टाइम में आयोजित कार्यक्रमों में अधिकतर प्रशासनिक अधिकारी ही मुख्य अथिति के तौर पर आते थे। उनके रुतबे को देखकर,अधिकारी बनने की ठान ली।सेल्फ स्टडी शुरू की। रोज 6 से 8 घण्टे पढ़ाई की। इस दौरान हॉकी खेलना नहीं छोड़ा। 2015-16 में दिल्ली जाकर IAS की कोचिंग की।

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