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भास्कर की खबर का असर:6 माह से सीएमओ में अटकी फाइल 6 घंटे में मंजूर, नए एयरपोर्ट के लिए राज्य सरकार मुफ्त देगी 1250 एकड़ जमीन

कोटा16 दिन पहले
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जमीन के हस्तांतरण के लिए प्रदेश के नागरिक उड्‌डयन विभाग के संयुक्त शासन सचिव राजीव जैन की चिट्‌ठी आ गई।  - Dainik Bhaskar
जमीन के हस्तांतरण के लिए प्रदेश के नागरिक उड्‌डयन विभाग के संयुक्त शासन सचिव राजीव जैन की चिट्‌ठी आ गई। 
  • राज्य के सिविल एविएशन विभाग के संयुक्त शासन सचिव ने कलेक्टर पत्र भेज दी सूचना, कहा- शीघ्र जमीन हस्तांतरण की कार्रवाई करें
  • राज्य सरकार ने जमीन आवंटन के लिए सारी शर्तें भी हटाई

कोटावासियों के लिए खुशखबर है। शंभूपुरा में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की सबसे बड़ी रुकावट दूर हो गई है। दैनिक भास्कर की खबर के बाद 6 माह से अटकी जमीन ट्रांसफर की फाइल को बुधवार काे 6 घंटे में मंजूरी मिल गई। राज्य सरकार ने एएआई को 1250 एकड़ जमीन बिना शर्त और निशुल्क देने का फैसला किया है। बुधवार शाम लगभग 4 बजे कलेक्टर उज्जवल राठौड़ के पास जमीन के हस्तांतरण के लिए प्रदेश के नागरिक उड्‌डयन विभाग के संयुक्त शासन सचिव राजीव जैन की चिट्‌ठी आ गई।

असल में कोटा एयरपोर्ट को लेकर सबसे बड़ा पेंच जमीन पर फंसा हुआ था, राज्य सरकार जमीन देने से पहले मौजूदा एयरपोर्ट की जमीन पर चर्चा करना चाह रही थी, जबकि केंद्र सरकार वर्तमान एयरपोर्ट की जमीन पर फाइनेंशियल मॉडल तय होने के बाद चर्चा करने को तैयार था।

सिविल एविएशन सेक्रेटरी का कहना था कि उस पर बाद में चर्चा हो सकेगी, लेकिन पहले नए एयरपोर्ट के लिए जमीन दें, ताकि हम आगे का प्रोसेस शुरू कर पाएं। इसी वजह से फरवरी से एयरपोर्ट का मामला अटका हुआ था। इस पूरे मुद्दे को भास्कर ने बुधवार के अंक में “नए एयरपोर्ट पर राज्य सरकार की सौदेबाजी, केंद्र को लिखा-जमीन ट्रांसफर से पहले पुराने एयरपोर्ट की आय पर चर्चा जरूरी’ शीर्षक से प्रमुखता से उठाया था।

एक्सपर्ट व्यू

95% जमीन वन विभाग की, डायवर्जन में लगेंगे 3-4 माह

कोटा एयरपोर्ट के लिए चिह्नित की गई 1250 एकड़ जमीन में से करीब 1200 एकड़ जमीन वर्तमान में वन विभाग की है। इस लैंड को डायवर्जन का प्रोसेस समझने के लिए भास्कर ने रिटायर्ड वन अधिकारी ललित सिंह राणावत से बात की, उन्होंने बताया-

  • किसी भी वन भूमि के गैर वानिकी यूज के लिए वन संरक्षण अधिनियम के तहत भारत सरकार की स्वीकृति आवश्यक है।
  • ऐसे मामलों में लैंड डायवर्जन के प्रस्ताव तैयार करके राज्य सरकार की ओर से केंद्र को भेजे जाते हैं।
  • केंद्र के स्तर पर प्रस्तावों को एग्जामिन करके पहले सैद्धांतिक स्वीकृति जारी की जाती है।
  • सैद्धांतिक स्वीकृति के साथ ही भारत सरकार कुछ शर्तें देती है, जिनकी पालना करके रिपोर्ट भेजनी होती है।
  • पालना रिपोर्ट मिलने के बाद भारत सरकार फाइनल स्वीकृति जारी करता है।
  • इसमें यदि कोई वाइल्ड लाइफ का एरिया आए तो अंतिम स्वीकृति वाइल्ड लाइफ बोर्ड जारी करता है।
  • मेरा जहां तक अनुभव है, इस प्रोसेस में कम से कम 3-4 माह जरूर लगते हैं।

खबर प्रकाशित होते ही सीएमओ से हुए आदेश

दैनिक भास्कर ने खबर में राज्य के मुख्य सचिव द्वारा केंद्र सरकार और केंद्र सरकार द्वारा मुख्य सचिव को लिखे गए पत्रों के साथ पूरी जानकारी दी गई थी कि कोटा एयरपोर्ट का मामला कहां और क्यों अटका हुआ है। सुबह जैसे ही यह खबर छपी तो राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई। राज्य सचिवालय हरकत में आया। इस मामले की फाइल सीएमओ में लंबित थी, सीएमओ के स्तर से हरी झंडी मिलने के बाद जमीन फ्री देने के आदेश जारी हो गए।

आगे क्या?

फॉरेस्ट लैंड के बदले 1200 एकड़ जमीन देगी यूआईटी

एएआई द्वारा चिह्नित 1250 एकड़ में से 95 प्रतिशत जमीन फॉरेस्ट की है। जबकि 5 प्रतिशत हिस्सा यूआईटी के स्वामित्व का है। एक से डेढ़ बीघा जमीन का एक टुकड़ा निजी खातेदारी का भी है। कलेक्टर उज्जवल राठौड़ ने बताया कि अब जमीन हस्तांतरण का प्रोसेस तेजी से होगा।

  • फॉरेस्ट लैंड के बदले वन विभाग को यूआईटी उतनी ही जमीन देगी। यह भूमि उसी जमीन के पीछे है, जो एयरपोर्ट के लिए ली जा रही है। इसे लेकर दोनों विभागों के अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, ताकि वे जल्दी प्रोसेस पूरा करें।
  • यूआईटी की जमीन नगरीय विकास विभाग के स्तर से एएआई को ट्रांसफर की जाएगी। वहीं, लैंड डायवर्जन संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद फॉरेस्ट से एएआई को जमीन ट्रांसफर होगी।
  • निजी खातेदार की जमीन को अधिग्रहित करके विधिवत प्रक्रिया के तहत हस्तांतरित किया जाएगा। इसमें बहुत बड़ा हिस्सा नहीं है और जहां तक मेरी जानकारी में है, यह जमीन भी किसी स्थान के नाम से है, व्यक्ति के नहीं है।

हस्तांतरण जल्द कराने का प्रयास : बिरला

केंद्र सरकार कोटा में नया ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमति पहले ही दे चुकी है। अबराज्य सरकार फॉरेस्ट लैंड के कन्वर्जन के प्रस्ताव जल्दी तैयार करके केंद्र को भिजवाए। इन प्रस्तावों को भी हम यहां जल्दी स्वीकृत कराने का प्रयास करेंगे। -ओम बिरला, लोकसभा अध्यक्ष

ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की भूमि आंवटन के लिए लगातार राज्य स्तर पर प्रयास कर रहा था। जिससे कोटा में पर्यटन के साथ उद्योगों को बढ़ावा मिल सके। इसके लिए मैंने राज्य सरकार के समक्ष निशुल्क भूमि आवंटन का पक्ष रखा। जिससे एयरपोर्ट की बाधाएं दूर हो सकें। - शांति धारीवाल, यूडीएच मंत्री