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जिला प्रमुख और सीईओ में टकराव:पहले जिला प्रमुख को दी खटारा कार, एक्सीडेंट होते होते बचा तो कार में बैठना बंद किया; अब बाइक से आ रहे ऑफिस

कोटा4 महीने पहले
जिला प्रमुख बाइक से आ रहे ऑफिस।

कोटा जिला प्रमुख मुकेश मेघवाल अपने ऑफिस बाइक से आ जा रहे हैं। उन्हें जो कार आवंटित की गई थी वो खटारा दी गई। एक्सीडेंट होते होते बचा तो जिला प्रमुख ने उसमें बैठना बंद कर दिया। दूसरी कार के लिए कहा तो ड्राइवर ही लेने नहीं गया। इसके बाद वे बाइक से ऑफिस आ जा रहे हैं। इस प्रकरण में जिला प्रमुख और जिला परिषद सीईओ ममता तिवारी टकराव की राह पर जाती दिख रही हैं।

दरअसल जिला प्रमुख मुकेश मेघवाल को जिला परिषद की तरफ से सफारी गाड़ी दी गई। गाड़ी खराब हालत में थी, उसे काम चलाऊ तैयार कर जिला प्रमुख को दे दी गई। मुकेश मेघवाल ने बताया कि उनकी कार के कभी गेट जाम हो जाते तो कभी कांच जाम हो जाते। 25 दिसंबर को उन्हें सरकारी गाड़ी मिली लेकिन वह भी सरकारी ढर्रे पर ही चलती रही। दो बार सड़क पर धोखा दे गई। कुछ दिन पहले सांगोद में ब्रेक फ़ैल हो गए। जिसमें वे बाल बाल बचे। इसके बाद तो जिला प्रमुख मेघवाल ने इस कार से तौबा कर ली।

उन्होंने सीईओ से दूसरी गाड़ी के लिए कहा। उन्हें डिजायर गाड़ी के लिए कहा लेकिन ड्राइवर ही नहीं आया। इसके बाद उन्होंने अपनी बाइक से ही आना जाना शुरू कर दिया। उनकी खराब हो चुकी कार जिला प्रमुख चेंबर के बाहर ब्रेकडाउन हाल में खङी है।

60 किलोमीटर बाइक से तय करते है सफर

प्रोटोकॉल के हिसाब से तो जिला प्रमुख को सही और सुरक्षित गाड़ी देनी चाहिए थी लेकिन खटारा गाड़ी उन्हें दे दी। जिसके बाद अब वे अपनी बाइक से ही गांव से जिला परिषद् आते है। सांगोद में उनका गांव है वहां से करीब 60 किलोमीटर का सफर वे सर्द हवाओं के थपेड़ो के बीच तीन दिन से बाइक पर तय कर रहे है। मुकेश मेघवाल का कहना है कि मैं तो गांव का आदमी हूं, अगर सही गाड़ी नहीं देते तो मैं बाइक से आता जाता रहूँगा।

सीईओ बोली मॉनिटरिंग मेरा काम नहीं

मामले में जिला परिषद की सीईओ ममता तिवारी का कहना है कि जिला प्रमुख की कार की मिनट-टू-मिनट मॉनिटरिंग मेरा काम नहीं है। हालांकि उनका कहना है कि सरकार को इसके लिए सरकार को लिखा है। जिला प्रमुख को नई कार आवंटन की फाइल चली है। लेकिन इस पूरे प्रकरण में जिला परिषद कोटा में जिला प्रमुख और और सीईओ की खराब रिश्तों का अनचाहा अध्याय जरूर शुरू हो गया हैं।