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कोरोना इफेक्ट:पहली बार दशहरा मैदान में भीड़ नहीं , लोगों ने घर बैठे देखा रावण दहन

कोटाएक महीने पहले
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दशहरा मैदान में धू-धू कर जलता रावण का पुतला
  • हाड़ौती का सबसे बड़ा दशहरा मेला नहीं लगा, रावण दहन का किया लाइव प्रसारण

जिस दशहरे मैदान में दशहरा के दिन पैर रखने की जगह नहीं मिलती थी, वाे मैदान इस दशहरे पर खाली पड़ा हुआ था। यही नहीं जिस रावण के पुतले काे देखने के लिए गर्दन काे पूरा उठाना पड़ता था वाे सामने नजर आ रहा था। ये सब हुआ काेराेना के कारण। काेराेना की गाइड लाइन के चलते इस बार दशहरा मेला ताे भरा नहीं रावण दहन में भी दर्शकाें की एंट्री नहीं हाे सकी। दशहरा मेले के इतिहास में 126 साल बाद ये पहली बार हुआ कि 127वां रावण दहन केवल परंपराओं के निर्वहन के लिए किया गया। न काेई शाेभायात्रा निकली न काेई सवारी।

केवल कोटा राजपरिवार के महाराज कुमार इज्यराजसिंह द्वारा विधिवत रूप से मत्रोचार के साथ परम्परागत रूप से तीर चलाया और दहन की रस्म अदा कर दी गई। मात्र साढ़े तीन मिनिट में ही तीनाें पुतले जलकर स्वाहा हाे गए। इस अवसर पर निगम की तरफ से कोटा उत्तर के आयुक्त वासुदेव मालावत व कोटा दक्षिण की आयुक्त कीर्ति राठौड़ सहित पुलिस और निगम के चंद अधिकारी उपस्थित रहे।

ऐतिहासिक दशहरा मेले में प्रतिवर्ष रावण दहन लाखों लोगों की उपस्थिति में किया जाता रहा है। जिसमें देश-विदेश के पर्यटक एवं स्थानीय नागरीक बडी संख्या में शामिल हाेते थे। कोरोना संक्रमण को देखते हुए नगर निगम द्वारा इस वर्ष दशहरा मेले की सभी परम्पराओं को सादगी के साथ पूरा किया गया। रविवार को रावण का 12 फीट का पुतला, कुम्भकर्ण एवं मेघनाद के 10-10 फीट के पुतले मैदान में खड़े किए गए।

दशहरे मेले में नगर निगम के अधिकारियों एवं कोटा राज परिवार के सदस्य द्वारा ज्वारे एवं सीता माता के पाने की पूजा कर विधिवत रूप से रावण के पुतले के समक्ष रखे कुम्भ में तीर चलाकर रावण दहन की परम्परा को पूर्ण किया।दशहरे मेले में परम्परागत रूप से आने वाली लक्ष्मीनारायणजी की सवारी पूरे साज-सज्जा के साथ खुली गाडी में दशहरा मैदान लाई गई।
जहां निगम के अधिकारियों ने पूजा-अर्चना कर देश-प्रदेश की खुशहाली की कामना की। महाराज कुमार इज्यराज सिंह ने कहा कि दशहरा मेला कोटा की पहचान है, जिसमें प्रतिवर्ष लाखों देशी-विदेशी पर्यटक भाग लेते हैं। इस बार कोरोना संक्रमण के कारण परम्पराओं को सादगी के साथ निभाया गया है। उन्होंने इस अवसर पर जिले के नागरिकों को शुभकामनाऐं भी प्रेषित की।
काेराेना के कारण दर्शकाें पर लगाई गई थी पाबंदी
उत्तर निगम आयुक्त वासुदेव मालावत ने कहा कि कोरोना के कारण इस बार दशहरा मेला का आयोजन नहीं किया गया, लेकिन परम्परा काे टूटने नहीं दिया। कोटा दक्षिण आयुक्त कीर्ति राठौड़ ने बताया कि सरकार की निर्देशों की पालना में दशहरा आयोजन में कोरोना गाईड लाईन की पालना की गई है। मेले में इस बार संक्रमण को देखते हुए भीड आने पर रोक थी।

इसी कारण निगम अधिकारियों एवं राज परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में रावण दहन की परम्परा निभाई गई है। इस अवसर पर उत्तर निगम के अतिरिक्त आयुक्त राजपाल सिंह, कोटा दक्षिण उपायुक्त अशोक त्यागी, एएसपी मुख्यालय राजेश मील, शहर प्रवीण जैन, पुलिस उपाधीक्षक संजय शर्मा, बलवीर सिंह, प्रशिक्षु आईपीएस एन.प्रवीण नायक, एसई प्रेम शंकर शर्मा, एक्सईएन एक्यू कुरैशी उपस्थित रहे।

आतिशबाजी के साथ रावण दहन का लाइव प्रसारण किया
रावण दहन के दाैरान रंग-बिरंगी प्रदुषण रहित आतिशबाजी की गर्ई। रावण, मेघनाद व कुम्भकर्ण के पुतले के दहन के साथ ही आतिशबाजी से आकाश रंगीन हो उठा। आम नागरिकों को इस नजारे को देखने का मौका नहीं मिला। आसपास के लाेगाें ने छताें से नजारा देखा। बाकी के लिए केबल नेटवर्क पर लाइव प्रसारण की व्यवस्था की गई थी।

बच्चों ने पाॅकेटमनी से पुतले बनाकर किया दहन

महावीर नगर निवासी हिमांशु जिंदल और हिमानशी ने करीब 5 फीट का रावण का पुतला बना दहन किया। महावीर में शाहिल, अखिलेख, तन्मय, दीपक, राैनक, हर्ष, याशिका ने पुतला बनाकर दहन किया।

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