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सैंड स्टाेन पर 25% बढ़ गई राॅयल्टी:महंगे डीजल से माल भाड़ा भी बढ़ गया, निर्यात घटने का अंदेशा, 60 हजार लाेगाें के राेजगार पर खतरा

कोटाएक महीने पहलेलेखक: पंकज मित्तल
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चीन के अलावा यूराेप के कुछ देशाें में भी माइनिंग शुरू हाेने से भी सैंड स्टोन कारोबारियों को मिल रही चुनौती। - Dainik Bhaskar
चीन के अलावा यूराेप के कुछ देशाें में भी माइनिंग शुरू हाेने से भी सैंड स्टोन कारोबारियों को मिल रही चुनौती।

हाड़ाैती और बिजाेलिया इलाके में हाेने वाले सैंड स्टाेन के काराेबार पर इन दिनाें संकट के बादल मंडरा गए हैं। सरकार ने पिछले हफ्ते ही सैंड स्टाेर पर राॅयल्टी 25 फीसदी बढ़ा दी है। अब काराेबारियाें काे 130 रुपए प्रति टन की बजाए 170 रुपए राॅयल्टी देनी हाेगी। इससे सैंड स्टाेन के दाम प्रति टन 25 फीसदी बढ़ने चाहिए, लेकिन विदेशाें से इतनी रेट नहीं मिल पा रही है। ऐसे में स्टाेन व्यवसायी खासे परेशान हैं। क्याेंकि पहले से ही डीजल के दाम बढ़ने और रेलवे कंटेनर से माल ढुलाई का किराया चार गुना दाम बढ़ने से काराेबार आधा रह गया है।

आने वाले समय में और ज्यादा असर आएगा

स्टाेन व्यवसायी बीएल गुप्ता ने बताया कि यूके, यूएस, जर्मनी, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, न्यूजीलैंड सहित कई देशाें में सैंड स्टाेन जाता है। इसके अलावा इंडिया में सबसे ज्यादा हरियाणा व मारवाड़ इलाके में जाता है। ऐसे में राॅयल्टी के दाम बढ़ने से काराेबार पर सीधा असर आएगा।

स्टाेन व्यवसायी व एसाेसिएशन के पूर्व अध्यक्ष उत्तम अग्रवाल ने बताया कि पहले जाे कंटेनर 1500 डाॅलर में मिल जाता था, अब वह 6000 रुपए डाॅलर तक पहुंच गया है। इसकी वजह से स्टाेन विदेशाें में भेजना काफी महंगा पड़ने लगा है। यह पत्थर यूराेपीय देशाें में ज्यादा जाता है, वहां के व्यापारी भी ज्यादा रेट देने काे तैयार नहीं हैं।

ऐसे में राेजाना की सप्लाई 40 कंटेनर से घटकर 10 से 15 कंटेनर पर आ गई है। ऐसे में राॅयल्टी बढ़ाने से दाम 25 फीसदी और बढ़ जाएंगे। ऐसे में यह काराेबार पूरी तरह से संकट में आ गया है। सरकार ने राॅयल्टी कम नहीं की ताे निर्यात बंद हो जाएगा। चीन व यूराेप के कुछ देशाें में भी सैंड स्टाेन की माइनिंग शुरू हाे गई है।

5000 टन सैंड स्टोन राेजाना निकलता है हाड़ौती की 800 खदानों से

बूंदी, काेटा, बिजाेलिया इलाके में करीब 800 खाने हैं और करीब 2000 पत्थर की यूनिटें हैं। यहां हर राेज 5000 टन से अधिक का उत्पादन हाेता है। यहां से राेज 1200 से 1500 टन पत्थर का निर्यात हाेता है। बाकी खपत देश में ही हाेती है। इसके अलावा 2 लाख लाेग इस काराेबार से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। ऐसे में यह हाड़ाैती का बड़ा काराेबार है।

  • काेराेना में भी नहीं थमा था दाैर : व्यवसायी उत्तम अग्रवाल का कहना है कि काेराेना की पहली लहर के बाद जब लाॅकडाउन खुलने लगा ताे उसके बाद विदेशाें से सैंड स्टाेन की डिमांड आने लगी थी और यहां खानाें काे पूरी सुरक्षा के साथ चालू कर दिया था और पूरे समय खूब सैंड स्टाेन एक्सपाेर्ट हुआ था। ऐसे में करीब 1 लाख लाेगाें काे सीधे ताैर पर इस व्यवसाय से राेजगार मिला​​​​​​​ और वे भूखे नहीं रहे।
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