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कोटा में काेविड घाेटाला:सरकारी सप्लाई थी फिर भी जेकेलोन ने बाहर से खरीद ली 30 लाख की किट

कोटा2 महीने पहले
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  • चुनिंदा फर्माें काे फायदा देने के लिए खरीदे पीपीई किट, मास्क, सेनेटाइजर व डेड बाॅडी कवर

काेराेनाकाल के दाैरान अस्पतालाें में हुई सरकारी खरीद में गड़बड़ी के मामले सामने आने लगे हैं। काेटा में पहला मामला जेकेलाेन अस्पताल से सामने आया है। यहां काेराेना की आड़ में ऐसी सामग्री की लाेकल परचेज कर ली गई, जाे सरकारी सप्लाई में आ रही थी और इनकी कमी भी नहीं थी।

सूत्राें के अनुसार जेकेलाेन प्रशासन ने करीब 30 लाख रुपए की पीपीई किट, मास्क, सेनेटाइज, डेडबाॅडी कवर आदि की गैरजरूरी खरीद कर ली। ये खरीद 20 मार्च से 11 सितंबर के बीच की गई। इसपर इसलिए सवाल उठ रहे हैं क्याेंकि इसके लिए ड्रग वेयर हाउस से मंजूरी भी नहीं ली गई। आशंका जताई जा रही है कि चुनिंदा फर्माें काे फायदा पहुंचाने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने ऐसा किया।

अस्पताल द्वारा लोकल स्तर पर की गई खरीद के दस्तावेज दैनिक भास्कर के पास माैजूद हैं। इनसे सामने आया कि 20 मार्च से 11 सिंतम्बर के बीच 18 लाख 94 हजार 780 रुपए के पीपीई किट, 9 लाख 44 हजार के मास्क, 4 लाख 94 हजार 200 के सेनेटाइजर, 1 लाख 50 हजार के डेड बॉडी कवर सहित अन्य सामग्री की खरीद की गई है।

इस पूरी खरीद पर बहुत सारे सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि इतनी लोकल परचेज तो नए अस्पताल ने ही नहीं की, जहां पूरा संभाग स्तरीय कोविड अस्पताल संचालित है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि सरकारी सप्लाई में पर्याप्त मात्रा में उक्त सामान उपलब्ध होने के बावजूद बाजार से खरीद लिए गए। सरकारी सप्लाई के तहत आरएमएससीएल से मेडिकल कॉलेज के ड्रग वेयर हाउस को सप्लाई की जाती है। डिमांड के आधार पर ड्रग वेयर हाउस से संबंधित अस्पताल में सप्लाई भेजी जाती है।

पैरेलल इन्वेस्टिगेशन : खरीद से पहले ड्रग वेयर हाउस से मंजूरी भी नहीं ली

अस्पतालाें में लाेकल परचेज हाेना काेई नई बात नहीं है। इसके लिए रेट लिस्ट भी बनी हुई है। आम ताैर पर एमबीएस अस्पताल में जिस रेट पर खरीद की जाती है, उसी दाम पर अन्य अस्पताल भी खरीद करते हैं। लेकिन लाेकल स्तर पर दवाअओं या उपकरणाें की खरीद तभी हाेती है, जब सरकारी सप्लाई न हाे रही हाे और उसकी बहुत ज्यादा जरूरत हाे।

इस मामले में गड़बड़ी यहीं से शुरू हाेती है क्याेंकि जिन चीजाें की खरीद की गई वे सरकारी सप्लाई में पर्याप्त मात्रा में आ रही थीं। इसके अलावा सबसे बड़ी गड़बड़ी ये रही कि पूरी खरीद में निर्धारित प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया गया। नियमानुसार लाेकल परचेज से पहले ड्रग वेयर हाउस से एनएसी (नॉट अवेलिबिलिटी सर्टिफिकेट) लेना हाेता है। इस मामले में इसकी जरूरत ही नहीं समझी गई।

खरीद प्रक्रिया पर उठ रहे 3 बड़े सवाल

  • ऐसी क्या मजबूरी या जल्दबाजी थी कि लाेकल परचेज से पहले ड्रग वेयर हाउस से एनएसी तक लेना उचित नहीं समझा गया। जाहिर है कहीं न कहीं डर था कि एनएसी नहीं मिलेगी, क्याेंकि वहां पहले से सब सामान माैजूद था। क्याेंकि दूसरे अस्पतालाें काे वहां से लगातार सप्लाई दी जा रही थी।
  • जून में केंद्र की ओर से सेंट्रल सप्लाई के तहत दो बार में ड्रग वेयर हाउस को 45 हजार पीपीई किट भेजे गए थे। ऐसे में तब से पीपीई किट की किल्लत खत्म हाे गई थी। लेकिन जेकेलोन अस्पताल ने ड्रग वेयर हाउस से सितंबर तक केवल 600 पीपीई किट ही उठाए। बाकी की जरूरत लाेकल परचेज से पूरी की गई, ऐसा किन परिस्थितियाें में किया गया।
  • जब काेविड या काेविड सस्पेक्टेड की डेड बाॅडी के निस्तारण का सारा काम ही नए अस्पताल काे साैंप दिया गया था, क्याेंकि उसे काेविड हाॅस्पिटल बना दिया गया था ताे फिर जेकेलाेन अस्पताल में डेड बाॅडी कवर की क्या जरूरत थी? यदि कभी इक्कादुक्का बैग की जरूरत हाेती भी ताे नए अस्पताल से मंगाए जा सकते थे।

किट की क्वालिटी पर भी उठे थे सवाल

  • अस्पताल सूत्रों ने बताया कि इनमें मास्क व पीपीई किट की क्वालिटी ठीक नहीं थी। ऐसे पीपीई किट खरीदे, जिनमें शू कवर तक नहीं थे। इसके कारण शू कवर अलग से खरीदने पड़े।
  • बिल का भुगतान भी हाे गया: आशंका जताई जा रही है कि ये सारी खरीद कुछ फर्माें काे फायदा पहुंचाने के लिए की गई है। इसलिए इसमें जेकेलाेन के वरिष्ठ अधिकारियाें की मिलीभगत की आशंका भी है। ये सारी गैरजरूरी खरीद रेट काॅन्ट्रैक्ट पर ही की गई। इसके कारण अकाउंट्स ने भी इस पर काेई आपत्ति नहीं की और बिल का भुगतान कर दिया। लगभग 80 प्रतिशत बिल का भुगतान किया जा चुका है। ये खरीद जेएसएसवाई, एसएनसीयू, एमएलए संदीप शर्मा के विधायक काेष, डी एंड एम, सामग्री प्रदाय, एमएनजेवाई, एमएनडीवाई, जेएसएसके ड्रग एंड कंज्यूमेबल मदों से की गई।

अब आगे क्या? : मामला शनिवार को जैसे ही चर्चा में आया तो हड़कंप मच गया। अस्पताल प्रबंधन से लेकर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन तक खबर पहुंच गई। अब माना जा रहा है कि प्रिंसिपल के स्तर से इस मामले में एक जांच कमेटी के ऑर्डर होंगे, जिसमें अकाउंट्स के एक्सपर्ट शामिल किए जाएंगे। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारों पर गाज गिर सकती है।

जिम्मेदारों के जवाब

अस्पतालों की खरीद में सीधे तौर पर मेरा या हमारे ऑफिस का कोई रोल नहीं है। मैं कल ही मामले का पता करके कार्रवाई करूंगा।
- डॉ. विजय सरदाना, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज

यह उस वक्त की बात है, जब सरकारी सप्लाई नहीं आ रही थी या बहुत कम आ रही थी। हमने एनएसी लेकर ही खरीद की।

- डॉ. एससी दुलारा, अधीक्षक, जेकेलोन

मुझे ध्यान नहीं है कि जेकेलोन को हमने एनएसी दी हो। हमारे पास शुरू से पर्याप्त स्टॉक था। यदि मांगते तो हम सप्लाई भेज देते।
- डॉ. सुशील सोनी, प्रभारी, मेडिकल कॉलेज ड्रग वेयर हाउस

कोटा में कोरोना के 219 नए मरीज आए, तीन की माैत हुई

काेटा में शनिवार काे भी 219 नए काेराेना संक्रमित मरीज आए। वहीं, नए अस्पताल में पहले से भर्ती तीन मरीजाें की माैत हाे गई। मृतकाें में काेटा, बूंदी व बारां निवासी एक-एक राेगी हैं। नए अस्पताल के सूत्राें ने बताया कि काेटा के शिवपुरा निवासी 66 साल के पुरुष, बूंदी निवासी 82 साल के वृद्धा व बारां निवासी 53 साल के पुरुष की माैत हुई है। वहीं, आज की रिपाेर्ट में दाे चिकित्सक भी संक्रमित मिले हैं।

इनके अलावा एक-एक परिवार के तीन-चार सदस्य पाॅजिटिव पाए जा रहे हैं। अभी भी तलवंडी, महावीर नगर, दादाबाड़ी और जवाहर नगर जैसे एरिया हाॅटस्पाॅट बने हुए हैं। यहां संक्रमण दर पहले के मुकाबले कम ताे हुई है, लेकिन अभी भी राेजाना सबसे ज्यादा मरीज इन्हीं क्षेत्राें से निकल रहे हैं।

70 नए माॅनिटर लगे, 400 से ज्यादा बेड पर लगे ऑक्सीजन प्वाइंट्स : काेविड के रूप में संचालित नए अस्पताल में 70 नए माॅनिटर इंस्टाल कर दिए गए हैं। अधीक्षक डाॅ. सीएस सुशील ने बताया कि नए बनाए गए गायनी वार्ड, पुराने गायनी वार्ड, ट्राेमा वार्ड, पीडियाट्रिक्स वार्ड और पाेस्ट कार्डियक वार्ड में उक्त माॅनिटर इंस्टाॅल कराए गए हैं। इस तरह अब हमारे पास माॅनिटर युक्त बेड की संख्या 151 हाे गई है, पहले सिर्फ 81 बेड थे।

यानी अब ये सभी 151 बेड आईसीयू सुविधा युक्त हाे गए हैं। वहीं, 400 से ज्यादा बेड्स पर ऑक्सीजन प्वाइंट्स लगा दिए गए हैं। अब बहुत ज्यादा मरीज होने पर ही सिलेंडर से ऑक्सीजन देने की जरूरत पड़ेगी। हमारे स्तर पर तैयारी पूरी है, बाकी इस महामारी में कब-क्या हो, यह कोई नहीं कह सकता।

केस कम ताे सैंपल ज्यादा थे, रोगी बढ़े तो संख्या घटा दी

काेटा में काेविड की सैंपलिंग दिनाेंदिन बढ़ने की बजाय घट रही है। पहले जब केस कम थे ताे सैंपलिंग का आंकड़ा राेजाना दाे हजार तक पहुंच गया था, लेकिन अब राेजाना 1500-1600 सैंपल हाे रहे हैं। दुनियाभर के विशेषज्ञ बार-बार इस बात पर जाेर दे रहे हैं कि काेविड से जंग जीतनी है ताे सैंपलिंग बढ़ानी हाेगी। भास्कर ने बीते कुछ दिनों के आंकड़े खंगाले तो सामने आया कि अब उन्हीं लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं,

जो खुद आ रहे हैं। फील्ड में डोर टु डोर टीमें भेजने की व्यवस्था दो माह पहले ही खत्म की जा चुकी है। पॉजिटिव मरीजों के परिजनों या क्लाेज कॉन्टैक्ट में आए लोगों के भी सैंपल नहीं लिए जा रहे। उन्हें आइसोलेट करके इतिश्री की जा रही है। कोटा में रोज 3500 टेस्ट हो सकते हैं।

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