हमारी पावर:राजस्थान की 70 प्रतिशत डिमांड पूरी कर रहे हाड़ाैती के पावर प्लांट

कोटाएक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
हाड़ौती के पावर प्लांट पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन कर रहे हैं। - Dainik Bhaskar
हाड़ौती के पावर प्लांट पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन कर रहे हैं।

काेयले की कमी से देश के कई पावर प्लांट बंद हाे चुके हैं। ऐसे में बिजली उत्पादन पूरी तरह से गड़बड़ा गया है। राजस्थान में बिजली संकट बना हुए है। लेकिन, हाड़ौती के पावर प्लांट पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन कर रहे हैं। राज्य के विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के थर्मल प्लांट्स से करीब 4100 मेगावाट विद्युत उत्पादन हो रहा है। इसका 65 फीसदी उत्पादन हाड़ौती के तीन प्लांट कोटा, कालीसिंध और छबड़ा थर्मल पावर प्लांट से हो रहा है।

इन तीनों की कुल उत्पादन क्षमता 4760 मेगावाट है। अभी तीनों प्लांट्स से 2735 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है और प्रदेश की 70 प्रतिशत बिजली की डिमांड पूरी कर रहे हैं। कोटा थर्मल प्लांट साताें यूनिटों के साथ पूरी क्षमता से चल रहा हैं, जबकि झालावाड़ा कालीसिंध प्लांट अपनी दाेनाें यूनिटों को 75 फीसदी क्षमता से संचालित किया जा रहा है। छबड़ा के दोनों प्लांटों की क्षमता महज 26 फीसदी ही है। हालांकि बीते सप्ताह से कोयले की आपूर्ति तीनों प्लांट्स में सुधरी है और लगातार 10-12 रैक यहां पर आ रही हैं। इस प्लांट काे रोज 20 रैक की आवश्यकता है।

  • हाड़ाैती के प्लांटों से करीब 7185 मेगावाट बिजली का हाे रहा उत्पादन, कोटा थर्मल की चल रही हैं सभी सात यूनिट

काली सिंध प्लांट में रोज आ रहा 4 रैक काेयला

झालावाड़ के कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट की स्थिति सबसे ज्यादा विकट है। यहां पर 900 मेगावाट के आसपास उत्पादन हो रहा है। इस प्लांट की 600-600 मेगावाट की दो यूनिट चल रही हंै। इनकी क्षमता 1200 मेगावाट है, जिन्हें 70 से 75 फीसदी क्षमता से चलाया जा रहा है। चीफ इंजीनियर केएल मीणा ने बताया कि बीते दिनों एक यूनिट कोयले की कमी से बंद हो गई थी, जिसे 10 अक्टूबर को संचालित किया गया। साथ ही रोज 4 रैक कोयले की आ रही है, जिनमें 16 हजार मैट्रिक टन कोयला आ रहा है। ​​​​​​

छबड़ा में सबसे कम, कोटा में सर्वाधिक बिजली उत्पादन

छबड़ा थर्मल पावर स्टेशन के सबसे ज्यादा हालत खराब है। यहां के दोनों थर्मल प्लांट्स की परिचालन एवं अनुरक्षा और सुपर क्रिटिकल की बात की जाए तो क्षमता का केवल 26 फीसदी उत्पादन हो पा रहा है। बाकी कोयले की कमी के चलते यूनिट बंद हैं। चीफ इंजीनियर सुदर्शन सचदेवा ने बताया कि छबड़ा थर्मल के दोनों प्लांट्स के पास 20 हजार मैट्रिक टन कोयला मौजूद है। यहां पहला प्लांट परिचालन एवं अनुरक्षा में 250 मेगावाट की चार यूनिट है।

जबकि केवल एक यूनिट से ही उत्पादन लिया जा रहा है, जो करीब 225 मेगावाट के आसपास है। वहीं दूसरी सुपरक्रिटिकल यूनिट में 660-660 मेगावाट की दो यूनिट हैं। इनमें से केवल एक को ही 55 फीसदी क्षमता से संचालित किया जा रहा है। ऐसे में उससे केवल 370 मेगावाट के आसपास के उत्पादन लिया जा रहा है। यहां पर बिजली उत्पादन के लिए कोयले की तीन रैक औसतन पहुंच रही है।

ओल्ड इज गाेल्ड साबित हाे रहा काेटा थर्मल :

काेयले की किल्लत में काेटा थर्मल ओल्ड इज गाेल्ड साबित हाे रहा है। 1240 पहुंचा उत्पादन कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन अब पूरी क्षमता से उत्पादन कर रहा है। यहां पर रोज करीब पांच रैक आ रही हैं। चीफ इंजीनियर वीके गोलानी ने बताया कि सभी सातों यूनिट से उत्पादन लिया जा रहा है। हालांकि एक नंबर, दो नंबर यूनिट को 90 फीसदी क्षमता से चलाया जा रहा है, लेकिन अन्य यूनिट पूरी क्षमता से चल रही है।

खबरें और भी हैं...