लोकनृत्य पर बन रही डॉक्यूमेंट्री:अमेरिका तक पहुंचेगा हाड़ाैती का चकरी नृत्य, 500 महिलाएं इस लाेकनृत्य कला में हैं पारंगत

कोटा9 महीने पहले
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छबड़ा क्षेत्र के शंकरकॉलोनी चाचौड़ा की घूमंतु परिवार की इन महिलाओं ने देश- विदेश में चकरी नृत्य को खास पहचान दिलाई। - Dainik Bhaskar
छबड़ा क्षेत्र के शंकरकॉलोनी चाचौड़ा की घूमंतु परिवार की इन महिलाओं ने देश- विदेश में चकरी नृत्य को खास पहचान दिलाई।
  • अमेरिका की एक संस्था द्वारा भाषा संस्था के माध्यम से बनाई जा रही डॉक्यूमेंट्री
  • हाड़ाैती में घूमंतू परिवार की 500 महिलाएं इस लाेकनृत्य कला में हैं पारंगत

हाड़ाैती की कला के भले ही प्रदेश में कद्रदान नहीं हाे। लेकिन, छबड़ा क्षेत्र की चाचाैड़ा शंकरकाॅलाेनी की घूमंतू परिवार की महिलाओं द्वारा किया जाने वाला परंपरागत चकरी लाेकनृत्य अब अमेरिका में राजस्थानी लाेक संस्कृति की विशेष पहचान बनाएगा।

इंटनेशनल प्राेजेक्ट में चकरी नृत्य पर एक प्राेजेक्ट तैयार किया जा रहा है। इसमें इस कला-संस्कृति काे बचाया जा सकेगा। यहां शंकर काॅलाेनी में 15 साल से अधिक आयु की 500 महिलाएं चकरी नृत्य में पारंगत है, जाे 4 दशक से देश-दुनिया में अपनी इस परंपरा और राजस्थानी लाेक संस्कृति की अनूठी छाप छाेड़ चुकी है।

ये निरक्षर महिलाएं लंदन, मास्काे समेत कई देशाें में प्रस्तुतियां दे चुकी। यहां करीब 30 ग्रुप है। लेकिन, काेराेना काल में इस कला काे संबल नहीं मिल पाया। ऐसे दाैर में भी इन महिलाओं ने हुनर काे बरकरार रखा। अब इनके हुनर की पहचान अमेरिका तक हाेगी। अमेरिका की एक संस्था की ओर से इंडिया में भाषा संस्था के माध्यम से इनकी कला, संस्कृति काे बचाने के लिए 3 राज्याें का एक प्राेजक्ट तैार किया जा रहा है।

इसमें राजस्थान, गुजरात और एमपी शामिल है। इनमें प्रदेश में 8 जातियाें की कला-संस्कृति काे लेकर 1 डाॅक्यूमेंट्री बनेगी। ताकि इनकी हुनर काे दुनिया में पहचान मिल सके। प्राेजेक्ट के काेटा से डाॅ. मदन मीणा का कहना है कि छबड़ा के चाचाैड़ा शंकरकाॅलाेनी में बसे कंजर, सांसी, नट, कालबेलिया, गाड़िया लुहार, बेड़िया, बाछड़ा और पारदी जाति काे लेकर यह रिसर्च प्राेजेक्ट है।

प्रदेश में पारदी और बाछड़ा जाति नहीं हैं। राजस्थान ये ही वाे जातियां है। जिन्हाेंने अभी तक इस तरह की कला, संस्कृति काे बचाया हुआ है। जाे अभी तक समाज की मुख्यधारा में आने के लिए आजादी के बाद से ही छटपटा रही है। यह प्राेजेक्ट इन महिलाओं की कला-संस्कृति काे एक पहचान दिलाएगा।

सरकारी नाैकरियाें में गंभीर स्थिति: बरकरार रखी कला संस्कृति

डाॅ. मीणा ने बताया कि इनकी सर्वे रिपाेर्ट में यह स्थिति सामने आई है कि इन जातियाें में 0.1 प्रतिशत लाेग सरकारी नाैकरियाें में हैं। साक्षरता दर 25 प्रतिशत है। अधिकतर बच्चे पांचवीं पास हाेने के बाद ड्रापआउट हाे जाते हैं। साथ ही अपने साथ जातिगत भेदभाव से लेकर पुलिस उत्पीड़न, माइग्रेशन, आवास की असुविधा सहित अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कहीं नृत्य से लेकर ढ़ाेल बजाकर अथवा नृत्य से जीवन यापन करते हैं।

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