लोकतंत्र को मजबूत करने की पहल:संसद की तर्ज पर चलेगा देश की 2.51 लाख ग्राम पंचायतों और 3258 शहरी निकायों का सदन

कोटा2 महीने पहलेलेखक: सर्वेश शर्मा
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लोकसभा तैयार कर रहा एसओपी... अक्टूबर में शिमला में अफसरों की बैठक। - Dainik Bhaskar
लोकसभा तैयार कर रहा एसओपी... अक्टूबर में शिमला में अफसरों की बैठक।

अब देश की 2.51 लाख पंचायतें, 3258 शहरी निकायों के सदन भी संसद और विधानसभा की तर्ज पर चलेंगे। लोकसभा में इसके लिए एडवाइजरी का ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है। अक्टूबर के पहले सप्ताह में शिमला में पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में इसकी पूरी रूपरेखा तैयार की जाएगी। एडवाइजरी में पंचायतों व निकायों का सदन कितने दिन चले? किन मुद्दों पर चर्चा हो? प्रश्नकाल कैसे हो? कब हो? जैसे बिंदु शामिल किए जा सकते हैं। साथ ही ग्राम सभा की बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहें, जिससे समस्या का वहीं समाधान हो।

फायदा- तत्काल समाधान और नियमित बैठकें होंगी, ग्राम पंचायत की शक्तियां बढ़ेंगी

1. किसी ग्राम पंचायत की बैठक में गांव के पटवारी, ग्राम सेवक, स्कूलों के संस्था प्रधान, स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सक, बिजली-पानी व्यवस्था से जुड़े कार्मिक, पुलिस प्रतिनिधि समेत सभी विभागों के बोटम लेवल कार्मिक मौजूद रहें, जिनके अधीन वह ग्राम पंचायत आती है।

2 . पंचायत का सदन विभागों को गांव की समस्याएं बताएंगे। सदन में चर्चा होगी कि कैसे दूर करेंगे।
3. यदि कर्मचारी कार्रवाई नहीं करते हैं तो आगामी बैठक में सदन संबंधित विभागों के उच्च अधिकारियों को बताएगा।

4 .इस पहल से कार्यपालिका की जवाबदेही बढ़ेगी। जनप्रतिनिधियों को भी जिम्मेदारी का अहसास होगा, बैठकें नियमित होंगी।

राज्यों को सलाह देंगे कि लाेकतंत्र की छोटी इकाई को भी संसद की तरह चलाएं

- ओम बिरला, लोकसभाध्यक्ष

कार्यपालिका को ज्यादा जवाबदेह और पारदर्शी बनाने का यह सशक्त नवाचार होगा। हमारा उद्देश्य ग्राम पंचायत से लेकर निकायों की फंक्शनिंग को व्यावहारिक बनाना है। राज्यों के पीठासीन अधिकारियों की कमेटी बना दी है, जो एसओपी बनाएगी। इसे लेकर हम प्रशिक्षण की भी व्यवस्था कर सकते हैं।

वैसे तो देश में पंचायत से लेकर संसद तक की अपनी स्वायत्तता है, ऐसे में उन्हें कोई निर्देश नहीं दिए जा सकते, लेकिन हम राज्यों को सलाह देंगे कि वे निचले स्तर तक सदन कैसे चलाएं। अभी कई माह में बैठकें होती हैं, उसमें भी व्यापक चर्चा नहीं हो पाती। -ओम बिरला, लोकसभाध्यक्ष