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ठेले पर 'सिस्टम':महिला की माैत, कंधे देने वाले नहीं मिले तो ठेले पर शव को श्मशान ले गए परिजन

कोटा10 दिन पहले
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  • ...इधर कोरोना के खाैफ से संवेदनाएं भी तार-तार, अंतिम संस्कार के लिए भी आगे नहीं आ रहे लोग

इस काेराेना काल में ऐसे भी दृश्य देखने काे मिल रहे हैं जब आसपड़ाेस और भरा-पूरा परिवार हाेने के बाद भी लाेग सामान्य माैत की स्थिति में भी किसी के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हाे रहे हैं। काेराेना के खाैफ के चलते अंतिम संस्कार में अर्थी काे कांधा देने के लिए चार लाेग भी इकट्ठे नहीं हाे रहे हैं।

जाे लाेग आना चाहते हैं वाे 11 बजे के बाद लाॅकडाउन की वजह से नहीं आ पा रहे हैं। ऐसी ही स्थिति मंगलवार काे दुर्गा बस्ती में एक महिला की मृत्यु पर हुई। काेई व्यक्ति व शव वाहन नहीं मिलने पर पति व एक-दाे पड़ाेसी अर्थी काे हाथ ठेले पर रखकर किशाेरपुरा मुक्तिधाम पहुंचे। वहां दूसरे की मदद से अंतिम संस्कार करवाया राज्य सरकार ने भी काेराेना प्राेटाेकाॅल के तहत अंतिम संस्कार में 20 जनाें काे जाने की परमिशन दे रखी है, लेकिन काेराेना के खाैफ के चलते अंतिम संस्कार में इतने लाेग भी जमा नहीं हाे रहे हैं। पुलिस कंट्राेल रूम के साथ स्थित दुर्गा बस्ती में रहने वाली एक 65 वर्षीय महिला की मंगलवार काे सामान्य बीमारी की वजह से में घर पर ही मृत्यु हाे गई।

अंतिम संस्कार की तैयारी कर ली। कुछ रिश्तेदार शहर से बाहर थे, लॉकडाउन के कारण वाे नहीं आ सके। माेहल्ले के लाेग काेराेना के खाैफ और 11 बजे के बाद के लाॅकडाउन के कारण साथ न जा सके। केवल 1-2 पड़ाेसी ही आए। महिला के पति ने शव वाहन के लिए दाे-तीन संस्थाओं काे फाेन किए ताे पता चला कि शहर में मृत्यु इतनी हुई है कि सभी वाहन शाम तक बुक हैं।

तीन जने अर्थी काे मुक्तिधाम तक नहीं ले जा सकते थे। अंत में जब कुछ व्यवस्था नहीं हुई ताे पति ने हाथ ठेला लिया और उसमें अर्थी रखकर किशाेरपुरा मुक्तिधाम पहुंचा। वहां व्यवस्थाएं संभालने वाले माेईद अनवर ने परिजनों के साथ में लगकर चिता से लेकर अंतिम संस्कार तक की व्यवस्था की।

लॉकडाउन की वजह से नहीं आ पाए रिश्तेदार, पड़ोसियों ने भी हाथ खींचे

अस्थियां रखने के लॉकर्स फुल हुए, अब पेड़ों पर बांधने पड़ रहे हैं अस्थि कलश

काेराेना काल में शहर में लगातार माैतें हाे रही हैं। लाेगाें काे पहले इलाज और फिर मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अंतिम संस्कार हाेने के बाद अस्थि विर्सजन नहीं हाे पा रहा है। लाॅकडाउन के कारण लाेग हरिद्वार नहीं जा पा रहे हैं। तब तक के लिए अस्थियां रखने की भी जगह अब नहीं बची।

मुक्तिधामाें में लाॅकर्स फुल हाेने के बाद अब लाेग वहां लगे पेड़ाें पर अस्थियां बांध रहे हैं। केशवपुरा मुक्तिधाम में ताे हर पेड़ पर एक-दाे अस्थि कलश बंधे हुए हैं। वहां लगे वाटरकूलर के आसपास लगी जालियाें में पीपे रख रखे जा रहे हैं।

वर्तमान में काेटा के सभी मुक्तिधामाें में करीब 1200 अस्थि कलश रखे हैं। तीसरे की क्रिया के बाद ही लाेग अस्थियाें काे लेकर हरिद्वार या उज्जैन में तर्पण करने चले जाते हैं, लेकिन काेराेना काल में आने-जाने की व्यवस्था बंद है और परिवाराें में एक साथ कई लाेगाें के बीमार हाेने के कारण भी लाेग नहीं जा पा रहे हैं।

ऐसे में अस्थियाें के लाॅकर्स फुल हाे चुके हैं। उसके बाद पीपाें में रखकर रखा जा रहा है, लेकिन उसे रखने के लिए भी सुरक्षित स्थान नहीं मिलने पर पेड़ाें पर बांधा जा रहा हैे।

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