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समस्या:5 साल से अटके फायर ब्रिगेड और टिपर खरीदने जैसे महत्वपूर्ण काम ही पूरे हुए, छिटपुट कामाें के लिए परेशान हाेते रहे लाेग

कोटा8 दिन पहले
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  • प्रशासक के कार्यकाल के 10 माह पूरे हुए, भास्कर ने कार्याें का किया रिव्यू

पिछले वर्ष नवंबर में नगर निगम बाेर्ड का कार्यकाल खत्म हाेने के बाद से ही प्रशासक नियुक्त कर बाेर्ड की सभी शक्तियां उन्हें साैंप दी गई थी। काेटा नगर निगम में वर्तमान पदस्थ आयुक्त वासुदेव मालावत काे ही प्रशासक का दायित्व साैंपा गया और बाद में जब दाे नगर निगम हुए ताे दक्षिण के प्रशासक का दायित्व आयुक्त कीर्ति राठाैड़ काे साैंप दिया गया।

अब चुनाव परिणाम आने तक प्रशासक के पास ही निगमाें की जिम्मेदारी रहेगी। इससे पहले वर्ष 1992 में नगर निगम में प्रशासक काल रहा था और उसके बाद से लगातार पार्षदाें के चुनाव हाेते रहे और नगर निगम काे जनप्रतिनिधि और अधिकारी मिलकर चलाते रहे।

इस 10 माह के प्रशासक काल का जब दैनिक भास्कर ने रिव्यू किया ताे सामने आया कि इस दाैरान वाे सभी काम ताे हाे गए, जाे जनप्रतिनिधियाें में एकराय नहीं बन पाने के कारण अटके हुए थे। साथ ही व्यवस्थाओं में सुधार के लिए भी कई कदम उठाए गए, लेकिन उन कार्याें में लिए जनता परेशान हाेती रही जाे पार्षदाें के माध्यम से आसानी से हाे जाते थे। जनता काे नगर निगम में चक्कर नहीं काटने पड़ते थे। लाेग सीधे पार्षद काे बताकर जिम्मेदारी उसे साैंप देते थें।

प्रशासक काल में ये अटके हुए कार्य पूरे हुए

  • सफाई के लिए संसाधन खरीदना : सफाई के लिए संसाधनाें की खरीद का मामला तीन वर्षाें से चल रहा था, लेकिन क्या खरीदना है इसके लिए एकराय नहीं बन पा रही थी, जबकि स्मार्ट सिटी से फंड मिल रहा था। अब टिपर, सुपर सकर मशीन, जेसीबी, डंपर आदि खरीद का काम शुरू हाे गया।
  • अग्निशमन के लिए संसाधन की खरीद : इसी तरह छाेटी दमकलाें की कमी पिछले लंबे वर्षाें से थी, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ रही थी। अब करीब 12 कराेड़ रुपए की लागत से छाेटी व बड़ी दमकलें खरीदी जा रही हैं।
  • सफाई व्यवस्था : सफाई व्यवस्था काे मजबूत बनाने के लिए नगर निगम ने ट्रांसफर स्टेशन बनाने, डाेर-टु-डाेर कचरा कलेक्शन के लिए नए टिपर खरीदने, राेड स्वीपर मशीन आदि खरीदने की कार्रवाई शुरू की। वार्डाें का निरीक्षण कर कार्य में लापरवाही बरतने वालाें पर कार्रवाई की।

इन कार्याें के लिए जनता काे पार्षद याद आए

  • सफाई व्यवस्था : सबसे बड़ी समस्या नए काेटा क्षेत्र के लाेगाें काे सीवरेज के लिए आई। पहले सीवरेज टैंक की सफाई के लिए सीधे पार्षद काे बाेल देते थे, अब निगम में जाते हैं ताे वहां से गैराज भेज दिया जाता है। वहां 3-4 दिन तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसी तरह घर के आसपास सफाई नहीं हाेने पर सीधे पार्षद काे बाेल देते थे, लेकिन अब कंट्राेल रूप पर शिकायत दर्ज करवानी पड़ती है।
  • राेड लाइटें व पार्क : राेड लाइटें व पार्काें की लाइट तथा पार्काें की व्यवस्था के लिए भी पहले सीधे पार्षद काे ही बाेलते थे। पार्षद ही इन्हें बदलवाने से लेकर ठीक करवाने तक के लिए जुटे रहते थे, लेकिन अब बंद लाइटाें के लिए काेई सुनता ही नहीं है। काेराेना काल में अधिकांश पार्काें की दशा बिगड़ गई। काेई पानी देने वाला तक नहीं था।
  • फाॅर्म सर्टिफाई : पार्षद एक तरह से उस वार्ड का गजेटेड ऑफिसर हाेता है। भामाशाह कार्ड, राशन कार्ड, घर पर हाेने वाली जन्म-मृत्यु के प्रमाण पत्र, स्कूल में आरटीई के फाॅर्म, सामाजिक सुरक्षा याेजना की सभी पेंशन अादि के फाॅर्म काे सर्टिफाई करने की जिम्मेदारी उनकी ही हाेती है। पार्षद के अभाव में ये कार्य वार्ड के प्रभारी, जेईएन आदि से करवाना पड़ता है। लाेगाें काे अभी तक पता नहीं है कि उनके वार्ड का प्रभारी काैन है।

प्रशासक काल लगने के बाद से अब तक जनता से जुड़ी जाे भी समस्याएं और चुनाैतियां हमारे सामने आई, उन सभी का हमने अच्छे से समाधान किया। केवल तात्कालीन समाधान नहीं बल्कि उसके लिए व्यवस्थाओं काे भी सुधारा। कई टेंडर रुके पड़े हुए थे। स्मार्ट सिटी व अन्य मदाें से फंड आया हुआ था, लेकिन उसका उपयाेग नहीं हाे रहा था, हमने एक-एक करके सभी टेंडर लगाए। सरकार और मंत्री ने जाे भी निर्माण कार्याें की याेजना बनाई उन्हें पूरा किया। जनता काे असुविधा न हाे इसके लिए कंट्राेल रूम बनाया, वार्डाें में प्रभारी व सहप्रभारी बनाए। दाे निगम हाेने पर अन्य निगमाें की तुलना में बंटवारे में काेटा आगे रहा। काेराेना के रूप में चुनाैती मिली उसमें भी खरे उतरे। सेनेटाइजेशन से लेकर बैरिकेडिंग व एंबुलेंस के लिए डीजल की व्यवस्था हमारे पास थी, जिसे हमने पूरा किया।
- वासुदेव मालावत, प्रशासक नगर निगम उत्तर

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