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  • In Kota Range, 33 Murders At The Hands Of Relatives And Relatives In 6 Months, Property Dispute, Illicit Relationship And Drug Addiction Became The Main Reason

भास्कर पड़ताल:कोटा रेंज में 6 माह में रिश्तेदारों-परिजनों के हाथाें 33 हत्याएं, प्राॅपर्टी विवाद, अवैध संबंध और नशे की लत बनी प्रमुख वजह

कोटा21 दिन पहलेलेखक: समकीत जैन
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पिछले साल के मुकाबले इस साल हत्या की वारदातें भी 18% बढ़ीं - Dainik Bhaskar
पिछले साल के मुकाबले इस साल हत्या की वारदातें भी 18% बढ़ीं
  • बूंदी-बारां में 8-8 लोगों की मौत की वजह बने परिजन, कोटा शहर में ऐसी 5 व ग्रामीण में 7 वारदातें

वर्ष 2021 के शुरुआती 6 महीने में काेटा रेंज में रिश्तेदाराें और परिजनाें के हाथाें 33 लाेग मारे गए। पति ने पत्नी की, भाई ने भाई की, दादी ने पोती की, बेटे ने मां की और दामाद ने दादा ससुर की हत्या कर दी। भास्कर ने इन वारदाताें के पीछे के कारणाें की पड़ताल की ताे पता चला कि क्षणिक आवेग, मानसिक तनाव, प्रॉपर्टी विवाद, अवैध संबंध और नशे की लत जैसे कारणाें से ये वारदातें हुईं।

किसी बेटे ने माता-पिता को खो दिया तो किसी बूढ़े माता-पिता ने अपने बेटों को। इन हत्याओं से कई परिवार पूरी तरह बिखर गए हैं। आपसी संबंध तो टूटे ही, कई परिवाराें के सामने आजीविका का भी संकट हाे गया है।

पुलिस के आंकड़ों के अनुसार इस साल कोटा रेंज में हत्याओं का ग्राफ बढ़ा है। पिछले साल कुल 63 हत्याएं हुई थीं। वहीं इस साल जून तक ही हत्या की 74 वारदातें हो चुकी हैं। यानी पिछले साल के मुकाबले हत्या की 18 प्रतिशत ज्यादा वारदातें हुईं। संभाग में कोटा ग्रामीण में हत्या की वारदातों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है।

पिछले साल कोटा ग्रामीण में 7 जबकि इस साल के पहले 6 महीनों में 13 हत्याएं हुईं। कोटा शहर में पिछले साल हत्या की 11 वारदातें हुईं, इस साल जनवरी से जून तक 11 वारदातें हुईं। बूंदी में पिछले साल 10, इस साल 12 हत्याएं हुईं। बारां में पिछले साल 18, इस साल 21 हत्याएं हुईं। झालावाड़ में पिछले साल 17 और इस साल जून तक 17 हत्या की वारदातें हुईं।

वहीं 74 में से 33 यानी 44 प्रतिशत लोगों की हत्या उनके परिजनों या रिश्तेदारों ने ही की। बारां और बूंदी में सबसे ज्यादा 8-8 लोगों की हत्या उनके ही परिजनों ने की। वहीं कोटा शहर में 5, ग्रामीण में 7 और झालावाड़ में 5 लोगों की हत्या उनके ही परिजनों या रिश्तेदारों के हाथों हुई।

ऐसे-ऐसे मामले आए सामने : विरोधियों को फंसाने के लिए दादी ने पोती को मार डाला, संपत्ति के लिए बड़े भाई की हत्या

1. दादी ने पोती को मार डाला
बारां के बोरीना गांव में रास्ते के विवाद में दूसरे पक्ष को फंसाने को दादी कनकबाई ने पोती जिया (3) को जमीन पर पटककर मार डाला।

2. भाई को ट्रैक्टर से कुचला
बारां के कोतवाली थानाक्षेत्र में संपत्ति के विवाद में दिनेश नागर ने ट्रैक्टर से कुचलकर बड़े भाई राजेंद्र की हत्या कर दी।

3. बेटे ने पिता की हत्या की
बूंदी के हिंडोली में संपत्ति के पुराने विवाद में ताराचंद ने पिता नंदकिशोर के सिर पर लाठी से वार करके हत्या कर दी।

4. पति ने पत्नी-बेटे को मारा
झालावाड़ के पिड़ावा में गोकुल सिंह ने पत्नी रामकुंवर और बेटे ईश्वर सिंह को मार डाला और शव कुंए में डालकर घूमता रहा।

5. दामाद ने की ससुर की हत्या
लाखेरी के बड़ाखेड़ा गांव में कहासुनी के बाद दामाद पवन ने दादा ससुर छोटूलाल को पत्थर और ईंटों से हमला करके हत्या कर दी।

3 कहानियों से जानिए

कैसे अपनाें का दिया दर्द भुगत रहे हैं परिवार

सनकी पिता ने पत्नी और छोटे बेटे को मार डाला, 9 साल का बड़ा बेटा अनाथ, अब मामा-मामी के यहां रह रहा मासूम

मामा के साथ 9 वर्षीय बालक।
मामा के साथ 9 वर्षीय बालक।

रामपुरा इलाके के भाटापाड़ा में जून 2021 में पति पिंटू उर्फ सुनील ने नशे की जद में कुल्हाड़ी से अपनी पत्नी सीमा और 8 माह के बेटे राजवीर उर्फ अविनाश की नृशंस हत्या कर दी। सुनील अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करता था। उसने खाना खिलाने को लेकर हुई कहासुनी पर सीमा की हत्या कर दी। उसके खिलाफ पहले से दुष्कर्म समेत गंभीर प्रकृति के 5 केस दर्ज हैं।

हत्या के बाद सुनील जेल चला गया, लेकिन उसका दूसरा 9 वर्षीय बेटा एक तरह से अनाथ हो गया। वो अभी तक मां और भाई की मौत के सदमे से उबर नहीं सका है। परिवार में दादा-दादी हैं, लेकिन वो उसे रखने को तैयार नहीं हैं। इस दुखद घटना के बाद से वो स्टेशन पर अपने ननिहाल में ही रह रहा है। मामा का कहना है कि हम प्रयास करते हैं कि इसे किसी भी तरह मां की कमी न खले।

भाभी से अवैध संबंध के कारण बड़े भाई को मार डाला, अब बूढ़े दादा-दादी पोतियों को पाल रहे
हत्या का कारण संजय का बलराम की पत्नी और उसकी भाभी से अवैध संबंध सामने आया। इस घटना ने पूरे परिवार को हमेशा के लिए तोड़कर रख दिया है। एक बेटे की मौत हो गई और दूसरा जेल गया। 62 वर्षीय बूढ़े पिता कालूराम और मां रामभरोसी दोनों बेटों के जाने के बाद बेसहारा हो गए हैं। बकौल, रामभरोसी बलराम की पत्नी ने तो ससुराल छोड़ दिया और उसकी दो बेटियों को हम पाल रहे हैं। घर में खाने को दाना नहीं हैं। कभी चटनी से तो कभी प्याज और मिर्ची से रोटी खाकर जैसे-तैसे इन बच्चियों को पाल रहे हैं।

  • झालावाड़ के पनवाड़ स्थित गांव सरखंडिया निवासी संजय ने मार्च 2021 में बड़े भाई बलराम की चाकुओं से गला रेतकर हत्या कर दी।
  • कालूराम का पैर टूट गया, जिससे जो थोड़ा बहुत राशन आता था, वो भी नहीं आ पा रहा हैं। अब तो बची हुई जिंदगीराम का नाम लेकर जैसे-तैसे काट रहे हैं।
  • पिता शराब पीकर मारपीट करता था, नाबालिग बेटे ने कुल्हाड़ी से काट डाला, कमाने वाला कोई नहीं बचा, रिश्तेदारों ने भी संबंध तोड़े

कोटा ग्रामीण के इटावा थाना क्षेत्र में एक नाबालिग बेटे ने अप्रैल 2021 में अपने ही पिता पर कुल्हाड़ी से दर्जनभर से ज्यादा वारकर बेरहमी से कत्ल कर दिया। पिता की हत्या उस वक्त की जब वह सो रहे थे। पुलिस ने बेटे को नियमानुसार निरूद्ध करवा दिया। पिता शराब के नशे में उसकी मां से मारपीट करता था।

इस घटना के बाद पूरा परिवार बिखर गया। पिता की मौत हो गई तो कमाने वाला कोई नहीं बचा। मां, छोटी बहन और भाई का पूरा संसार अस्त-व्यस्त हो गया है। पति की मौत हो गई और बेटे दूर हो गया... ऐसे में मां पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

उनके एक करीबी रिश्तेदार का कहना है कि अब उस लड़के और उसके परिवार से उनका कोई संबंध नहीं बचा, जिसने अपने पिता की ही हत्या कर दी। रिश्तेदार उसने इतने खफा हो गए हैं कि अब एक तरह से उनसे बरसों के संबंध ही खत्म कर लिए हैं।

भास्कर एक्सपर्ट

हत्या जैसा कदम उठाने के लिए नशा, तनाव और अतिमहत्वाकांक्षा जिम्मेदार

डॉ. सीएस सुशील, विभागाध्यक्ष मनोचिकित्सा विभाग और अधीक्षक नया अस्पताल
समाज में हो रही आपराधिक घटनाओं से व्यक्ति प्रभावित हो रहा है। रिश्तेदारों पति, पिता, भाई द्वारा हत्या जैसी वारदात करने के पीछे नशा, तनाव और अतिमहत्वाकांक्षा यह तीन सबसे बड़े कारण होते हैं। नशे से तनाव बढ़ता है और जब दोनों मिल जाते हैं तो व्यक्ति अपने सेंट्रल नर्व सिस्टम पर कंट्रोल नहीं रख पाता हैं। जिससे सोचने-समझने की शक्ति क्षीण हो जाती है। कोरोनाकाल में आर्थिक तंगी से तनावग्रस्त जीवन, निराशा रखना भी ऐसे अपराध को जन्म दे रहा है। नशे से दूर रहे, एकल परिवार की जगह संयुक्त परिवार को तहजीर दे ताकी माहौल सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण रहे।