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डरा रहा डेंगू का डंक:कोटा में 7 दिन में 100 का आंकड़ा पार, 29 दिन में 250 से ज्यादा केस मिले, स्क्रब टाइफस के भी 55 मरीज सामने आए

कोटा2 महीने पहले
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चिकित्सा विभाग की टीम घर घर सर्वे कर एंटी लार्वा एक्टिविटी कर रही है। - Dainik Bhaskar
चिकित्सा विभाग की टीम घर घर सर्वे कर एंटी लार्वा एक्टिविटी कर रही है।

जिले में मच्छर जनित बीमारियां साइलेंट मोड़ पर पैर पसार रही है। डेंगू का डंक लोगों को डरा रहा है। वहीं स्क्रब टाइफस का भी बढ़ता जा रहा है। चिकित्सा विभाग की टीम घर घर सर्वे कर एंटी लार्वा एक्टिविटी कर रही है। उसके बाद भी मच्छर जनित बीमारी के केस लगातार बढ़ते जा रहे है। स्थिति ये ही सितंबर के 29 दिन में ही डेंगू पॉजिटिव का आंकड़ा 250 के पार हो गया है। जो पिछले तीन साल के सितंबर माह में सबसे ज्यादा है। चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2018 के सितंबर माह में 165, साल 2019 में 137 मामले सामने आए थे। साल 2020 में कोरोना के कारण डेंगू के केस रिपोर्ट नही हुए।

3 साल के डेंगू के आंकड़े

सालमाहपॉजिटिव
2021सितंबर250+
2019सितंबर137
2018सितंबर165

7 दिन में 113 डेंगू

शहर से लेकर ग्रामीण इलाके के हर हिस्से से डेंगू के केस सामने आ रहे है। आंकड़ों पर नजर डाले तो 7 दिन में ही 113 डेंगू केस सामने आ चुके है। यानी इन 7 दिनों में 16 मरीज रोज डेंगू की चपेट में आए है। बुधवार को 23 डेंगू के रोगी मिले है।

तारीख29282726252423
पॉजिटिव23141015181023

स्क्रब टाइफस-7 दिन में 26 केस

डेंगू के साथ स्क्रब टाइफस का कहर बढ़ रहा है।पहाड़ी इलाकों में पाई जाने वाला स्क्रब टाइफस अब शहरी इलाकों में पहुच गया है। शहरी इलाको से भी स्क्रब टाइफस पॉजिटिव मरीज सामने आने लगे है। बीते 7 दिन में ही 26 केस सामने आ चुके है। जबकि सीजन में 55 केस सामने आ चुके है।

तारीख29282726252423
पॉजिटिव3233555

चिकित्सा एंव स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक साल 2015 में कोटा जिले में सिर्फ 9 रोगी स्क्रब टाइफस पॉजिटिव मिले थे।जो साल दर साल बढ़ते हुए 2019 में 170 तक जा पहुचे थे।

साल201220192018201720162015
पॉजिटिव5517017224139

कैसे कंट्रोल हो

बारिश के कारण गड्डो में भरा पानी खत्म नही हो रहा है। नगर निगम व यूआईटी के पास उनमें एमएलओ डलवाने के अलावा कोई पुख्ता इंतजाम नही है। डेंगू की चपेट में आने से मरीज की प्लेटलेट्स डाउन से एसडीपी की डिमांड बढ़ने लगी है। हर दिन 5 एसडीपी की जरूरत पड़ रही है।

हालांकि चिकित्सा विभाग की टीमें घर घर जाकर पानी की टंकियां, कूलर, ड्रम, परिण्डे, गमले, फ्रीज की ट्रे और छतों पर रखे पानी जमा होने वाले टायर, कबाड़ आदि की जांच कर रही है। लार्वा मिलने पर उन्हें उपचारित किया जा रहा है। टेमीफास की दवा,एमएलओ डाला जा रहा है। इसके अलावा घरों के कमरों में मच्छर रोधी पायरेथ्रम स्प्रे का छिड़काव भी जा रहा है। घरों में लार्वा मिलने पर मकान मालिक को नोटिस दिए जा रहे है।

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