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नयापुरा थाने में पहले भी लापरवाही ले चुकी जान:सितंबर महीने में ही हवालात में युवक ने लगाया था फंदा, 32 पुलिसकर्मी हुए थे लाइन हाजिर

कोटा12 दिन पहले
परिजन आक्रोशित हो गए और उन्होंने जमकर हंगामा किया

साल 2021 थाना नयापुरा, महीना सितंबर, थाने के हवालात में कमल नामक एक युवक ने फंदा लगा लिया, उसकी मौत हो गई। साल 2022 थाना नयापुरा, महीना सितंबर, थाने के अंदर आकर युवक ने खुद को आग लगा ली। 60 प्रतिशत झुलस गया जिसे जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती कर इलाज करवाया जा रहा है। दोनों घटनाओं में सिर्फ साल और पीड़ित ही अलग है। थाना एक है महीना एक है और कारण भी एक है वह है पुलिस की लापरवाही।

पुलिस कर्मियों की लापरवाही ने एक साल के अंदर नयापुरा थाने में दो बड़ी घटनाओं को अंजाम दिलवाया। जिसमें एक व्यक्ति अपनी जान गवा चुका तो दूसरा जिंदगी के लिए मौत के साथ जंग लड़ रहा है। सबसे पहले साल भर पहले हुई घटना के बारे में रिकॉल करते हैं।

कमल लोधा प्रकरण के बाद थाने के बाहर परिजन और लोग धरने पर बैठ गए थे
कमल लोधा प्रकरण के बाद थाने के बाहर परिजन और लोग धरने पर बैठ गए थे

गिरफ्तार कर लाए, कुछ देर बाद लगाया फंदा

नयापुरा थाना पुलिस ने 22 सितंबर 2021 को कमल लोधा नामक युवक को पारिवारिक झगड़े के चलते गिरफ्तार किया था। उसे हवालात में रखा गया जहां पर उसने अपनी शर्ट से फंदा लगा लिया। जैसे ही थाना पुलिस कर्मियों की इसकी जानकारी लगी है उसे तुरंत अस्पताल ले गए। बाद में जब कमल की मां खाना लेकर थाने पहुंची तब उसे बताया गया कि उसका बेटा तो अस्पताल में है। कमल की मौत हो चुकी थी। परिजन आक्रोशित हो गए और उन्होंने जमकर हंगामा किया। कमल के शरीर पर चोटों के निशान थे ऐसे में परिजनों ने आरोप लगाया कि उसके साथ बेरहमी से थाने के अंदर मारपीट की जिससे उसकी मौत हो गई। इस मामले को लेकर नयापुरा थाने के बाहर पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल के नेतृत्व में परिजन और समर्थक 20 घंटे तक धरने पर बैठे थे। जिसके बाद परिजनों को मुआवजा दिया गया। थाने के सीआई को सस्पेंड किया गया और 32 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया था। उस समय नयापुरा पुलिस पर बड़े सवाल उठे थे और पुलिस की काफी किरकिरी हुई थी। कई दिनों तक मामले ने तूल पकड़ा।

पुलिसकर्मियों पर कार्यवाही की मांग को लेकर 20 घंटे धरना दिया गया था, पूर्व विधायक गुंजल तो थाने के बाहर ही खाट डालकर रात को सो गए थे
पुलिसकर्मियों पर कार्यवाही की मांग को लेकर 20 घंटे धरना दिया गया था, पूर्व विधायक गुंजल तो थाने के बाहर ही खाट डालकर रात को सो गए थे

अब कार्रवाई नहीं हुई तो लगा ली आग

इधर फिर महीना सितंबर, पुलिस की लापरवाही कि शिकायत देने के बाद भी किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं की गई। गावड़ी का रहने वाला राधेश्याम मीणा पार्षद के खिलाफ थाने में शिकायत देकर आया। जांच अधिकारी से बात भी की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई जिससे परेशान होकर थाने के अंदर पहुंचा और खुद को आग लगा ली। पुलिस दावा कर रही थी कि वह 30 से 35 फीसदी झुलसा है। लेकिन परिजनों ने बताया कि जयपुर एसएमएस अस्पताल में वह 60 प्रतिशत झुलसी हालत में भर्ती है। मामले में सीआई समेत तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है। यहां पुलिस की एक बड़ी लापरवाही यह भी रही कि पुलिसकर्मियों को जानकारी लग गई थी कि राधेश्याम थाने में इस तरह का कदम उठा सकता है लेकिन उसे रोकने की कोशिश नहीं की गई।

रिपोर्ट दर्ज करने से बचती है पुलिस

आमतौर पर आपसी झगड़े मारपीट के मामलों में पुलिस सीधा मुकदमा दर्ज करने से बचती है। पुलिस की यही कार्यशैली राधेश्याम के जीवन पर भारी पड़ गई। पुलिस ऐसे मामलों में परिवाद ले लेती है और जांच के नाम पर उन्हें ठंडे बस्ते में डाल देती है। 5 तारीख को राधेश्याम की तरफ से परिवार दिया गया था लेकिन मेडिकल के बाद उसमें कोई कार्यवाही नहीं हुई ना ही मुकदमा दर्ज हुआ। राधेश्याम की आग लगाने की घटना के बाद रातो रात पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया और कार्रवाई करते हुए पार्षद को गिरफ्तार भी कर लिया। राधेश्याम प्रकरण में एडिशनल एसपी राजेश मील के अनुसार मामले की जांच उपाधीक्षक स्तर पर करवाई जा रही है जांच में जो भी तथ्य आएंगे उसके आधार पर आगे कार्यवाही की जाएगी।

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