सिर्फ टाइपिंग एरर मान रहा एमबीएस अस्पताल प्रशासन:एक सीटी स्कैन के ‌‌36000 देते रहे, 8 लाख वसूलेंगे भी, इस गलती का जिम्मेदार कोई नहीं

कोटा14 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

एमबीएस अस्पताल में पीपीपी मोड पर संचालित सीटी स्कैन में हार्ट से जुड़ी एक जांच के लिए एग्रीमेंट में 3600 की बजाय एक शून्य ज्यादा लगकर 36000 रुपए होने के मामले में सिर्फ रिकवरी हाे रही है। पूरी गड़बड़ी के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा रहा।

हर कोई एग्रीमेंट में राशि 36000 रुपए होना बताकर बच रहा है, जबकि राशि इतनी ज्यादा है कि कोई भी प्रथम दृष्ट्या ही आपत्ति कर सकता था। मार्च, 2022 तक के बिलों की पड़ताल में अस्पताल प्रबंधन ने फर्म से करीब 8 लाख रुपए की रिकवरी निकाली है। यानी 36000 रुपए अमाउंट वाली 8 लाख रुपए की जांचें हो चुकी हैं।

इनमें से कुछ का भुगतान हो गया और कुछ का शेष है। अधीक्षक ने लेखा शाखा को निर्देश दिए कि फर्म के प्रस्तावित भुगतान से 8 लाख रुपए की कटौती की जाए। वहीं, अप्रैल 2022 से अब तक की जांचों का ब्यौरा जुटाया जा रहा है। अप्रैल के बाद यह जांच भी सभी के लिए फ्री केटेगिरी में आ गई है। पहले यह जांच चुनिंदा भामाशाह, बीपीएल जैसी श्रेणियों के लिए ही फ्री थी।

जांच से फर्म को भुगतान होने तक कितनी ही नजरों से निकलता है

फर्म से मिला हर बिल अस्पताल अधीक्षक के हस्ताक्षर के बाद लेखा शाखा में अाता है। वहां से भुगतान स्वीकृति के बाद अधीक्षक के ही हस्ताक्षर से आरएमआरएस शाखा के पास जाता है, जहां से फर्म को भुगतान किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में लेखा शाखा या अधीक्षक के स्तर पर सवाल उठना चाहिए था। लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा।

किसी को संदेह क्यों नहीं हुआ!

पूरे मामले में संदेह है। सीटी स्कैन की एक तरह की जांच के 36000 रुपए इतने ज्यादा हैं कि आम अादमी भी ऐसी रेट देखकर चाैंक सकता है। ताे फिर बरसाें से मेडिकल फील्ड में रहने वालाें काे 36000 रुपए प्रति सीटी स्कैन के बिल पर संदेह क्याें नहीं हुअा?

और अधीक्षक का ऐसा जवाब : एग्रीमेंट में ही गलती हो गई, क्या करें

सीटी स्कैन मामले में कितनी रिकवरी निकाली गई? - मार्च 2022 के पहले के बिलों में करीब 8 लाख रुपए की रिकवरी निकाली है। लेखा शाखा को निर्देश दिए कि आगामी बिल से यह राशि काटकर ही भुगतान किया जाए।

मार्च के बाद भी तो जांचें हुई होंगी, उनका क्या? - हुई ताे होंगी। अप्रैल 2022 से सबकुछ फ्री हो गया ताे पहले से ज्यादा जांचें हुई होंगी। उसका ब्यौरा जुटा रहे हैं। अप्रैल के बाद का बिल पेश नहीं हुआ है।

मामले में किसी पर कोई एक्शन ले रहे हैं? - अभी तो ऐसा कुछ नहीं किया। वैसे भी इसमें किसे जिम्मेदार ठहराएं? जब एग्रीमेंट में ही गड़बड़ी हो गई तो

अकाउंट्स या अन्य लोग क्या करते? एग्रीमेंट में एक शून्य ज्यादा लग गया, उसके लिए भी कोई तो जिम्मेदार होगा? - यह टाइपिंग मिस्टेक लगती है। फिर भी मामले को दिखवा रहे हैं, एक बार रिकवरी तो हो।

खबरें और भी हैं...