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पत्नी की दवा के लिए भटकता रहा पति:पीड़ित का आरोप- निजी अस्पताल के मेडिकल स्टोर ने सरकारी पर्चे पर लिखी दवा देने से इनकार किया, अधिकारी बोले- सरकारी पर्चा साफ नहीं था

कोटा6 महीने पहले
पीड़ित ने सारा घटनाक्रम मोबाइल वीडियो में रिकॉर्ड किया और वीडियो व शिकायत सहायक औषधि नियंत्रण अधिकारी (ADC) व प्रशासन को की

कोरोना काल में अस्पतालों में लापरवाही व मनमानी के मामले थम नहीं रहे हैं। अब शहर के निजी अस्पताल में संचालित मेडिकल स्टोर पर मनमानी का आरोप का वीडियो, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। जिसमें पीड़ित ने सरकारी पर्चा दिखाने के बाद भी मेडिकल संचालक द्वारा दवा नहीं देने का आरोप लगाया है। साथ ही अस्पताल में नया पर्चा बनाने के बाद दवा लेने पर मजबूर करने की बात कही। पीड़ित ने सारा घटनाक्रम मोबाइल में रिकॉर्ड किया। यह वीडियो व शिकायत सहायक औषधि नियंत्रण अधिकारी (ADC) व प्रशासन को की। दो दिन में कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पीड़ित ने घटना बनाया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सुल्तानपुर हेमंत झाला ने बताया कि उनकी पत्नी कोरोना पॉज़िटिव थी। 1 माह तक कोविड अस्पताल में भर्ती रही। कुछ दिन पहले की अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद वो जवाहर नगर इलाके में परिचित के यहां क्वारैंटाइन थे। 24 मई को रात में उनकी पत्नी के अचानक तेज खांसी चलने लगी। वो कोविड अस्पताल में डॉक्टर द्वारा लिखे पर्चे को लेकर दवा लेने गए। रात साढ़े दस बज रहे थे। मेडिकल स्टोर बन्द थे। तो वो एसएन पारीक हॉस्पिटल में गए।

अस्पताल के मेडिकल स्टोर पर जाकर उन्होंने मेडिकल कॉलेज का सरकारी पर्चा दिखाकर खांसी की दवा मांगी। तो वहां बैठे कार्मिक ने यह कहकर मना कर दिया कि यह पर्चा हमारे अस्पताल का नही है। हम बाहर के पर्चे की दवा नही देते। आप हमारे अस्पताल का पर्चा बनवाकर लाओ। तभी दवा मिलेगी। इस बात पर दोनों में बहस हुई। फिर अस्पताल में मौजूद ड्यूटी डॉक्टर के पास दवा लिखवाने के लिए गया तो डॉक्टर ने काउंटर से पर्ची बनवाने के लिए कहा। जब में काउंटर पर गया तो उसने पर्ची बनाने के पैसे मांगे। मैं वापस बिना दवा लिए घर लौट गया। मेरी पत्नी रात भर खांसी से परेशान रही। 40 रुपए की खांसी की दवा के लिए रुपए देकर पर्चा बनवाने के लिए मजबूर किया गया।

पीड़ित ने आरोप लगाया कि अस्पताल के मेडिकल स्टोर पर जाकर उन्होंने मेडिकल कॉलेज का सरकारी पर्चा दिखाकर खांसी की दवा मांगी। तो वहां बैठे कार्मिक ने यह कहकर मना कर दिया।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि अस्पताल के मेडिकल स्टोर पर जाकर उन्होंने मेडिकल कॉलेज का सरकारी पर्चा दिखाकर खांसी की दवा मांगी। तो वहां बैठे कार्मिक ने यह कहकर मना कर दिया।

हेमंत झाला ने बताया कि दूसरे दिन 25 मई को मैने सहायक औषधि नियंत्रण अधिकारी कोटा को लिखित में शिकायत दी और घटना का वीडियो भेज दिया। कलेक्टर को सोशल मीडिया पर लिखित शिकायत भेजी। दो दिन तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर मामले की शिकायत ईमेल के जरिये सीएमओ कार्यालय में की है।

सहायक औषधि नियंत्रण अधिकारी (ADC) प्रह्लाद मीणा ने बताया कि सरकारी पर्चा 13 मई का बना हुआ है। जो साफ नही था अपठनीय था। पीड़ित की शिकायत व वीडियो के आधार पर जांच करवाई गई। ड्रग इंस्पेक्टर को मेडिकल स्टोर पर भेजा गया। जांच के दौरान मेडिकल स्टोर कार्मिक ने ड्रग इंपेक्टर को बताया कि पीड़ित ने मोबाइल पर पर्चा दिखाया था। जिसमें साफ नजर नही आ रहा था कि कौनसी दवा लिखी है। इसलिए डॉक्टर से दवा लिखवाने को बोला। क्योकिं शिकायत कर्ता की पत्नी कोरोना पेशेंट रही है। इसलिए बिना पर्ची के दवा देना मुनासिब नहीं समझा और डॉक्टर के पास जाने के लिए बोला। ड्रग इंपेक्टर ने उस रात ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर से बात नहीं की। फिर भी जो भी लापरवाही सामने आएगी, कार्रवाई की जाएगी।

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