किसानों पर मौसम की मार:कोटा में बारिश और ओलो ने तबाह की खेत में खड़ी फसलें, किसान बोले- अब कैसे चुकेगा कर्ज?

कोटा8 महीने पहले
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बारिश और ओलावृष्टि से इस कदर नुकसान हुआ है कि खराब फसलें मवेशियों के चारे के लायक तक नहीं बची हैं। - Dainik Bhaskar
बारिश और ओलावृष्टि से इस कदर नुकसान हुआ है कि खराब फसलें मवेशियों के चारे के लायक तक नहीं बची हैं।

कोटा के कनवास तहसील के मंगलपुरा निवासी रूपचंद खटाना के परिवार में 10 सदस्य हैं। सभी खेती पर आश्रित हैं। इस बार बड़ी उम्मीद से चना और गेहूं की फसल बोई थी। लेकिन, कुदरत के कहर ने सब तहस नहस कर दिया। शुक्रवार को हुई बारिश व ओलावृष्टि में चने की फसल नष्ट कर दी।

रूपचंद ने बताया कि धाखड़खेड़ी में बैंक से 10 लाख का किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) लोन ले रखा है। करीब 3 लाख आढ़तिया और 4 लाख अन्य से कर्जा लेकर फसल की थी। उनके 30 बीघा में चने की फसल थी। इसमें से 15 बीघा 8 हजार रुपये प्रति बीघा से किराए से जोती थी। जबकि बाकी जमीन में गेहूं किए थे। बारिश ने सब तबाह कर दिया। अभी तक खेत में पानी भरा है। अब चिंता सता रही है कि कर्ज कैसे चुकेगा?

शुक्रवार को हुई बारिश के बाद अभी तक खेत में पानी भरा हैं।
शुक्रवार को हुई बारिश के बाद अभी तक खेत में पानी भरा हैं।

9 लाख की फसल चौपट हो गई
राजाराम (60) निवासी खजुरना ने 32 बीघा जमीन में चना, लहसुन और गेहूं की फसल की थी। बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि ने एक झटके में राजाराम के अरमानों पर पानी फेर दिया। 15 बीघा में लगी चने की फसल, 14 बीघा गेहूं और 4 बीघा में लहसुन की फसल खराब हो गई। राजाराम ने चना काट कर खेत में रखा था। उन्होंने 3 लाख का किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) व 1 लाख का सहकारी बैंक से लोन ले रखा था। कुदरत के कहर ने उनकी 9 लाख की फसल पूरी तरह चौपट हो गई। हाल ही में उन्होंने 37 हजार का बिजली का बिल जमा करवाया था। परिवार में 6 सदस्य हैं। सभी खेती पर आश्रित हैं।

मवेशियों के चारे का संकट भी
राजाराम और रूपचंद की तरह ही ऐसे कई किसान हैं, जिनकी फसलें बारिश में खराब हुई हैं। कनवास और सांगोद उपखंड में तेज बारिश के साथ ओले गिरने से फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। प्रकृति के कहर ने खजुरना, मंगलपुरा, कोटबावड़ी, उरना, मोहनपुरा, खोदयाखेड़ी, बालुहेड़ा,आवां, मांदल्याहेड़ी गांव में किसानों की कमर तोड़ दी हैं। अब इनके पास कुछ नहीं बचा है। बारिश और ओलावृष्टि से इस कदर नुकसान हुआ कि खराब फसलें मवेशियों के चारे के लायक तक नहीं बची हैं।