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शर्म करो सरकार:कोरोना योद्धाओं को 7 मोह से न वेतन मिला, न सम्मान, पोस्टिंग देकर पे-शीट बनाना भूले, फिर भी 23 नर्सेज कर्मचारी कोविड अस्पताल में निभा रहे फर्ज

कोटा9 महीने पहलेलेखक: मुकेश सोनी
ना वेतन मिला,ना सम्मान,फिर भी क�

कोविड अस्पताल में करीब 23 नर्सेज पिछले 7 माह से बिना वेतन के काम कर रहे हैं। कोरोना काल में सरकार इनको पोस्टिंग देकर वेतन आहरण करना भूल गई। इसके चलते ये नर्सेज वेतन को तरस गए। जैसे-तैसे जुगाड़ करके, इधर उधर से कर्ज लेकर ये परिवार का पेट पाल रहे हैं। वेतन नहीं मिलने का दर्द है, उसके बावजूद ये नर्सेज कोरोना योद्धा के रूप में बिना थके कोविड अस्पताल में मरीजों की सेवा में जुटे हैं। ये नर्स सीधी भर्ती के माध्यम से 2018 में चयनित हुए थे।

ये नर्सेज योद्धा की तरहा बिना थके कोविड अस्पताल में मरीजों की सेवा में जुटे हैं
ये नर्सेज योद्धा की तरहा बिना थके कोविड अस्पताल में मरीजों की सेवा में जुटे हैं

अक्टूबर में मिली थी पोस्टिंग

पिछले साल कोरोना काल मे स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने अक्टूबर माह में 23 नर्सेज को पोस्टिंग दी थी। पोस्ट खाली नहीं थी। इसके बाद भी 23 नर्सेज को प्रोबेशन में नए अस्पताल में लगाया था। तब से ये नर्सेज अस्पताल के ड्यूटी रजिस्टर में साइन कर रहे है,इनका NPS भी जनरेट हो चुका है। मास्टर डाटा फॉर्म बन चुका है। SSO आईडी भी बन गई, लेकिन सेलरी नहीं बनी। अस्पताल में पद स्वीकृत नहीं होने के कारण इनकी सैलरी नहीं बन पा रही। प्रोबेशन पीरियड में इनको 26500 रुपए प्रति माह मिलने थे।

इनमें कई के पास तो घर खर्च के पैसे तक नहीं है। मकान मालिक भी किराया के लिए तकाजा करने लगे है
इनमें कई के पास तो घर खर्च के पैसे तक नहीं है। मकान मालिक भी किराया के लिए तकाजा करने लगे है

वेतन नहीं मिलने से झेल रहे मानसिक तनाव

कोरोना महामारी के दौर में ये नर्सेज मानसिक तनाव झेल रहे है। इनमें अधिकांश परित्यक्ता, विधवा,या विकलांग हैं, जो आर्थिक संकट के बाद भी अस्पताल में मरीजों की सेवा में जुटे हैं। इनमें कई के पास तो घर खर्च के पैसे तक नहीं है। मकान मालिक भी किराया के लिए तकाजा करने लगे है। पीड़ित नर्सेज प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज से लेकर जिला कलेक्टर व मंत्री तक गुहार लगा चुके है। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

नर्सेज की पीड़ा

ममता कुमारी, सलमा बानो, सुरेंद्र मीणा व पदम जैन ने बताया कि इस संकट की घड़ी में जान की परवाह किए बिना हम सभी मरीजों की सेवा में लगे हुए हैं। आर्थिक व मानसिक स्थिति खराब होती जा रही है। घरवालों से कहां तक पैसे मांगे। उधारी लेकर घर खर्च की व्यवस्था कर रहे हैं। अब तो कर्जदार व मकान मालिक भी तकाजा करने लगे है। ऐसा पहली बार हुआ है जब कोरोना योद्धाओं को न सम्मान मिल रहा है,न ही वेतन मिल रहा है। एक साथी कमल किशोर मीणा की तो पत्नी गर्भवती हैं। ऐसे समय में उन्हें भरपूर संभाल की आवश्यकता होगी। अब क्या करें, समझ से परे है।

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