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बहुचर्चित रुद्राक्ष अपहरण व हत्याकांड:हाईकोर्ट ने फांसी को आजीवन कारावास में बदला, 26 माह पहले निचली अदालत ने आरोपी अंकुर पाड़िया को सुनाई थी फांसी की सजा

कोटा2 वर्ष पहले
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फाइल फोटो - मुख्य आरोपी अंकुर पाड़िया की फांसी के विरुद्ध दायर अपील का निस्तारण करते हुए  हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बदला। हाईकोर्ट ने अंकुर पाड़िया की फांसी की सजा रद्द करते हुए आजीवन कारावास की सजा में बदला है। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो - मुख्य आरोपी अंकुर पाड़िया की फांसी के विरुद्ध दायर अपील का निस्तारण करते हुए  हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बदला। हाईकोर्ट ने अंकुर पाड़िया की फांसी की सजा रद्द करते हुए आजीवन कारावास की सजा में बदला है।
  • साथ ही तीन अन्य आरोपियों की सजा के विरुद्ध की गई अपील को खारिज किया
  • मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपीयो को गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश किया

कोटा के बहुचर्चित रुद्राक्ष अपहरण- हत्याकांड मामले में आरोपियों की अपील पर हाईकोर्ट ने निस्तारण किया। मुख्य आरोपी अंकुर पाड़िया की फांसी के विरुद्ध दायर अपील का निस्तारण करते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बदला। हाईकोर्ट ने अंकुर पाड़िया की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील करते हुए 25 साल की सजा का आदेश दिया हैं ।साथ ही तीन अन्य आरोपियों की सजा के विरुद्ध की गई अपील को खारिज किया है। हाईकोर्ट में फरियादी पुनीत हांडा के वकील अश्वनी गर्ग ने बताया कि हाईकोर्ट ने 58 पेज का फैसला सुनाया हैं, कोर्ट ने इसे विरलतम से विरल अपराध की श्रेणी में नहीं माना। आपको बता दें हाईकोर्ट के निर्देश के बाद 26 माह पहले निचली अदालत ने सजा के बिंदुओं पर दुबारा सुनवाई करते आरोपी अंकुर पाड़िया की फांसी की सजा को बरकरार रखा था।

ये था मामला

अक्टूबर 2014 में मुख्य आरोपी अंकुर पाड़िया ने 2 करोड़ की फिरौती के लिए 7 साल के मासूम रुद्राक्ष का अपहरण उसकी हत्या कर दी थी। उस वक्त कोटा सहित पूरे प्रदेश की जनता न्याय के लिए सड़कों पर उरत आई थी। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपीयो को गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश किया। एसीटी-एससी कोर्ट में सवा तीन साल सुनवाई चली थी। इस दौरान 110 गवाहों के बयान दर्ज किए। 26 फरवरी 2018 में न्यायाधीश गिरीश अग्रवाल की अदालत ने फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी अंकुर पाड़िया को फांसी की सजा सुनाई।साथ ही उसके भाई व सहआरोपी अनूप पाड़िया को आजीवन कारावास की सजा से दण्डित किया। दो अन्य सहयोगी महावीर को 4 साल व करनजीत को 2 साल की सजा सुनाई थी।

फांसी की सजा सुनाये जाने के बाद आरोपी अंकुर की और से सजा के विरुद्ध हाईकोर्ट में अपील की गई थी। जिस पर हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए तीन माह के भीतर अधीनस्थ न्यायालय को सजा के बिंदु पर दुबारा से सुनवाई के आदेश दिये थे। 19 दिसंबर 2018 को एसटी कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश के बाद सजा के बिंदु पर दुबारा सुनवाई पूरी हुई। आरोपी अकुंर पाड़िया की फाँसी की सजा को बरकरार रखा था। न्यायाधीश सन्तोष कुमार की अदालत ने धारा 302 में फांसी की सजा बरकरार रखते हुए धारा 364 A में भी आरोपी को फांसी की सजा सुनाई थी । अदालत ने " रेयर ऑफ द रेयरेस्ट" मानते हुए फैसले में टिप्पणी करते कहा था कि ऐसा जघन्य अपराध करने वाले को समाज मे अकेले नही छोड़ा जा सकता। ये समाज के विरुद्ध अपराध है।

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