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अब तो भगवान भरोसे हालात!:अस्पताल हाउस फुल, ना आईसीयू बेड मिल रहे, ना ही ऑक्सीजन, व्यवस्था व मॉनिटरिंग के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी भी नहीं कर पा रहे आमजन की मदद

कोटा7 महीने पहले
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दीपचंद जैन (78) के लंग्स में इंफे� - Dainik Bhaskar
दीपचंद जैन (78) के लंग्स में इंफे�

जिले में कोरोना की दूसरी लहर से हालात विस्फोट हो गए है। लाख जतन के बाद भी मरीजों को अस्पतालों में बेड नहीं मिल पा रहे है। ना ही ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था हो पा रही है। बेड व ऑक्सीजन के जुगाड़ करते करते मरीज की सांसे साथ छोड़ने लगी है। इन मामलों से समझिए आमजन की पीड़ा

केस-1

श्रीनाथपुरम निवासी आदिश जैन ने बताया कि दादाजी दीपचंद जैन (78) के लंग्स में इंफेक्शन था। 4 दिन निजी अस्पताल में भर्ती रहे। आराम नही मिला तो घर पर लेकर आये। रोज 1 लीटर ऑक्सीजन की व्यवस्था करनी पड़ती थी। 3-4 दिन पहले नए अस्पताल में भर्ती कराया था। RTPCR टेस्ट नेगेटिव आया था। पर सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। अस्पताल के मेडिकल वार्ड बी के बेड नम्बर 1 पर भर्ती थे। उनका ऑक्सीजन लेवल 47 था। ऑक्सीजन प्रेशर 15 लीटर/मिनट दिया जा रहा था। ड्यूटी डॉक्टर ने हालात देखकर वेंटिलेटर पर लेने की सलाह दी। दिनभर इधर से उधर चक्कर काटे लेकिन वेंटिलेटर की व्यवस्था नहीं हुई। अस्पताल प्रशासन ने वेंटिलेटर खाली नही होने की बात कहीं। इस बीच वार्ड में ऑक्सीजन का प्रेशर डाउन हो गया। दोपहर साढ़े 3 बजे दादाजी ने दम तोड़ दिया। जबकि बेड नम्बर 3 व 5 के मरीज की हालत सीरियस होने लगी।

केस-2

तलवंडी निवासी दुष्यंत गहलोत ने बताया कि कोटा के हालात विस्फोटक होते जा रहे है। गम्भीर मरीजों को बेड तक नही मिल रहे है। अस्पताल में बेड नहीं मिलने के कारण उनके रिश्तेदार की मौत हो गई। दुष्यंत ने बताया कि उनके जीजाजी की मां को कफ की शिकायत थी। अल सुबह से ही अस्पतालों में चक्कर काटे। कहीं भी बेड खाली नहीं मिला। जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों के फोन किये, फिर भी बेड की व्यवस्था नहीं हुई। आखिर 8 बजते बजते तो उनका दम टूट गया।

केस-3

महावीर नगर निवासी किरण कुमार जैन ने बताया परिचित के लिए अस्पताल में बेड की व्यवस्था करने के लिए सुबह से परेशान हो रहे। अस्पतालों में बेड ही नहीं है।अधिकारियों के फोन लगाया ,पर फोन रिसीव नहीं किया। कहां कहां फोन नहीं किया। कभी सोचा भी नही था कि, ऐसा भी वक्त आएगा, जब अस्पताल में बेड नहीं मिलेंगे।

जिला प्रशासन ने मरीजों की परेशानियों को देखते हुए अधिकृत 15 सरकारी व निजी अस्पतालों में 30 नोडल अधिकारी व सहायक नोडल अधिकारी लगाए है। प्रशासन ने अधिकारियों के मोबाइल नम्बर जारी किए है। लेकिन वो भी मरीजों को राहत नही दिला पा रहे है।

सहायक नोडल अधिकारी के नम्बर पर व्यापारी ने उठाया फोन

दुष्यंत गहलोत ने बताया कि अस्पताल में खाली बेड की जानकारी के लिए दोपहर 3 बजे के लगभग सहायक नोडल अधिकारी, न्यू मेडिकल कॉलेज डॉ प्रद्युमन गोयल के नम्बर पर फोन लगाया। जो भीलवाड़ा जिले के राजाजी का करेड़ा गांव निवासी एक व्यापारी छीतरमल ने उठाया। छीतरमल ने बताया कल रात से दोपहर तक सेकंडों फोन आ चुके है। सभी पीड़ित खाली बेड व ऑक्सीजन सिलेंडर के बारें में पूछ रहे है। हर दो मिनट में घण्टी बज रही है। फोन उठाते उठाते परेशान हो चुका हूं। लिस्ट में गलती से मेरा नम्बर प्रिंट हो गया। फिर नोडल अधिकारी उपसचिव यूआईटी चंदन दुबे के मोबाइल नम्बर पर फोन किया। फोन देर तक व्यस्त आया।

इसके बाद संजीवनी हॉस्पिटल बोरखेड़ा में सहायक नोडल अधिकारी डॉ. हरिनन्दन मीणा के नम्बर पर बात की। डॉ. हरिनन्दन ने बताया कि उन्हें अस्पताल में खाली बेड की स्थिति का पता नहीं। वो खुद लैब में काम कर रहे है। फिर नोडल अधिकारी उपसचिव यूआईटी मोहम्मद ताहिर के नम्बर पर फोन लगाया,पर फोन नहीं लगा।

राधा कृष्णा हॉस्पिटल तलवंडी में नोडल अधिकारी जिला रसद अधिकारी गोवर्धन लाल मीणा के नम्बर पर बात की। गोवर्धन लाल ने अस्पताल में बेड खाली नहीं होने की जानकारी देते हुए कहा कि बड़े अस्पताल में पता करो।जब उनसे पूछा कि किस अस्पताल में बेड खाली है ये बता दें तो उन्होंने कहा कि पोर्टल पर सुविधा है वहां पता करें।

ये तो बानगी है ऐसे कई पीड़ित मरीज व तीमारदार, अधिकारियों के फोन लगा लगाकर थक चुके। कुछ अधिकारियों ने फोन उठाया जबकि कई अधिकारियों का फोन व्यस्त आता रहा। जिला प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्था भी आमजन को राहत नहीं दिला पा रही।

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