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कब थमेगा मौतों का सिलसिला!:बेड व ऑक्सीजन के अभाव में घर पर ही दम तोड़ रहे मरीज, चिकित्सा विभाग सेम्पलिंग घटाकर संक्रमण को कम करने में जुटा

कोटा6 महीने पहले
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देर रात भी डीसीएम रोड स्थित ऑक� - Dainik Bhaskar
देर रात भी डीसीएम रोड स्थित ऑक�

जिले में कोरोना का संक्रमण मरीजों को मौत की नींद सुला रहा है। कोविड अस्पताल के बीते 5 दिन के आंकड़े बताते है कि कोविड अस्पताल में इन पांच दिनों में पॉजिटिव, नेगेटिव, सस्पेक्टेड 77 मरीजों ने दम तोड़ा है। ये तो वो आंकड़ा है जिनकी मौत अस्पताल में हुई है। इनके अलावा कई मरीज ऐसे भी है जिन्हें अस्पताल में जगह ही नहीं मिली, घर मे ही इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इन सबके बावजूद चिकित्सा विभाग आंकड़ों में जादूगरी दिखाकर संक्रमण का असर कम दिखाने में लगा है। विभाग द्वारा पिछले पांच दिनों सेम्पलिंग की रफ्तार धीमी की गई है। पहले रोज 4 हजार से ज्यादा की सेम्पलिंग की जा रही थी,जिसे अब घटाकर 4 हजार से नीचे कर दिया गया। जिले में अभी भी कोरोना 19% संक्रमण की दर से बढ़ रहा है।

इन आंकड़ों से समझे

तारीखसैम्पलपॉजिटिवमौत (सरकारी आंकड़े)कोविड अस्पताल में मौत
29 अप्रैल3939701817
28 अप्रैल3891687421
27 अप्रैल4026701615
26 अप्रैल3343955512
25 अप्रैल3933701712

हर 5 वां सैम्पल पॉजिटिव

पिछले पांच दिनों से संक्रमितों की संख्या 1 हजार से नीचे आ रही है।जिले में कोरोना संक्रमण कम होने के दावे किए जा रहे है। इन 5 दिनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया तो चौकाने वाली बात सामने आई। जिले में अभी भी 19 प्रतिशत की दर से कोरोना संक्रमण लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। यानि 100 सैम्पल की जांच में 19 लोग संक्रमित आ रहे है। हर 5 वां सैम्पल पॉजिटिव मिल रहा है। उसके बाद भी चिकित्सा विभाग ने सेम्पलिंग घटा दी है।

ऑक्सीजन के लिए जद्दोजहद ताकि चलती रहें जिंदगी की सासें
ऑक्सीजन के लिए जद्दोजहद ताकि चलती रहें जिंदगी की सासें

इन मामलों से समझे आमजन का दर्द

केस-1

पूनम कॉलोनी निवासी संतोष ने बताया कि उनकी मां सुमित्रा देवी (61) को 12 अप्रैल को वैक्सीन लगी थी। तबियत ठीक थी। 25 अप्रैल को गला सूखने की शिकायत हुई थी। 28 अप्रैल को रेलवे अस्पताल में दिखाने गया। शाम का वक्त था। अस्पताल में एक महिला कार्मिक थी। महिला कार्मिक ने जांच के लिए बोला। लेकिन अस्पताल में भर्ती नही किया। इस दौरान मां की तबियत बिगड़ती गई। मित्र नितेश गोयल ने रेलवे अस्पताल के सहायक नोडल अधिकारी से फोन पर बात की। सहायक नोडल अधिकारी ने बेड खाली नहीं होने की बात कही। थकहार कर मरीज को वापस घर पर लेकर आये। फिर दूसरे दिन सुबह 8 बजे मरीज को ऑटो में बिठाकर हॉस्पिटल लाने लगा तो मरीज ने ऑटो में ही दम तोड़ दिया। एम्बुलेंस को फोन किया। लेकिन एम्बुलेंस नहीं पहुंची। जैसे तैसे मरीज को लेकर रेलवे अस्पताल पहुंचा। वहां महिला कार्मिक व एक डॉक्टर मौजूद थे। उन्होंने तुरन्त मरीज को ऑक्सीजन पर लिया। थोड़ी देर बाद मरीज को मृत घोषित कर दिया। संतोष ने कहा कि यदि 28 अप्रैल को उनकी मां को अस्पताल में भर्ती कर लिया जाता तो शायद उनकी जान बच जाती। उनकी मौत नही होती। रेलवे अस्पताल को बन्द कर देना चाहिए यहां इलाज नहीं होता बल्कि मरीजों दूसरे अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है।

ममता वैष्णव (42 ) रंगबाड़ी की रहने वाली थी, 4 दिन से घर पर ही इलाज चल रहा था। सुबह 5 बजे उसकी मौत हो गई
ममता वैष्णव (42 ) रंगबाड़ी की रहने वाली थी, 4 दिन से घर पर ही इलाज चल रहा था। सुबह 5 बजे उसकी मौत हो गई

केस-2

राजेन्द्र शर्मा ने बताया कि उनकी परिचित ममता वैष्णव (42 ) रंगबाड़ी की रहने वाली थी। 4 दिन पहले कोरोना पॉजिटिव मिली थी। इलाज के लिए नए अस्पताल में लाये थे। देर तक आउटडोर में पड़ी रही। लेकिन महिला को भर्ती नहीं किया गया।मेडिकल कॉलेज प्राचार्य से लेकर अधीक्षक से महिला को भर्ती करने की गुहार लगाई।इधर-उधर भटके। लेकिन महिला को अस्पताल में बेड नसीब नही हुआ। आखिरकार परिवार वाले महिला को वापस घर ले कर आ गए। 4 दिन से घर पर ही इलाज चल रहा था। आज सुबह 5 बजे उसकी मौत हो गई। मृतका के तीन बेटियां है। पति राजू प्राइवेट काम करता है। मां की असमय मौत से तीनों बेटियों पर दुखों का पहाड़ टूटा है परिवार सदमें में है। राजेंद्र शर्मा का कहना है कि हॉस्पिटल मेंबमहिला को भर्ती कर लिया जाता तो उसको इलाज मिल सकता था। हो सकता है शायद उसकी जान नहीं जाती। लेकिन चिकित्सा प्रशासन को लोगों की जान की चिंता नहीं है केवल नंबरों की चिंता है।

ऑक्सीजन की जद्दोजहद

देर रात भी डीसीएम रोड स्थित ऑक्सीजन प्लांट के बाहर सिलेंडर रिफिल करने के लिए लोग इंतजार करते रहे। कोविड हॉस्पिटल से डिस्चार्ज रोगियों के परिजन ऑक्सीजन के लिए बिलखते रहे। लेकिन इनकी सुनने वाला कोई नहीं था। जिम्मेदारों ने भी हाथ खड़े कर दिए। शिवपुरा निवासी परिजन ने बताया कि उनकी मरीज सईदुल निशा को कोविड अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। उन्हें घर पर ही ऑक्सीजन लगाने के लिए कहा गया। ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल रहा कहां जाएं। आधारशिला निवासी अब्दुल अजीज ने बताया कि उनके मरीज का विज्ञान नगर सहारा हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। ऑक्सीजन खत्म होने के कारण अस्पताल वालो ने अपने स्तर पर सिलेंडर की व्यवस्था करने के लिए कहा है। यहां सिलेंडर नहीं मिल रहा है। वहीं सगतपुरा निवासी अब्दुल रहमान, रंगबाड़ी निवासी सीता नागर , विजय कुमार रात को 12 बजे तक सिलेंडर के लिए इधर-उधर भटकते रहे लेकिन उनको कहीं सिलेंडर नहीं मिला।

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