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प्राणवायु के लिए कतार!:ऑक्सीजन सिलेंडर के जुगाड़ में बीत रहा दिन, परिजन घण्टों लाइन में खड़े रहने को मजबूर

कोटाएक महीने पहले
ऑक्सीजन प्लांट के बाहर परिजन खाली सिलेंडरों की कतारें लगाकर अपनी बारी का इंतजार करते रहते है

जिले में कोरोना संक्रमण कम होने का नाम नही ले रहा। मरीजों की बढ़ती संख्या से चिकित्सा तंत्र हाफ रहा है। मरीजों को ऑक्सीजन, दवा व बेड के लिए जतन करने पड़ रहे है। सबसे ज्यादा ऑक्सीजन सिलेंडर को लेकर मारामारी देखने को मिल रही है। सिलेंडर लेने के लिए परिजनों को घण्टों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। ऑक्सीजन प्लांट के बाहर परिजन खाली सिलेंडरों की कतारें लगाकर अपनी बारी का इंतजार करते रहते है। परिजनों का आरोप है कि घण्टों लाइन में खड़े रहने के बाद भी सुनवाई नही होती। सिलेंडर के जुगाड़ में पूरा दिन ही बीत जा रहा है। कई बार प्लांट में तकनीकी खराबी आ जाने के कारण परिजनों की मुसीबत ओर बढ़ जाती हैं।

घण्टों लाइन में खड़े रहने के बाद भी सुनवाई नही होती। सिलेंडर के जुगाड़ में पूरा दिन ही बीत जा रहा है
घण्टों लाइन में खड़े रहने के बाद भी सुनवाई नही होती। सिलेंडर के जुगाड़ में पूरा दिन ही बीत जा रहा है

शहर में ऑक्सीजन सिलेंडर रिफलिंग के 3 प्लांट है। डीसीएम रोड स्थित कोटा ऑक्सीजन प्लांट से निजी अस्पतालों व मरीजों के परिजनों को ऑक्सीजन सिलेंडर देने की व्यवस्था की गई है। जानकारी के मुताबिक यहां 200 से 250 टोकन रोज कट रहे है। यहां डॉक्टर द्वारा लिखी पर्ची पर ऑक्सीजन सिलेंडर दिए जा रहे है। प्लांट के बाहर सुबह से रात तक गाड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है। हालांकि गर्मी व धूप से बचाव के लिए प्लांट के बाहर टेंट व कुर्सियां लगाई गई है।

हाल ही में कोटा को लिक्विड ऑक्सीजन के 2 टैंकर की सप्लाई मिली है। उसके बाद भी हालत जैसे के तैसे बने हुए है। परिजन सुबह से लेकर देर रात तक ऑक्सीजन सिलेंडर लेने के किये कतारों में खड़े रहते है। कतारों में खड़े रहने के दौरान कई बार तो हंगामे की हालत बन जाते है।

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