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विश्वकर्मा जयन्ती:विश्व के पहले इंजीनियर है भगवान विश्वकर्मा, मशीनों की होगी पूजा

कोटा10 दिन पहले
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भगवान विश्वकर्मा
  • सुबह 6:16 से 7:48 और 10:50 से दोपहर 1:30 तक है पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त

कहते हैं जिन्हें कर्म में विश्वास है। भगवान विश्वकर्मा उनके पास है। व्रत-उपवास, तीज-त्योहार पंचांग के अनुसार ही मनाए जाते हैं, लेकिन विश्वकर्मा पूजा एक त्योहार ऐसा है जो हर साल 17 सितंबर को ही मनाया जाता है। ज्योतिष गणना के अनुसार विश्वकर्मा पूजा जिस दिन कन्या संक्रांति होती है उस दिन की जाती है। इसके अलावा हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान विश्वकर्मा की उत्पत्ति हुई थी।

इस बार कई जगहों पर विश्वकर्मा पूजन 16 सितंबर काे, कुछ जगह 17 सितंबर काे मनाई जा रही है। भगवान ब्रह्मा के सातवें पुत्र के रूप में विश्वकर्मा का जन्म हुआ था, जो लोग निर्माण और सृजन से जुड़े हैं, उनको विश्वकर्मा की पूजा जरूर करनी चाहिए। आज के दिन उद्योग-धंधों, कारखानों, मशीनरी, औजार, व्यापारिक प्रतिष्ठानो में विशेष रूप से पूजा की जाती है। विश्वकर्मा पूजन से विशेष फल प्राप्त होता है।

विश्व के पहले इंजीनियर है भगवान विश्वकर्मा
विश्वकर्मा शिल्पकार, रचनाकारों के ईष्टदेव हैं। विश्वकर्मा उन्होंने सृष्टि की रचना में ब्रह्माजी की मदद की। पूरे संसार का मानचित्र बनाया। भगवान विश्वकर्मा ने स्वर्गलोक, श्रीकृष्ण की नगरी द्वारिका, सोने की लंका, पुरी मंदिर के लिए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र वं सुभद्रा की मूर्तियों, इंद्र के अस्त्र वज्र आदि का निर्माण किया था। स्वर्गलोक, द्वारिका, लंका समेत अनेकों भवनों का निर्माण किया था। वे संसार के पहले इंजीनियर और वास्तुकार कहे जाते हैं। ऋग्वेद में उनके महत्व का पूर्ण वर्णन मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संसार में जो भी निर्माण या सृजन होता है

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