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आईटीआई वाली टीचर दीदी:कई बच्चों का स्कूल में नामांकन नहीं, बच्चों को इकट्ठा कर पढ़ाती है, चार्टेड अकाउंटेंट करते हैं मदद

कोटा12 दिन पहले
बच्चों को पढ़ाते हुए सरला। यहां वे 50 बच्चों को अपने खर्च पर पढ़ा रही है।

कोटा के नयागांव के रहने वाली सरला यदुवंशी 50 बच्चों को पढ़ा रही है। सरला ने आईटीआई कर रखी है और बच्चे उसे आईटीआई वाली टीचर दीदी के नाम से जानते हैं। सरला खुद मध्यमवर्गीय परिवार से है। दो भाई हैं जो काम कर परिवार चलाते हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए नयागांव के ही सरकारी स्कूल का कमरा मिला हुआ है। स्कूल प्रिंसिपल ने इन गरीब बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल परिसर की अनुमति दे दी। जिसके बाद अब रोज सुबह 12 बजे से 3 बजे तक इन गरीब बच्चों की क्लास सरला लेती है। इन बच्चों के लिए स्टेशनरी की व्यवस्था भी सरला ने की। हालांकि उसकी मदद कोटा के चार्टर्ड अकाउंटेंट महेश मित्तल और उनके साथी भी करते हैं। बच्चे सरला को टीचर दीदी कहकर बुलाते हैं।

ऐसे हुई शुरुआत
महेश मित्तल ने बताया कि कई बच्चे शिक्षा से वंचित है। ऐसे में इनको पढ़ाने का विचार आया। सरला नयागांव में ही गरीब बच्चों को फ्री में पढ़ाती थी। ऐसे में उससे बात की तो वो पढ़ाने को तैयार हो गई। इसके बाद स्कूल प्रिंसिपल से मदद मांगी तो उन्होंने स्कूल में इन बच्चों को पढ़ने के लिए जगह दे दी।।

आसान नही था बच्चों को लाना

सरला ने बताया कि जो बच्चे अभी पढ़ने आ रहे है उन्हें लाना आसान नही था। इनमें ज्यादातर के परिवार के मुखिया मजदूरी करते है। वे कॉपी किताब पर भी खर्च करने को राजी नहीं हैं। सरला ने एक एक बच्चे के घर जाकर उनके मां बाप को समझाया। उन्हें राजी किया। अब 50 बच्चे उसके पास पढ़ने को आ रहे हैं। मित्तल आर्थिक रूप से भी पढाई को लेकर मदद करते हैं। उनके साथी भी मदद में जुड़े हुए हैं।

इसलिए नहीं एडमिशन
दरअसल नयागांव में ज्यादातर लोग मजदूर तबके के हैं। आर्थिक रूप से काफी कमजोर है। ज्यादातर शराब के आदी हैं। बच्चों के डॉक्यूमेंट नहीं बने हुए। ज्यादातर के आधार कार्ड तक नहीं हैं। हालांकि अब कोशिश की जा रही है कि उनके स्कूल में दाखिला हो जाए।