लाॅकडाउन इफेक्ट / मोक्ष के इंतजार में 700 से अधिक अस्थियां, लॉकर फुल हुए ताे पीपों में रख रहे हैं इन्हें

More than 700 bones are waiting for salvation, the lockers are kept in the filled casks
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More than 700 bones are waiting for salvation, the lockers are kept in the filled casks

  • मुक्तिधाम में फुल हो चुके हैं अस्थियों के लॉकर

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:54 AM IST

कोटा. लॉकडाउन के कारण जहां जीवित लोग घरों में बंद हाे गए थे, वहीं मृत्यु के बाद दिवंगताें की अस्थियों को भी लॉकर में कैद करवा दिया है। काेटावासी अपने परिजनाें की अस्थियाें काे गंगा में विसर्जित करने के लिए हरिद्वार ले जाते हैं। लाॅकडाउन के बाद से ही ट्रेन व बसें नहीं चलने के कारण लाेग वहां नहीं जा पा रहे हैं। इस कारण अस्थियों काे मुक्तिधामाें में बने लाॅकर में ही रखना पड़ रहा है।

दाे माह में हालात यह हाे गए कि वहां के लाॅकर फुल हाे चुके हैं और अब लाॅकर के बाहर पीपाें में अस्थियां रखकर ताला लगा दिया। उन पर नाम लिखकर वहीं रख दिया ताकि जब भी बस-ट्रेन चलेगी तब उन्हें विसर्जन के लिए ले जाएंगे। काेटा में 17 मुक्तिधाम हैं और करीब 10 जगह अस्थियां रखने की व्यवस्था है। वहां अभी 700 से ज्यादा अस्थियां रखी हुई हैं।
काेटा में हर माह औसतन 450 लाेगाें की मृत्यु हाेती है। पिछले 2 माह में करीब 900 लाेगाें की मृत्यु हुई। शहर में मुक्तिधामाें की देखरेख कर रही कर्मयाेगी संस्था के संस्थापक राजाराम कर्मयाेगी के अनुसार किशाेरपुरा मुक्तिधाम में 54 अस्थियाें काे रखने वाला सबसे बड़ा लाॅकर है। वाे एक माह पहले ही फुल हाे चुका है। अब लाेग अपने परिजनाें की अस्थियाें काे पीपाें में रखकर उस पर उनका नाम लिखकर इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में लगे लाॅकर के ऊपर रख रहे हैं। अभी वहां 200 से अधिक अस्थियां रखी हैं।

किशोरपुरा मुक्तिधाम में लॉकर भरने के बाद पीपों में रखी अस्थियां

संजयनगर मुक्तिधाम की व्यवस्था संभाल रहे मुकेश अग्रवाल बताते हैं कि वहां 30 अस्थियां रखने के लिए लाॅकर है, लेकिन वाे काफी पहले ही भर चुका है। अब ताे एक-एक लाॅकर में दाे-दाे अस्थियां रखनी पड़ रही है। यही हालत विज्ञाननगर, भीमगंजमंडी, केशवपुरा, छावनी आदि मुक्तिधामाें में भी है।
लॉकडाउन के कारण जहां जीवित लोग घरों में बंद हाे गए थे, वहीं मृत्यु के बाद दिवंगताें की अस्थियों को भी लॉकर में कैद करवा दिया है। काेटावासी अपने परिजनाें की अस्थियाें काे गंगा में विसर्जित करने के लिए हरिद्वार ले जाते हैं। लाॅकडाउन के बाद से ही ट्रेन व बसें नहीं चलने के कारण लाेग वहां नहीं जा पा रहे हैं। इस कारण अस्थियों काे मुक्तिधामाें में बने लाॅकर में ही रखना पड़ रहा है।

दाे माह में हालात यह हाे गए कि वहां के लाॅकर फुल हाे चुके हैं और अब लाॅकर के बाहर पीपाें में अस्थियां रखकर ताला लगा दिया। उन पर नाम लिखकर वहीं रख दिया ताकि जब भी बस-ट्रेन चलेगी तब उन्हें विसर्जन के लिए ले जाएंगे। काेटा में 17 मुक्तिधाम हैं और करीब 10 जगह अस्थियां रखने की व्यवस्था है। वहां अभी 700 से ज्यादा अस्थियां रखी हुई हैं।
अभी है बस-ट्रेन चलने का इंतजार
काेटा से अधिकांश लाेग देहरादून एक्सप्रेस व नंदादेवी एक्सप्रेस से हरिद्वार जाते हैं, कुछ लाेग बस से भी जाते हैं। 1 जून से जाे ट्रेनें चलने वाली हैं, उसमें ये दाेनाें ही ट्रेनें शामिल नहीं हैं। वहीं बसाें के चलने की भी अभी तारीख तय नहीं है, ऐसे में अभी इस अस्थियाें के विसर्जन की काेई उम्मीद नहीं है।
केशवरायपाटन में किया विर्सजन
 काेटा के पास ही स्थित केशवरायपाटन धार्मिक स्थल पर भी चंबल बह रही है। कुछ लाेग वहां भी अस्थियां विसर्जित करते हैं, लेकिन लाॅकडाउन में वहां जाना भी संभव नहीं हाे सका। कुछ लाेग जैसे-तैसे वहां तक पहुंचे, लेकिन लाैटते समय उन्हें पुलिस की सख्ती का शिकार हाेना पड़ा।

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