भास्कर एक्सक्लूसिव:भीमगंजमंडी में मां-बेटी का डबल मर्डर केस एनसीआरबी की नेशनल रिपाेर्ट में शामिल

काेटा2 महीने पहले
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काेटा के भीमगंजमंडी थाना क्षेत्र में मां-बेटी के डबल मर्डर केस काे एनसीआरबी ने अपनी राष्ट्रीय रिपाेर्ट में शामिल किया है। - Dainik Bhaskar
काेटा के भीमगंजमंडी थाना क्षेत्र में मां-बेटी के डबल मर्डर केस काे एनसीआरबी ने अपनी राष्ट्रीय रिपाेर्ट में शामिल किया है।
  • फिंगर प्रिंट ब्यूराे ने केस स्टडी के रूप में लिया प्रकरण

काेटा के भीमगंजमंडी थाना क्षेत्र में मां-बेटी के डबल मर्डर केस काे एनसीआरबी ने अपनी राष्ट्रीय रिपाेर्ट में शामिल किया है। एनसीआरबी के सेंट्रल फिंगर प्रिंट ब्यूराे (सीएफपीबी) ने हाल ही में “फिंगर प्रिंट्स इन इंडिया-2020’ रिपोर्ट जारी की है, जिसमें यह मामला बतौर केस स्टडी शामिल किया गया है। राजस्थान से यह एकमात्र केस है, जाे 1 अक्टूबर को जारी इस रिपाेर्ट में शामिल है। इस बहुचर्चित मामले में काेटा शहर पुलिस के इन्वेस्टिगेशन की पूरे प्रदेश में प्रशंसा हुई थी।

भीमगंजमंडी थाना क्षेत्र के गुरूद्वारा रोड पर 31 जनवरी 2019 को मां-बेटी की जघन्य हत्या कर दी गई थी। परिवार के सदस्य मंदिर गए हुए थे, जब लौटे तो दोनों को खून से लथपथ पड़े देखा और घर से करीब 3 कराेड़ रुपए का माल भी गायब था। घटना की सूचना शहर में आग की तरह फैली और शहरवासियाें में खासा आक्राेश हाे गया। मामले की गंभीरता काे देखते हुए काेटा शहर पुलिस के सभी आला अधिकारी माैके पर पहुंचे, काेटा रेंज के तत्कालीन प्रभारी श्रीनिवास राव जंगा भी माैके पर आए। शवाें का मेडिकल मुआयना कराने पर मृतक बच्ची से कुकृत्य की पुष्टि हुई थी ताे मामले में संबंधित धाराएं भी जाेड़ी गई थी।

इस केस में पुलिस ने जांच के दाैरान केशवरायपाटन क्षेत्र के बड़ी तीरथ गांव निवासी मस्तराम मीणा व लोकेश मीणा काे गिरफ्तार किया था। असल में मस्तराम इसी परिवार के यहां पहले नाैकर था, ऐसे में वह शाेक व्यक्त करने आया और उसी दाैरान भीमगंजमंडी थाने के पुलिसकर्मी शिवराज गिरी की निगाह उसके हाथ पर लगी खराेंच पर गई। शिवराज ने उस पर निगाह रखी और पकड़कर पूछताछ की ताे सारा मामला खुल गया।

सजा में फिंगर प्रिंट का अहम राेल रहा : एनसीआरबी

एनसीआरबी की रिपाेर्ट के मुताबिक, इस प्रकरण में आराेपियाें काे सजा-ए-माैत तक पहुंचाने में फिंगर प्रिंट का अहम राेल रहा। घटना के तत्काल बाद 31 जनवरी 2019 काे ही माेबाइल फाेरेंसिक यूनिट की टीम ने माैका मुआयना किया और क्राइम सीन से 5 जगह से फिंगर प्रिंट उठाए, ये फिंगर प्रिंट लकड़ी के दरवाजे, लाेहे की आलमारी और उसके हैंडल पर थे।

बाद में संदिग्धाें से ये फिंगर प्रिंट मैच किए गए। फिंगर प्रिंट ब्यूराे काे यह मामला 19 फरवरी काे मिला था और ब्यूराे के फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट्स ने तत्काल रिपाेर्ट दी, जिसके आधार पर न्यायालय ने यह पुष्टि की कि आराेपियाें की क्राइम सीन पर माैजूदगी थी। इसके आधार पर आराेपियाें काे फांसी की सजा व अलग-अलग जुर्माने से दंडित किया जा सका।

निसंदेह इस केस में तत्कालीन अधिकारियाें ने बहुत अच्छा काम किया। मजबूत एविडेंस जुटाए और आराेपियाें काे फांसी की सजा हाे सकी। इस मामले से यह भी सीखा जाना चाहिए कि घटना के बाद क्राइम सीन से जुटाए गए तथ्य सबसे ज्यादा अहम हाेते हैं।

- प्रवीण जैन, एएसपी सिटी

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