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एडिटर्स एक्सक्लूसिव:कोटा के अखिल ने किराए का घर लेने के लिए चक्कर काटे तो आया ‘नोब्रोकर’ का आइडिया, और बना दी यूनिकॉर्न कंपनी

कोटा13 दिन पहलेलेखक: सर्वेश शर्मा
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ब्रोकरेज फ्री रियल एस्टेट डिजिटल प्लेटफाॅर्म ‘नोब्रोकर’ देश का पहला प्राेपर्टी टेक स्टाॅर्टअप है, इस कंपनी की नींव काेटा के आईआईटीयन अखिल गुप्ता ने रखी है। - Dainik Bhaskar
ब्रोकरेज फ्री रियल एस्टेट डिजिटल प्लेटफाॅर्म ‘नोब्रोकर’ देश का पहला प्राेपर्टी टेक स्टाॅर्टअप है, इस कंपनी की नींव काेटा के आईआईटीयन अखिल गुप्ता ने रखी है।

ब्रोकरेज फ्री रियल एस्टेट डिजिटल प्लेटफाॅर्म ‘नोब्रोकर’ देश का पहला प्राेपर्टी टेक स्टाॅर्टअप है, जाे यूनिकाॅर्न में शामिल हुआ है। मंगलवार को इस कंपनी में जनरल एंटलांटिस, मूर और टाइगर ग्लाेबल ने 1575 कराेड़ निवेश किए हैं।

कंपनी की नेटवर्थ 7452 करोड़ है, अब तक 2700 करोड़ का निवेश हो चुका। 6 प्रमुख शहरों में इसके 1.5 करोड़ रजिस्टर्ड यूजर हैं। इस कंपनी की नींव काेटा के आईआईटीयन अखिल गुप्ता ने रखी है। कंपनी 2014 में लॉन्च हुई। अखिल बता रहे हैं कैसे उन्होंने यह मुकाम पाया।

हाल ही जनरल एटलांटिस, मूर और टाइगर ग्लाेबल ने किया 1575 कराेड़ का निवेश, अब तक 2700 करोड़ की फंडिंग, 1.5 करोड़ यूजर

अगले तीन साल में जयपुर-अहमदाबाद, कोलकाता सहित 50 शहरों में पहुंचने का प्लान : अभी ढाई हजार एम्प्लाॅइज हैं। जल्द ही और लोग हायर करेंगे। देश में हर साल करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए ब्रोकेरेज पे होता है। यह हम कस्टमर की जेब में डाल रहे हैं।

मैं बिजनेस बैकग्राउंड से हूं। पिता मोहनलाल गुप्ता, बड़े भाई का कोटा में ही बिजनेस है। 2005 में आईआईटी बॉम्बे से पासआउट हुआ। बेंगलुरु में जॉब करने गया। शादी हुई तो पत्नी और मैं कई दिन तक घर ढूंढ़ते रहे। पसंद का घर नहीं मिला। लोग बोले- ब्रोकर से बात करो। मैं तैयार नहीं था। तब मुझे एक यूएस बेस प्लेटफार्म के जरिए घर मिला, पर उसमें भी ब्रोकर से बात ही हुई।

तभी आइडिया आया कि भारत में ऐसा कोई प्लेटफार्म शुरू होना चाहिए, जो ब्रोकरेज फ्री हो। एक दिन दाेस्त अमित अग्रवाल और सौरभ गर्ग से चर्चा हुई कि ट्रेन-फ्लाइट टिकट से लेकर सिनेमा टिकट तक ऑनलाइन बुक हो रहा है। कहीं कमीशन नहीं है। ऐसा कुछ रियल एस्टेट में क्यों नहीं हो सकता। सौरभ मेरठ का है और अमित गोंडा का।

हम तीनों ने नोब्रोकर के लिए सितंबर 2013 में कोडिंग शुरू की। मार्च 2014 में कंपनी लॉन्च की। मकसद था- मकान खरीदने, किराए पर लेने जैसे कामों में दलाली सिस्टम खत्म हो। बेंगलुरु में ऑफिस पर 50 ब्रोकर ने हमला बोला, क्योंकि उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा था। वहां की स्टार्ट अप कम्युनिटी ने हमें बहुत सपोर्ट किया। दूसरा ऑफिस लिया, वहां आज तक हमने अपनी कंपनी का बोर्ड नहीं लगवाया है। -जैसा काेटा के अखिल गुप्ता ने बताया।

आइडिया नेक्स्ट लेवल पर ले जाकर वन स्टॉप रियल एस्टेट शॉप बनाई
अखिल ने बताया बेंगलुरु, मुंबई के बाद हमने चेन्नई-पुणे में विस्तार किया। आइडिया को नेक्स्ट लेवल पर लेकर गए। मकान खरीदने या किराए पर देने के अलावा प्रॉपर्टी सर्विस से जुड़े दूसरे काम जैसे पैकर्स एंड मूवर्स, रेंटल एग्रीमेंट्स, रेंट पेमेंट, सोसायटीज में सर्विसेज देने जैसे काम इस प्लेटफॉर्म पर शुरू किए। यानी हमने वन स्टॉप रियल एस्टेट शॉप बना दी।

सरकारें स्टार्टअप को सपोर्ट करने से घबराएं नहीं
अखिल ने बताया कि फंडिंग के लिए कई वैंचर्स के पास गए, पर बात नहीं बनी। धीरे-धीरे यूजर्स बढ़े तो फरवरी 2015 में सैफ पार्टनर (एलिवेशन कैपिटल) ने हमें 18 करोड़ की फंडिंग की। सरकारें स्टार्ट अप को सपोर्ट करने में घबराएं नहीं। पॉलिसी को और अधिक सरल किया जाए। पुणे या बेंगलुरु जैसे आईटी हब हर राज्य में होने चाहिए, ताकि लोग लोकल ग्रो करें। पाठ्यक्रम बदले और कॉलेज स्तर पर प्रैक्टिकल नॉलेज और सीखने की फ्रीडम मिले।

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