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  • New Trenching Ground To Be Built In Amli Rojhdi, UIT Has Handed Over 11 Hectares Of Land, Municipal Corporation Will Also Set Up Units For Processing Waste Here

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पार्क का निर्माण:आंवली रोझड़ी में बनेगा नया ट्रेंचिंग ग्राउंड, यूआईटी ने सौंपी 11 हैक्टेयर जमीन, यहां कचरे की प्रोसेसिंग के लिए यूनिट भी लगाएगा नगर निगम

काेटा15 दिन पहले
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  • नांता के ट्रेंचिंग ग्राउंड पर अब पार्क बनाया जाएगा, रावतभाटा रोड पर नए ट्रेंचिंग ग्राउंड की जगह फाइनल

लंबे समय से चल रही नए ट्रेंचिंग ग्राउंड की तलाश अब पूरी हाे चुकी है। शहर का नया ट्रेंचिंग ग्राउंड आंवली रोझड़ी में बनाया जा रहा है। यूआईटी ने आंवली में 11 हैक्टेयर जमीन दक्षिण निगम काे हैंडअाेवर कर दी है। अब नगर निगम द्वारा उस पर बाउंड्रीवाॅल तैयार करने की कार्रवाई की जा रही है। यह ट्रेंचिंग ग्राउंड नांता स्थित माैजूदा ट्रेंचिंग ग्राउंड से कई मायनाें में अलग हाेगा। यहां पर कचरा डंप नहीं हाेगा, बल्कि यहां पर आने वाले कचरे काे राेज प्राेसेस किया जाएगा। इससे कचरे का पहाड़ नहीं बनेगा और कचरा खत्म हाेता रहेगा।

20 साल से पूरे शहर का कचरा नांता स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड पर ही जाता है। यहां कचरे की प्रोसेसिंग नहीं होती, जिससे कचरे के बड़े-बड़े पहाड़ बन गए और 8 लाख मीट्रिक टन कचरा जमा हाे गया। इस कचरे के समय-समय पर खत्म नहीं करने के कारण नांता ट्रेंचिंग ग्राउंड के आसपास की 3 किमी की जमीन, पानी और हवा जहरीली हाे चुकी है। दैनिक भास्कर ने इस मामले काे उठाया तो एनजीटी ने निगम काे इस ट्रेंचिंग ग्राउंड काे बदलने और यहां माैजूद कचरे काे खत्म करने के लिए सितंबर तक की माेहलत दी थी। उसके बाद हर माह 10 लाख रुपए की पेनल्टी लगाई जाएगी। अब जाकर आंवली में जमीन फाइनल हो गई है।

जनता और निगम काे ये हाेगा फायदा

  • कचरे की प्राेसेसिंग होने से जमीन और वायु प्रदूषित नहीं होगी।
  • कचरे की प्राेसेसिंग करने से राेजगार भी मिलेगा।
  • नांता के 3 किमी क्षेत्र में प्रदूषण में कमी आएगी।
  • नगर निगम काे कचरे से अतिरिक्त इनकम हाेगी।

इस तरह से हाेगी कचरे की प्राेसेसिंग
इस जमीन पर बाउंड्रीवाॅल तैयार करवाई जा रही है। इसके बाद इसके लिए डीपीआर बनवाई जाएगी। यहां कचरा प्राेसेसिंग यूनिट लगवाई जाएगी। इसके बाद यहां पर शहर के 150 वार्डाें से निकलने वाला कचरा सीधा ट्रेंचिंग ग्राउंड नहीं ले जाया जाएगा। उस कचरे काे पहले ट्रांसफर स्टेशन ले जाया जाएगा। वहां से कचरे का वर्गीकरण करके ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचाया जाएगा।

ट्रांसफर स्टेशन पर ही लोहा या काम की अन्य चीजें निकाल ली जाएंगी। ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरे की प्राेसेसिंग कर उसका अलग-अलग तरीके से उपयाेग किया जाएगा। बचने वाले कचरे से खाद बनाई जाएगी। ये कार्य लगातार चलता रहेगा, जिससे वहां कचरा इकट्‌ठा नहीं होगा। कचरा प्रोसेसिंग व वर्गीकरण से कई लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

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