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कोटा जेके लोन में 3.11% घटी बच्चों की डेथ रेट:6 माह में 1 भी नवजात रैफर नहीं, पहले 30-35 भेजते थे जयपुर, कभी नवजातों की मौत वाला अस्पताल बन गया था

कोटा12 दिन पहलेलेखक: आशीष जैन
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एनआईसीयू बने, वार्ड रिनाेवेट किए, वेंटिलेटर-वार्मर लगाए, स्टाफ बढ़ाया। - Dainik Bhaskar
एनआईसीयू बने, वार्ड रिनाेवेट किए, वेंटिलेटर-वार्मर लगाए, स्टाफ बढ़ाया।

काेटा के जेकेलाेन अस्पताल में अब बदलाव का असर नजर आने लगा है। जहां एक ओर सालभर में बच्चों की डेथ रेट में 3.11 प्रतिशत की गिरावट आई है वहीं बीते करीब 6 माह में साधन-संसाधनों की कमी की वजह से एक भी बच्चा जयपुर रैफर नहीं किया गया है।

2020 में जो डेथ रेट 6.87 थी वह घटकर 3.76 हो गई। इससे पहले हर साल करीब 30 से 35 बच्चों को आधिकारिक और करीब सैकड़ों बच्चों को संसाधनों का अभाव बताकर अनाधिकारिक रूप से जयपुर रैफर कर दिया जाता था। अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. गोपीकिशन के अनुसार जून से अब तक एक भी बच्चा जयपुर नहीं भेजा गया है।

भास्कर पड़ताल में सामने आया कि वर्ष 2019 में 34, 2020 में 29 और 2021 में जून तक दो बच्चे रैफर किए गए थे। भर्ती बच्चों को आंकड़ा भी 2020 के 13960 बच्चों के मुकाबले 2021 में 18854 हो गया। अब काेटा के नामी प्राइवेट हाॅस्पिटलाें से हर माह औसत 100 बच्चे यहां भर्ती हाे रहे हैं। आपकाे बता दें कि दाे साल तक यह अस्पताल नवजात बच्चाें की माैत काे लेकर खासा सुर्खियाें में रहा था। इसके बाद भास्कर ने इसकी बदहाली का मुद्दा लगातार उठाया, सरकार हरकत में आई और व्यापक बदलाव किए गए।

भर्ती का आंकड़ा बढ़ा, मौत का घटा : वर्ष 2020 में 13960 बच्चों के मुकाबले 2021 में 18854 बच्चे हुए भर्ती

जेकेलाेन में शिशु राेग विभाग की एचओडी डाॅ. अमृता मयंगर ने बताया कि हमने पिछले करीब 6 माह में किसी भी बच्चे काे जयपुर रैफर नहीं किया। पहले इसलिए रैफर हाेते थे, क्याेंकि वेंटीलेटर, वार्मर जैसे उपकरण कम थे।

हां, कुछेक बच्चे हमने एम्स जाेधपुर, पीजीआई चंडीगढ़ व एम्स दिल्ली जयपुर भेजे हैं, वह भी दुर्लभ बीमारियाें वाले केस थे। अब हमारे यहां काेटा समेत आसपास के जिलाें के प्राइवेट हाॅस्पिटलाें से राेजाना 3-4 बच्चे रैफर हाेकर आ रहे हैं।

पीआईसीयू बेड 147 हाे जाएंगे, एनआईसीयू बेड 200 हाे जाएंगे,अब बदल रहे हालात, 2020 में 6.87 % थी डेथ रेट, अब घट कर 3.76 % हुई
पीडियाट्रिक और गायनी का ओपीडी ब्लाॅक बन जाएगा {नया एंटीनेटल क्लीनिक, वैक्सीनेशन सेंटर, 12 नए कॉटेज रूम {नए रजिस्ट्रेशन काउंटर, हर फ्लोर पर पब्लिक टॉयलेट, परिजनों के बैठने की व्यस्था {आधुनिकतम सोनोग्राफी, मिल्क बैंक {नया इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर, पीडियाट्रिक आईसीयू {पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड आदि मिल जाएंगे।

  • दीगाेद निवासी कलावती ने 17 नवंबर काे निजी हाॅस्पिटल में बच्चे काे जन्म दिया। वजन 2 किलो 200 ग्राम था एवं रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम था। जेकेलोन रैफर किया गया। स्थिति में सुधार आने पर 15 दिसंबर काे डिस्चार्ज किया।
  • बूंदी की फाेरंता ने 6 सितंबर काे नए अस्पताल में बच्चे काे जन्म दिया। प्रीमेच्योर था और सांस में दिक्कत थी। जेकेलोन रैफर किया। 67 दिन लंबे इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया।
  • कड़ीहरा जाखाेड़ा निवासी रीना ने 21 नवंबर काे निजी हाॅस्पिटल जुड़वां बच्चाें काे जन्म दिया। एक बच्चा बहुत ज्यादा सिक था। जेके लोन रैफर किया गया। 16 दिन नॉन इनवेसिव वेंटीलेशन दिया गया। 28 दिन बाद बच्चा स्वस्थ है।
  • केशवपुरा निवासी बसंती ने निजी हाॅस्पिटल में 23 अक्टूबर काे बच्चे काे जन्म दिया। शिशु को सीवियर रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस व सीवियर हाइपोथर्मिया था। जेकेलाेन रैफर किया। 28 नवंबर को स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज किया।
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