पार्ट टाइम व्यवस्था:पढ़ाई-लिखाई सुधारने की पार्ट टाइम व्यवस्था, विभाग अब इंटर्नशिप करने वाले शिक्षकाें के भराेसे

काेटा2 महीने पहले
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शहर के एक गवर्नमेंट स्कूल में पढ़ाते इंटर्नशिप करने वाले शिक्षक और मॉनिटरिंग करते स्थायी शिक्षक। - Dainik Bhaskar
शहर के एक गवर्नमेंट स्कूल में पढ़ाते इंटर्नशिप करने वाले शिक्षक और मॉनिटरिंग करते स्थायी शिक्षक।
  • क्योंकि- 2500 इंटर्न को सौंपी जाएगी कमजोर बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी
  • वहीं- सालाना 720 करोड़ सैलरी उठाने वाले 8135 शिक्षक सिर्फ मॉनिटरिंग करेंगे

शिक्षा रैंकिंग में लगातार पीछे चल रहे जिले के स्कूलाें में बच्चाें की पढ़ाई-लिखाई सुधारने के लिए विभाग अब इंटर्नशिप करने वाले शिक्षकाें के भराेसे है। दरअसल बीएड या एसटीसी कर रहे स्टूडेंट्स काे सरकारी स्कूलाें में 24 दिन से 4 महीने तक की इंटर्नशिप करनी हाेती है। अब शिक्षा विभाग ने नवाचार के नाम पर इन्हीं पर स्टूडेंट्स की पढ़ाई का स्तर सुधारने की जिम्मेदारी डाल दी है। एक इंटर्न को 5 स्टूडेंट्स को पढ़ाना होगा। इसकी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी शिक्षकों की होगी। जिले के सरकारी स्कूलों में कुल 8135 शिक्षक हैं, जिनकी सैलरी पर सालाना लगभग 720 करोड़ खर्च होते हैं। प्राइमरी में 3082 और माध्यमिक में 5053 शिक्षक हैं।

अब शिक्षक ही इस योजना पर सवाल उठा रहे हैं। राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के जिला महामंत्री रास बिहारी यादव का कहना है कि शिक्षकों को पढ़ाने के अलावा अन्य कार्यों में उलझाकर रखा जाता है। यदि शिक्षकों को पूरी तरह से पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाए तो कोटा प्रदेश में टॉप-10 में आ सकता है। अगस्त की रैंकिंग में ही प्रदेश के 33 जिलों में कोटा 32वें नंबर पर था। पिछले एक साल से कोटा टॉप-10 में जगह नहीं बना पाया है।

इधर... स्कूल का रिजल्ट खराब होने पर शिक्षकों का इंक्रीमेंट रोकने से लेकर चार्जशीट देने की कार्रवाई करता है शिक्षा विभाग

शिक्षा विभाग की ओर से आए दिन अलग-अलग कार्य में ड्यूटी लगा देने से स्कूलों में शिक्षण कार्य प्रभावित होता है और इसका रिजल्ट पर भी गहरा असर होता है। बोर्ड परीक्षाओं में स्कूल और सब्जेक्ट के न्यूनतम रिजल्ट रहने पर प्रिंसिपल और संबंधित विषय के शिक्षक को शिक्षा विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस दिया जाता है। जवाब देने के लिए संबंधित शिक्षक को डीईओ, ज्वाइंट डायरेक्टर और डायरेक्टर के कार्यालय में खुद उपस्थित होकर जवाब देना पड़ता है। जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर इंक्रीमेंट रोकने से लेकर चार्जशीट देने की कार्रवाई होती है। इस प्रोसेस में कई शिक्षक अनावश्यक रूप से परेशान भी होते हैं। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अधिकतर शिक्षकों को साल में लगभग 5 से 6 माह अन्य कामों में बिताने पड़ते हैं।

एक इंटर्न को पांच स्टूडेंट्स को पढ़ाने की जिम्मेदारी

अतिरिक्त प्रभारी डीईओ माध्यमिक मुख्यालय केके शर्मा ने बताया कि उन्हाेंने स्कूलाें की विजिट कर स्ट्रेटजी बनाई है। इसके लिए इंटर्नशिप शिक्षकाें की रुचि के विषय संस्था प्रधानों को बताने होंगे। संस्था प्रधानों को ही बताना होगा कि इंटर्नशिप वाले शिक्षकाें की हाॅबी किस सब्जेक्ट काे पढ़ाने में है। इसके बाद पढ़ाई में कमजाेर बच्चाें का अलग से ग्रुप बनाया जाएगा। एक इंटरर्नशिप वाले शिक्षक काे पांच स्टूडेंट्स मिलेंगे, जिन्हें वाे पढ़ाएंगे। वहीं शिक्षक इनकी माॅनिटरिंग करेंगे।

2500 से अधिक इंटर्न, सर्वाधिक शहर में लगाए

शिक्षा विभाग की ओर से बीएड, डीएलएड, दाे और चार वर्षीय बीएड काेर्स में करीब 2500 से अधिक इंटर्नशिप वाले शिक्षकाें काे स्कूल अलाॅट कर दिए हैं। सेकंड और फाइनल ईयर वालों के लिए 4 महीने और फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स के लिए 24 दिन की इंटर्नशिप होती है। इनकी संबंधित संस्था प्रधान जिम्मेदारी लेगा। सबसे अधिक इंटर्न शहर में लगाए गए हैं। शहर के एक-एक स्कूल में 15 से 20 इंटर्नशिप शिक्षक हैं।

रेगुलर शिक्षकों के पास बीएलओ से लेकर ट्रेनिंग तक की जिम्मेदारी

जिले में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के पास पढ़ाने के अलावा कई तरह के काम की जिम्मेदारी है। राशन डीलर के पास सीडिंग वर्क यानी केवाईसी अपडेट, प्रतियोगी परीक्षाओं, पोषाहार वितरण, ऑनलाइन डेटा फीडिंग, बीएलओ, डाइट में ट्रेनिंग व ऑफिस के काम की भी जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है। इसके अलावा सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं या सर्वे में भी शिक्षकों की ही ड्यूटी लगाई जाती है।

बच्चाें की पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए स्ट्रेटजी बनाई है। एक इंटरर्नशिप शिक्षक काे पांच बच्चाें की जिम्मेदारी साैंपी है। इसमें बच्चाें के स्तर के अनुसार वर्क बुक भी बांटी जाएगी। स्कूलाें की रैकिंग सुधारने के लिए प्रयास कर रहे हैं। शिक्षक इसमें जुटे हैं। विभाग की ओर से इस बार रैंकिंग में काफी अच्छी स्थिति आएगी। अधिकारियाें की मीटिंग लेकर जल्द ही स्थिति काे सुधारा जाएगा।

-केके शर्मा, डीईओ प्रारंभिक एवं कार्यवाहक डीईओ माध्यमिक मुख्यालय

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