मंदिर जहां होती है ठाकुर जी के चरणों की पूजा:श्रीनाथ जी ने बितााए थे 4 महीने, खिड़की से होते हैं दर्शन

कोटा3 महीने पहले
मोतीपुरा में प्रदेश की प्रथम चरण चौकी है।

कोटा में भगवान श्रीकृष्ण का ऐसा मंदिर जहां सालों से भगवान श्रीनाथजी के बाल स्वरूप चरणों की पूजा होती है। यह मंदिर शहर से 18 किमी दूर डाढ़ देवी मार्ग पर करीब दो किमी दूरी पर स्थित मोतीपुरा गांव में देश की प्रमुख 6 चरण चौकियों में तीसरे नंबर की चरण चौकी है। ये कोटा की धरोहर है जो आधात्मिक चेतना का अनुभव कराती है। पुष्टिमार्गीय संप्रदाय पीठ की ओर से यहां सेवा पूजा होती है। यहां आठों पहर की सेवा पूजा नियमित होती है। अस्पर्शी सेवा यहां नित प्रधान सेवा के रूप में है।

कोटा में सालों से भगवान श्रीनाथजी के बाल स्वरूप चरण की पूजा होती है
कोटा में सालों से भगवान श्रीनाथजी के बाल स्वरूप चरण की पूजा होती है

4 महीने यहां बिताए
मंदिर समिति से जुड़े श्रीनाथ मित्तल ने बताया कि ये स्थान 550 वर्ष पुराना है। मुगलों के अत्याचार व मुगलों द्वारा मंदिरों को तोड़ने का अभियान शुरू किया गया था। तब मथुरा से ब्रज भूमि को छोड़कर ठाकुरजी राजस्थान मेवाड़ की धरती पर खमसेरा गांव उदयपुर नाथद्वारा पधार रहे थे। उस समय बरसात में एक चातुर्मास ठाकुर जी ने यहीं (मोतीपुरा) में किया था। 4 महीने ठाकुर जी यही ही विराजे। 4 महीने तक यहां उनकी सेवा पूजा का क्रम रहा। कोटा का यह इलाका तब घना जंगल था। जो सुरक्षा के लिहाज से उपयोगी था।

मोतीपुरा गांव में देश की प्रमुख 6 चरण चौकियों में तीसरे नंबर की चरण चौकी है।
मोतीपुरा गांव में देश की प्रमुख 6 चरण चौकियों में तीसरे नंबर की चरण चौकी है।

सेवक के कहने पर शिला पर पद चिन्ह अंकित किए
श्रीनाथ मित्तल ने बताया कि ठाकुर जी के यहां से जाने के बाद उनके निजी सेवक ने उनसे विनती व आग्रह किया। कहां कि यहां कोई आप ऐसा चिन्ह दें,ताकि यह भूमि आपके तपोवन से पवित्र रहे। उसके बाद ठाकुर जी ने यहां एक शिला पर अपने पद चिन्ह अंकित किए, जो सदियों से आज भी इस धरा पर मौजूद है। यहां की भूमि नंदमय रही है। इसलिए कोटा को नंद गांव भी कहते है। यहां सबसे अधिक भक्त गुजरात से आते हैं। लोगों की यहां अटूट आस्था है।

शहर से 18 किमी दूर डाढ़ देवी मार्ग पर करीब दो किमी दूरी पर स्थित मोतीपुरा गांव
शहर से 18 किमी दूर डाढ़ देवी मार्ग पर करीब दो किमी दूरी पर स्थित मोतीपुरा गांव

भक्त ,खिड़की में से करते दर्शन
मंदिर में भगवान की तस्वीर के ठीक नीचे चरण चौकी स्थापित है। अस्पर्शी सेवा होने के कारण अंदर किसी को प्रवेश नहीं है। मंदिर में आने वाले भक्त, साइड में लगी खिड़की से चरण चौकी की दर्शन करते है।

इस कुएं से साल भर पानी बहता है।
इस कुएं से साल भर पानी बहता है।

कुएं के पानी से होते है स्नान

मंदिर से कुछ कदमों की दूरी पर ही एक प्राकृतिक जल स्त्रोत (कुआं) है। इस कुएं से साल भर पानी बहता है। लेकिन, कभी खाली नहीं होता। कुएं के जल से ठाकुर जी को स्नान कराया जाता है। इस कुएं के पानी से स्नान करने पर चर्म रोग भी दूर होते है। लोग दूर दूर से कुएं का पानी लेने आते है।

लोगों की यहां अटूट आस्था है।
लोगों की यहां अटूट आस्था है।

प्रदेश की पहली चरण चौकी

श्रीनाथ मित्तल ने बताया मोतीपुरा में प्रदेश की प्रथम चरण चौकी है। मोतीपुरा के बाद किशनगढ़ ऊंचीगेल, चौपासनी (जोधपुर), श्रीनाथद्वारा कृष्ण भंडार में ठाकुर जी की चरण चौकी है। मोतीपुरा चरण चौकी, मंदिर मंडल नाथद्वारा टेंपल बोर्ड के नियंत्रण में है। कोटा के मूल वैष्णव परिवार, पुष्टिमार्गीय सम्प्रदाय पीठ मंदिर का संचालन करती हैं।