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सुपर पावर कोटा:अब तक मेडिकल और इंजीनियरिंग एंट्रेंस में 15 बार ऑल इंडिया रैंक-1 दी है हमने, कुल 4 लाख से ज्यादा सलेक्शन भी

कोटा12 दिन पहले
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इस बार के नीट रिजल्ट में टॉप 100 में कोटा के लगभग 30 स्टूडेंट्स शामिल हैं
  • इस वर्ष दिल्ली में सबसे अधिक 75.49% क्वालीफाई और सबसे कम नागालैंड में 40.50 प्रतिशत स्टूडेंट्स क्वालीफाई हुए हैैं
  • इस बार के नीट रिजल्ट में टॉप 100 में कोटा के लगभग 30 स्टूडेंट्स शामिल हैं। हालांकि वेबसाइट क्रैश होने से देर रात तक एनालिसिस नहीं हो सका

नीट के रिजल्ट में ऑल इंडिया टॉपर देने के साथ ही कोटा कोचिंग का दबदबा बढ़ गया है। पूरे देश में कोटा अकेला ऐसा शहर है जिसने इंजीनियरिंग और मेडिकल एंट्रेंस में अब तक सबसे ज्यादा 15 ऑल इंडिया टॉपर दिए हैं। 2000 से अब तक इंजीनियरिंग और मेडिकल एंट्रेंस में कोटा के 15 स्टूडेंट्स रैंक-1 हासिल कर चुके हैं।

आईआईटी के टॉपर : 2000 में नितिन गुप्ता आईआईटी एंट्रेंस में अव्वल रहे। इसके बाद डूंगरराम चाैधरी ने 2002, अचिन बंसल ने 2007, शितिकांत ने 2008 में आईआईटी एंट्रेंस में ऑल इंडिया टाॅप किया। 2014 में चित्रांग मुर्दिया ने इंजीनियरिंग एंट्रेंस आईआईटी जेईई में टॉप किया। सतवत जगवानी 2015 के इंजीनियरिंग एंट्रेंस में अव्वल रहे। 2016 में अमन बंसल को नंबर वन रैंक मिली। 2019 में कार्तिकेय गुप्ता ने इंजीनियरिंग एंट्रेंस में टॉप रैंक हासिल की।

मेडिकल एंट्रेंस : 2010 में लोकेश अग्रवाल ने एआईपीएमटी में पहली रैंक हासिल की। इसके बाद 2013 में आयुष गोयल ने मेडिकल एंट्रेंस में ऑल इंडिया टॉप किया। अगले साल तेजस्विन झा ने इस एंट्रेंस एग्जाम में टॉप किया। 2016 में हेत संजय शाह ने ऑल इंडिया टॉप किया। 2017 में निशिता पुरोहित ने एम्स एंट्रेंस में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की। वहीं 2019 में नलिन खंडेलवाल ने नीट में टॉप रैंक हासिल की। इस बार शोएब ने नीट में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की है। ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाला कोटा देश में अकेला शहर है। वहीं इस बार के नीट रिजल्ट में टॉप 100 में कोटा के लगभग 30 स्टूडेंट्स शामिल हैं। हालांकि वेबसाइट क्रैश होने से देर रात तक एनालिसिस नहीं हो सका।

काेविड पाॅजिटिव होने के बावजूद कोमल सालूजा की 51वीं रैंक

तलवंडी निवासी नेशनल खिलाड़ी काेमल सालूजा ने ऑल इंडिया जनरल कैटेगरी में 51 वीं रैंक हासिल की हैं। काेमल ने बताया कि शुरू से ही जीवन विज्ञान विषय काे महत्व दिया है। दिनचर्या में नियमित अध्ययन एवं खेल का संतुलन बनाए रखा है। महामारी में भी पढ़ाई रेगुलर जारी रखी है। वाे आगे चलकर कार्डियाेलाॅजिस्ट बनकर समाज की सेवा करना चाहती हूं। वे डाॅ. मनाेज सलूजा की बेटी हैं।

ज्यादा टेस्ट दिए, अपने एनालिसिस पर भी ध्यान देता था : मानित

राजकोट निवासी एवं एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के क्लासरूम स्टूडेंट मानित मात्रवड़िया ने नीट में ऑल इंडिया रैंक 10 प्राप्त की है। मानित ने बताया कि पिछले दो सालों से एलन में पढ़ाई कर रहा हूं। यहां का माहौल बहुत अच्छा है, फैकल्टीज का सपोर्ट मेरे लिए महत्वपूर्ण रहा। मैंने नीट में सक्सेस के लिए ज्यादा से ज्यादा टेस्ट दिए और मैं अपने टेस्ट का एनालिसिस खुद करता था, जितने घंटे का टेस्ट होता था, उससे ज्यादा समय मुझे उसके एनालिसिस में लग जाते थे। मैंने 10वीं कक्षा में 97.6 प्रतिशत एवं 12वीं कक्षा 98.6 प्रतिशत अंकों से पास की थी। इसके अलावा केवीपीवाय 12वीं में ऑल इंडिया 21वीं रैंक प्राप्त कर चुका हूं।

मानित ने बताया कि प्लानिंग के साथ पढ़ाई करता हूं, जो भी डाउट्स सामने आते थे, उन्हें उसी समय फैकल्टीज से क्लीयर करता था। डेली होमवर्क करता था। कुछ भी टॉपिक या डाउट्स आलस्य में कल पर नहीं छोड़ता था, क्योंकि एक बार आपने ऐसा कर लिया तो आप सिलेबस में पिछड़ते चले जाते हैं। अब एम्स दिल्ली से एमबीबीएस करना चाहता हूं। एमबीबीएस के बाद स्पेशलिटी के बारे में अभी नहीं सोचा है। पिता चिराग मात्रवड़िया एवं मां आशा मात्रवड़िया, दोनों डॉक्टर हैं।

रिकॉल : 2017 में जेईई मेन में कल्पित को मिले थे 360 में से 360 अंक

इससे पहले इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी परीक्षा जेईई मेन में भी उदयपुर के कल्पित वीरवाल ने 100 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। उन्हें 360 में से 360 अंक मिले थे। किसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में 100 प्रतिशत अंक हासिल करने की उपलब्धि पहली बार कल्पित ने ही हासिल की थी। ये उपलब्धि इसलिए भी बड़ी है क्योंकि जेईई मेन में माइनस मार्किंग होती है। अब शोएब किसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में ऐसी सफलता हासिल करने वाले दूसरे स्टूडेंट हैं। हालांकि नीट परीक्षा में पहली बार किसी स्टूडेंट के 100 प्रतिशत अंक आए हैं।
एनालिसिस : मार्किंग पैटर्न एक रहने से बढ़ रहे टाॅपर्स के नंबर

नीट 2016 में शुरू हुई थी। उससे पहले ऑल इंडिया लेवल पर एआईपीएमटी था। वहीं राज्याें के लिए भी अलग एग्जाम हाेता था। नीट लागू हाेने के बाद हर साल टाॅपर्स के नंबर बढ़ते जा रहे हैं। 2016 में टाॅपर हेत शाह के 685 अंक थे, वहीं इस साल शाेएब के 720 में से 720 अंक आए। विशेषज्ञाें का कहना है कि नीट का पेपर और मार्किंग समान रहता है। इसमें ज्यादा बदलाव नहीं होने से टाॅपर्स के अंक बढ़ते जा रहे हैं। वहीं एडवांस्ड का पेपर पैटर्न और मार्किंग स्कीम हर साल बदल जाता है। इस वजह से एडवांस्ड का पेपर सबसे कठिन माना जाता है।

राजस्थान से 68 प्रतिशत क्वालीफाई

इस वर्ष दिल्ली में सबसे अधिक 75.49% क्वालीफाई और सबसे कम नागालैंड में 40.50 प्रतिशत स्टूडेंट्स क्वालीफाई हुए हैैं। पिछले साल दिल्ली से सबसे अधिक 74.92 प्रतिशत स्टूृडेंट्स क्वालीफाई हुए थे। राजस्थान नीट में क्वालीफाई करने वाले स्टूडेंट्स की संख्या के आधार पर पांचवें नंबर पर रहा था।

राज्यों में चौथे नंबर पर रहा राजस्थान

राज्य वर्ष 2020 2019 2018 दिल्ली 75.49 74.92 73.73 हरियाणा 72.90 73.41 72.59 आंध्रप्रदेश 58.63 70.72 72.55 राजस्थान 68.68 69.66 74.30 नागालैंड 40.50 34.52 29.34

पहली बार : तीसरी, चाैथी और पांचवीं रैंक पर भी समान अंक

इस बार टाॅप 2 स्टूडेंट्स के समान अंक हाेने के साथ ही तीसरी, चाैथी और पांचवीं रैंक भी टाईब्रेकर के आधार पर तय हुई है। ऐसा संभवत: पहली बार है जब किसी एग्जाम में टाॅप-5 रैंक टाईब्रेकर के नियम से तय हुई। तुम्माला स्निकिथा 715 अंकाें के साथ तीसरी रैंक पर रहीं, वहीं चाैथे नंबर पर रहे विनीत शर्मा और 5वीं रैंक हासिल करने वाली अमरीशा खेतान के भी इतने ही अंक रहे। इस बार एक और खास बात ये रही कि टाॅप-5 रैंक पर आने वाले स्टूडेंट्स के नंबर पिछले साल के नीट टाॅपर नलिन खंडेलवाल से काफी ज्यादा रहे। नलिन ने 701 अंक के साथ ऑल इंडिया में पहली रैंक हासिल की थी।

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