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लापरवाही:केवल कागजों में ही ओडीएफ घोषित कर भ्रमित कर रहा निगम, अभी शौचालय तक पूरे नहीं बने हैं

कोटा4 दिन पहले
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  • दोनों नगर निगमों का दावा : ओडीएफ प्लस श्रेणी के मापदंड पूरे कर लिए हैं
  • हकीकत : उपमहापौर मीणा के वार्ड में 80% लोग खुले में कर रहे हैं शौच

उत्तर और दक्षिण दाेनाें ही नगर निगम द्वारा हाल ही में ओडीएफ प्लस के लिए शहर काे पूरी तरह से तैयार करने कर घाेषणा की है। दाेनाें का दावा है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत हाेने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण के दाैरान काेटा काे ओडीएफ प्लस घाेषित करवाने के लिए पर्याप्त टाॅयलेट बनवा दिए गए हैं, अब काेई भी व्यक्ति खुले में शाैच नहीं जाता है। दैनिक भास्कर ने जब दोनों नगर निगमों के इस दावे की हकीकत जानी ताे पता चला कि दाेनाें ही नगर निगम ने 131 सामुदायिक टाॅयलेट के दम पर ओडीएफ घाेषित किया जा रहा है। खुद दक्षिण निगम के उपमहापाैर पवन मीणा के वार्ड के ग्रामीण क्षेत्र में 80 प्रतिशत लाेग खुले में शाैच जाते हैं।

वन भूमि और ग्रामीण इलाकाें में नहीं बने टाॅयलेट, सामुदायिक शौचालयों में लगे हैं ताले
स्वच्छ भारत मिशन में शहराें काे खुले में शाैच से मुक्त करने का टास्क पिछले 4 साल से चल रहा है। नगर निगम ने इसके लिए घर-घर सर्वे किया और 18 हजार से अधिक ऐसे मकान चिन्हित किए, जहां टाॅयलेट नहीं थे। निगम ने उन मकानाें में टायलेट बनवाना शुरू किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में दुबारा सर्वे करवाया और उसमें से 12 हजार टाॅयलेट बनाने का लक्ष्य रखा बाद में 9 हजार टाॅयलेट बनाए गए। जिसका कारण था कि वन भूमि पर बसे गांवाें व बस्तियाें पर टाॅयलेट बनाने पर वन विभाग ने आपत्ति लगा दी।

बाद में निगम ने इसका रास्ता निकाला और सामुदायिक टाॅयलेट बनाकर गिनती पूरी कर दी। जबकि, खुद उपमहापाैर पवन मीणा ने पिछले दिनाें ही आयुक्त कीर्ति राठाैड़ के सामने आपत्ति दर्ज करवाई थी कि अभी भी नयागांव, रथकांकरा, धर्मपुरा, बंधा आदि गांवाें में 80 प्रतिशत लाेग खुले में शाैच जा रहे हैं। वहां केवल सक्षम लाेगाें के यहां ही टाॅयलेट है बाकी के यहां नहीं है। वहीं बरड़ा बस्ती में भी यही हाल है। वहां बनाए गए सामुदायिक टाॅयलेट के आज तक ताले भी नहीं खुले। वे बंद स्थिति में ही जर्जर हाे गए। उसके बाद भी निगम ने कागजाें में ओडीएफ प्लस के लिए खुद काे पूरी तरह तैयार हाेने का दावा कर आवेदन कर दिया।

131 सामुदायिक शौचालयों के दम पर ओडीएफ घोषित, नालों की सफाई नहीं
कागजाें में ताे प्रति मकान के हिसाब से टाॅयलेट बता दिया, लेकिन में शामिल ग्रामीण क्षेत्राें में अभी भी स्थिति बहुत खराब है। यही नहीं उत्तर निगम क्षेत्र में खुले में शाैच के साथ-साथ सबसे बड़ी समस्या खुले में गंदगी बहने की है। यहां दिनभर नालियां शाैच से भरी रहती है जाे प्रदूषण फैलाने के साथ-साथ बीमारियाें काे भी न्याैता दे रही है। इस तरफ ताे नगर निगम ने आज तक ध्यान ही नहीं दिया। दोनों नगर निगम ने 131 सामुदायिक टाॅयलेट के दम पर ओडीएफ घाेषित किया जा रहा है।

परकाेटे में बसे 50% घराें में सीवरेज चैंबर नहीं, अधिकारियों को जानकारी तक नहीं
उत्तर नगर निगम क्षेत्र में नदी किनारे परकाेटे में बसे 50 प्रतिशत घराें में सीवरेज चैंबर नहीं है। कैथूनीपाेल से लेकर सरायकायस्थान, राधाविलास, पाटनपाेल, टिपटा, श्रीपुरा, घंटाघर, भट्टजी घाट, हिरणबाजार, इंद्रा मार्केट, बृजराजपुरा, पुराना सर्राफा, मकबरा, रामपुरा, लाड़पुरा, करबला, दाेस्तपुरा, नेहरूनगर और पटरीपार लाेगाें के घराें में टाॅयलेट ताे हैं, लेकिन अधिकांश के यहां सीवरेज टैंक नहीं है। यहां पर शुरू से ही सीवरेज टैंक बनाने का सिस्टम ही नहीं है। न ही यहां सीवरेज सिस्टम डवलप किया गया। इसकी जानकारी अिधकारियों तक नहीं है।

अधिकारियों ने निरीक्षण नहीं किया, पार्षदों ने भी कभी नहीं उठाया मुद्दा
उत्तर नगर निगम क्षेत्र में नदी किनारे परकाेटे के इलाकाें में शाैच नालियाें में बहता रहात है। क्याेंकि कभी भी निगम के अधिकारियाें ने इन गलियाें का सुबह और शाम को पैदल निरीक्षण ही नहीं किया। सेनेटरी इंस्पेक्टर और जमादार कभी हकीकत अधिकारियाें काे बताते नहीं है। पार्षद कभी इस मामले में इसलिए नहीं बाेलते हैं कि जनता सीवरेज टैंक बनाना नहीं चाहती है और वाे जनता काे नाराज नहीं करना चाहते हैं। यहां नालों में गंदगी बहती रहती है।

दक्षिण निगम काे ओडीएफ प्लस के लिए हमने हमारी तरफ से पूरी तैयारी कर ली है। जाे ग्रामीण इलाके छूट गए थे, उन्हें सामुदायिक टाॅयलेट से जाेड़ दिया गया है। जाे टाॅयलेट चालू नहीं है, उन्हें भी रिपेयर करवाकर चालू करवाया जा रहा है।
-कीर्ति राठाैड़, आयुक्त दक्षिण नगर निगम

उत्तर निगम क्षेत्र में लाेगाें के यहां सीवरेज टैंक नहीं है, इसकी जानकारी हमें किसी ने नहीं दी। इसकाें चेक करवाया जाएगा। खुले में शाैच बहने की स्थिति काे राेकने के लिए क्या किया जा सकता है, इस पर प्लान बनाया जाएगा। बाकी के इलाकाें में सीवरेज लाइन डालने का काम चल रहा है। - वासुदेव मालावत आयुक्त उत्तर नगर निगम

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