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  • The Country's Tallest 203 Feet Marble Statue Will Be In The River Front, The World's Largest Bell, Water Park And 26 Ghats Will Also Be Built.

भास्कर एक्सक्लूसिव:रिवर फ्रंट में होगी देश की सबसे ऊंची 203 फीट की मार्बल प्रतिमा, दुनिया की सबसे बड़ी घंटी, वाटर पार्क व 26 घाट भी बनाए जाएंगे

कोटाएक महीने पहलेलेखक: शैलेंद्र माथुर
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कोटा में चंबल नदी की डाउन स्ट्रीम में बन रहा रिवर फ्रंट। - Dainik Bhaskar
कोटा में चंबल नदी की डाउन स्ट्रीम में बन रहा रिवर फ्रंट।
  • कोटा में 700 करोड़ रुपए के बजट से बन रहा प्रदेश का पहला रिवर फ्रंट, अगले साल नवंबर तक पूरा होगा निर्माण

कोटा में चंबल नदी की डाउन स्ट्रीम में बन रहा रिवर फ्रंट कई मायनों में अन्य पर्यटन स्थलों में अनूठा होगा। यहां पर बनाई जाने वाली चंबल माता की प्रतिमा, क्लॉक टावर देश-दुनिया में सबसे बड़े होंगे।

इसी तरह की कई कलाकृतियां है जो अपने आप में पहली और नायाब होंगी। यह एक आकर्षक टूरिस्ट पाइंट ही नहीं बनेगा, बल्कि इससे आसपास के इलाकों में आने वाली बाढ़ भी कंट्रोल होगी। पिछले कई दशकों से चम्बल नदी में गिरने वाले गंदे नालों को टैप करने से प्रदूषण नियंत्रण भी हो सकेगा।

इसमें राजस्थान की कला, संस्कृति एवं हाड़ौती का समृद्ध वास्तुशिल्प देखने को मिलेगा। यहां बनने वाली चंबल माता की मूर्ति वियतनाम मार्बल से बनाई जाएगी। पेडस्टल समेत इसकी ऊंचाई करीब 203 फीट होगी। यहां बनाई जाने वाली घंटी दुनिया में सबसे बड़ी होगी, जिसका साइज 8.5 गुणा 6.6 मीटर रहेगा।

यहां हाड़ौती के वास्तुशिल्प की झलक भी दिखेगी। इसके अलावा बच्चों के लिए बाल घाट भी रहेगा। करीब 700 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहे इस रिवर फ्रंट के नवंबर 2022 तक तैयार होने की संभावना है। भास्कर में पढ़िए चंबल के दोनों किनारों पर 2.75 किमी लंबाई में बन रहे रिवर फ्रंट की वाे खूबियां जिसके कारण यह अपनी अलग छवि बना पाएगा।

40 मीटर व्यास के फाउंटेन, गार्डन और किताब के आकार में 5 मंजिला पुस्तकालय से रिवर फ्रंट की बनेगी अलग पहचान

वर्ल्ड क्लास फाउंटेन: बैराज के नजदीक चम्बल माता उद्यान में एक वर्ल्ड क्लास फाउण्टेन शो का निर्माण किया जा रहा है। जिसका व्यास 40 मीटर के करीब है। इसी उद्यान का निर्माण मैसूर के वृंदावन गार्डन की तर्ज पर आधुनिक तकनीक के साथ किया जा रहा है। पूर्वी छोर पर इस बाग में एक संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है। जहां कोटा के विकास और कला एवं संस्कृति का पर्यटकों के लिए प्रदर्शन किया जाएगा।

विश्व की सबसे बड़ी घंटी, लोग बजा सकेंगे: पूर्वी छोर पर ही एक घंटाघर घाट पर विश्व की सबसे बड़ी घंटी लगाई जा रही है। यह घंटी 9.5 मीटर व्यास की होगी और साथ में एक घंटाघर का निर्माण किया जा रहा है। इसी घाट पर एक सौर घड़ी का निर्माण भी किया जा रहा है। वर्तमान में विश्व की सबसे बड़ी घंटी चीन की 8.2 गुणा 6.5 मीटर की है व मॉस्को की घंटी 8 गुणा 6.6 मीटर की है। कोटा की घंटी विश्व की सबसे बड़ी घंटी होगी, जिसका नाप 8.5 गुणा 6.6 मीटर रखा गया है।

देश की सबसे ऊंची मार्बल की मूर्ति लगेगी: चंबल रिवर फ्रंट का प्रमुख आकर्षण होगा यहां लगने वाली 42 मीटर ऊंची चंबल माता की मूर्ति। यह मूर्ति 20 मीटर के पेडेस्टल पर लगाई जाएगी, जिसका वजन 3 हजार टन होगा। वियतनाम मार्बल से बन रही यह मूर्ति भारत में लगी संगमरमर की मूर्तियों में से सबसे ऊंची होगी। पेडेस्टल सहित इसकी ऊंचाई 203 फीट होगी।

बाड़ौली का वास्तुशिल्प दिखाई देगा: कोटा के पास स्थित बाड़ाैली के वास्तुशिल्प के अनुसार एक ग्रैण्ड आर्च का निर्माण किया जा रहा है। जिससे हाड़ाैती के वास्तुशिल्प को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया जा सके। इसी घाट से चम्बल नदी में आधुनिक तकनीक से बनी कोटा के वास्तुशिल्प की विरासत के ऊपर निर्मित नावों को चलाया जाएगा। यहां से नदी में घाट दर्शन की नावों का भी संचालन किया जाएगा।

बालघाट (लगून): रिवर फ्रन्ट पर बच्चों के खेलने के लिए झूले व उनके खेलने के लिए बालघाट पर निर्माण किया जा रहा है। यहां एक हवेली और वाटर पार्क का निर्माण किया जा रहा है। इस घाट की लम्बाई 80 मीटर है। यहां पर विश्वस्तरीय लीनियर फाउण्टेन शो भी हाेगा। जिसके चारों तरफ बैठ कर लगून में बच्चे व पर्यटक इसका आनंद ले सकें।

पुस्तक के रूप में बनेगा 5 मंजिला पुस्तकालय : यहां पर 60 मीटर लंबाई में साहित्य घाट बनेगा। जिसकी डिजाइन एक पुस्तक के रूप में बनाई गई है। 5 मंजिला हवेली को पुस्तकालय के रूप में बनाया जा रहा है। जिसमें साहित्यिक रचनाओं को पढ़ा जा सकेगा। साहित्य घाट पर पुस्तक में बनी सीढ़ियों में तुलसीदास जी, सूरदास जी, कालीदास जी, कबीर, मुंशी प्रेमचन्द, महादेवी वर्मा की सैंड प्रतिकृति दिखाई देगी।

कोटा डोरिया को भी मिलेगा प्रमोशन: यहां पर 300 मीटर लंबे सिंह घाट पर एक बड़ा प्लाजा बनाया जा रहा है। जिसमें कोटा के हस्तशिल्प, कोटा डोरिया तथा हाड़ौती के लोकल प्रोडक्स की शॉप्स का निर्माण किया जा रहा है। इस घाट पर शेरों की 9 मूर्तियां लगाई जा रही हैं।

फाैव्वारा चौक में लोग कर सकेंगे अपने कार्यक्रम: 60 मीटर लंबाई में हाड़ाैती और मेवाड़ के शिल्प पर आधारित फाैव्वारा चौक बनेगा। इसमें सहेलियों की बाड़ी की छतरियों की तर्ज पर फाैव्वारे बनेंगे। इस चौक में कोटावासी नदी किनारे अपने सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रम कर सकेंगे।

नयापुरा की तरफ बनेगा गार्डन: नयापुरा की तरफ भी एक गार्डन बनाया जा रहा है। नयापुरा की तरफ से ये एंट्री पॉइंट होगा। यहां पर एक विशाल बावड़ी का निर्माण किया जा रहा है, जिससे पानी का संग्रहण किया जा सकेगा और इस गार्डन के निर्माण से नयापुरा में आने वाली बाढ़ का भी कंट्रोल हो सकेगा।

परिवार का महत्व समझाएगा घाट: यहां पर भारतीय संस्कृति के परिवारों में हमारे बुजुर्गों के महत्व को दिखाते हुए एक घाट का निर्माण किया जा रहा है। इसके पीछे होटल का प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। यह जगह भारतीय पारिवारिक संस्कृति की प्रेरणा का प्रतिबिम्ब बनेगी।

फिजिकली चैलेंज्ड व सीनियर सिटीजन भी पहुंच सकेंगे हर घाट पर: रिवर फ्रंट में पर्यटकों के लिए सभी सुविधाओं का निर्माण भी किया जा रहा है। सीनियर सिटीजन व फिजिकली चैलेंज्ड पर्यटकों के लिए रैम्प भी बनाये जा रहे हैं।

नदी का बहाव क्षेत्र बढ़ेगा, बाढ़ रुकेगी: 2.75 किमी लम्बाई में पूर्वी छोर पर 14 और पश्चिमी छोर पर 12 घाटों का निर्माण किया जा रहा है । इससे नदी काे बहाव क्षेत्र बढ़ेगा, जिससे रिहायशी इलाकों में आने वाली बाढ़ पर कंट्रोल किया जा सकेगा।

चंबल शुद्धिकरण का काम भी हाेगा: चंबल में गिरने वाले 14 प्रमुख नालाें का पानी एक पाइप लाइन से सीधे एसटीपी से कनेक्ट हाेगा। यहां राेजाना गिरने वाले 40 एमएलडी पानी का ट्रीटमेंट किया जा सकेगा। इससे चंबल नदी में होने वाले प्रदूषण पर रोक लगेगी। इसके साथ ही चंबल के किनारे की साफ-सफाई व वहां हाे रहे अतिक्रमण हटाकर इसके स्वच्छ पानी के बहाव क्षेत्र का भी विकास किया जा रहा है। इससे बाढ़ से राहत मिलेगी।

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