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जबलपुर और भोपाल में चलने लगी मेमू ट्रेन:हाड़ौती के लोगों का सपना अब भी अधूरा, रेलवे बोर्ड की स्वीकृति के 4 माह बाद भी कोटा-बीना

कोटा4 महीने पहले
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शामगढ़-झालावाड़ के बीच नहीं चली मेमू। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
शामगढ़-झालावाड़ के बीच नहीं चली मेमू। (फाइल फोटो)

पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर और भोपाल मंडल में मेमू ट्रेन चलने लगी है। इससे दोनों मंडलों से जुड़े मध्य प्रदेश क्षेत्र के रेलवे स्टेशनों के शहरी क्षेत्र व ग्रामीणों को ट्रेन की सुविधा मिलने लगेगी, लेकिन इसी जोन का एक मंडल कोटा जो राजस्थान से जुड़ा है। उसमें रेलवे बोर्ड से 3 मेमो ट्रेन की स्वीकृति के 4 महीने बाद भी कोटा-शामगढ़, कोटा-बीना, कोटा-झालावाड़ के लिए मेमू ट्रेन शुरू नहीं हो सकी है।

इन ट्रेनों का 8 अप्रैल से संचालन प्रस्तावित था। पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर मंडल के अंतर्गत तीन नई मेमू ट्रेन सतना-इटारसी, सतना-मानिकपुर तथा कटनी-बीना को 13 अगस्त को हरी झंडी दिखा दी गई। इससे पूर्व भोपाल रेल मंडल में भी मेमो ट्रेन चल चुकी हैं।

लेकिन कोटा रेल मंडल मैं रेलवे बोर्ड से स्वीकृति के 4 माह बाद भी मेमू ट्रेन नहीं चल सकी है। कोटा रेल मंडल में तीन मेमो ट्रेन चलाने के लिए एक रैक पिछले दिनों एक रैक भेजा गया था जो रखरखाव के नाम पर वापस भोपाल भेज दिया गया। रैक अभी तक वापस नहीं लौटा है।

कोटा रेल मंडल में मेमू चले तो इनको मिले लाभ

कोटा-बीना-कोटा के बीच मेमू ट्रेन का संचालन होने से सोगरिया स्टेशन, चंद्रेसल, दीगोद, श्रीकल्याणपुरा, भौंरा, अंता, बिजोरा, सुंदलक, बारां, छजावा, पीपलोद रोड, अटरू और सालपुरा सहित मार्ग में करीब 34 स्टेशनों वह आस-पास के गांव के लोगों को लाभ मिलेगा। ऐसे में कोटा से बारां जिले और मध्यप्रदेश जाने वाले लोगों को आसानी होगी।

कोटा शामगढ़ मेमू का इनको मिलेगा लाभ

कोटा-शामगढ़-कोटा के बीच मेमू चलने से डकनिया तलाब, डाढ़देवी, अलनिया, रांवठा रोड, दरा, कंवलपुरा, मोडक, रामगंजमंडी, धुआंखेड़ी, भवानीमंडी, कुलारसी और गरोठ स्टेशन के यात्रियों को लाभ मिलेगा।

कोटा-झालावाड़ मेमू चलने से इनको होगा फायदा

कोटा-झालावाड़ सिटी के बीच भी मेमू ट्रेन का संचालन होने से डकनिया तलाब, डाढ़देवी, अलनिया, रांवठारोड, दरा, कंवलपुरा, मोडक, रामगंजमंडी स्टेशन वह आस-पास के गांव के लोगों को लाभ मिलेगा।

अब नए सब स्टेशन के जरिए मिलेगी बिजली, एलएचबी के एक रैक के रखरखाव में 9600 रुपए की होगी बचत

ग्रीन ऊर्जा के क्षेत्र में कोटा मंडल ने एक और नई पहल की है। रैकों के अनुरक्षण के लिए बिजली की आपूर्ति के लिए विद्युत सब स्टेशन का निर्माण कराया गया है। इससे अब कोटा जंक्शन पिट लाईन पर अत्याधुनिक तकनीक के एलएचबी टाइप के रैकों के अनुरक्षण कार्य के लिए 750 वोल्ट की बिजली मिलती रहेगी तथा ईंधन के तौर पर अब डीज़ल आईल के उपयोग से निजात मिल गई है । इससे रैक अनुरक्षण कार्य के दौरान वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण भी खत्म हो गया है ।

पेट्रोलियम ईंधन की बचत हो रही है, प्रदूषण से भी निजात मिली

सीनियर डीसीएम अजय कुमार पाल ने बताया कि कोटा में रैकों के प्राथमिक अनुरक्षण के दौरान पावर कार में उपलब्ध डीजी सेट चलाकर कोचों का मेंटेनेंस कार्य किया जाता था, इसमें 40 लीटर प्रति घंटे के हिसाब से डीजल ऑयल की खपत होती थी। कोचों के अनुरक्षण के लिए 750 वोल्ट बिजली सप्लाई की आवश्यकता को देखते हुए अब मंडल के कोचिंग डिपो में गोल्डन जुबली पिट लाइन पर 750 वोल्ट सप्लाई देने के उद्देश्य से बिजली सब स्टेशन का निर्माण कराया गया है।

अब रैक के अनुरक्षण के दौरान इस नवनिर्मित बिजली सब स्टेशन के माध्यम से जरूरी सप्लाई मिलती रहेगी और अनुरक्षण कार्य सुगमता से किया जा सकेगा। इस सिस्टम के उपयोग करने से रैकों के अनुरक्षण के दौरान पेट्रोलियम ईंधन की बचत हो रही है साथ ही ध्वनि प्रदूषण एवं वायु प्रदूषण से भी निजात मिल गई है।

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