विश्व डाक दिवस कल:शहर का सबसे पुराना डाकघर रामपुरा बाजार है 90 साल का

काेटा17 दिन पहले
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भारतीय डाक टिकट। - Dainik Bhaskar
भारतीय डाक टिकट।
  • शहर के लाेग रामपुरा डाकघर में ही डाक सामग्री खरीदने पहुंचते थे, आज भी खरीदते हैं

काेटा शहर में 1931 यानि कि 90 साल पुराना भारतीय डाकघर रामपुरा बाजार में आज भी संचालित है। इस डाकघर के दरवाजे मुख्य सड़क की ओर से हुआ करते थे। शहर के लाेग इस डाकघर में ही डाक सामग्रियाें काे खरीदने पहुंचते थे। आज भी लाेग इसी डाकघर से डाक सामग्री खरीदते हैं। यह डाकघर सुबह 10 बजे खुलता है। इस डाकघर में शाम 7 बजे तक काम चलता है।

शहर के बुजुर्ग लाेग बताते हैं कि ब्रिटिश शासन के साथ- साथ काेटा शहर में रियासत काल में डाक व्यवस्था चलती थी। रामपुरा बाजार में सर्वप्रथम डाकघर स्थापित किया गया था। आजादी के पूर्व समय का डाकघर है। इसके अलावा कुछ समय तक झाला हाऊस में भी डाकघर रखा गया।

लेकिन मुख्यालय रामपुरा डाकघर ही था। जहां डाकघर वितरित की जाती थी। यही से ही पूरे शहर में डाक पत्राें का वितरण किया जाता था। इस डाकघर से ही देश विदेश में डाक पत्राें का वितरण किया जाता था। आज भी यह डाकघर रामपुरा में ही बेधड़क चला आ रहा है।

शहर के वकील पाेस्ट कार्ड व अंतरदेशीय पत्र पर ही लिखते थे कानूनी नाेटिस

पाटनपाेल निवासी वरिष्ठ एडवाेकेट 80 वर्षीय रूपनारायण पारीक ने बताया कि पाेस्टकार्ड पर आजादी से पूर्व से लेकर आजादी के समय बाद तक इंग्लेंड के महाराजा जार्च पंचम और अन्य महारानी की फाेटाे हुआ करती थी। इसी डाकघर में तारघर की सुविधा व टेलीफाेन की सुविधा उपलब्ध थी।

मैंने कई कानूनी नाेटिस पाेस्टकार्ड एवं अंतरदेशीय पत्र पर ही लिखे हैं। उस समय टाइपिंग की व्यवस्था भी बहुत कम थी। पाेस्ट कार्ड व अंतरदेशीय पत्र व्यापारिक एवं पारिवारिकजनाें के हाल-चाल के लिए सगे संबंधियाें काे भेजने के लिए उपयाेग में करते थे।

काेलकाता में बनाया था प्रधान डाकघर:

बंगाल के गवर्नर वाॅरेन हेस्टिंग ने 1774 में काेलकाता में एक प्रधान डाकघर बनाया था। अंग्रेजाें ने इस सेवा की शुरूआत अपने सामरिक और व्यापारिक हिताें के लिए की थी। मगर यह देश की आजादी के बाद भारतीयाें के लिए सुख दुख की साथी बन गई। अंग्रेजी हुकूमत ने 1854 में ही भारत में रेल डाक सेवा की शुरूआत की थी। भारत में रेल डाक सेवा आज भी निरंतर जारी है।

कल होंगे कई कार्यक्रम:

वरिष्ठ अधीक्षक डाकघर काेटा मंडल की ओर से 9 अक्टूबर काे विश्व डाक दिवस पर राष्ट्रीय डाक सप्ताह शुरू किया जाएगा। काेटा मंडल के सहायक अधीक्षक सुनील कुमार राठाैड़ ने बताया कि इस साल पूरे देश में राष्ट्रीय डाक सप्ताह मनाया जा रहा है। इसी क्रम में राष्ट्रीय डाक सप्ताह के दाैरान 9 अक्टूबर से विभिन्न कार्यक्रम काेटा मंडल के सभी उप मंडल एवं डाकघराें में आयाेजित किए जाएंगे।

1991 में भारत में सबसे बड़ा डाक टिकट जारी हुआ
भारत में सन 1852 में पहली बार चिट्ठी पर डाक टिकट लगाने की शुरुआत हुई तथा महारानी विक्टोरिया के चित्र वाला डाक टिकट 1 अक्टूबर 1854 को जारी हुआ था। भारत में अब तक का सबसे बड़ा डाक टिकट पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर 20 अगस्त 1991 में जारी हुआथा। डाक दिवस मनाने का उद्देश्य है कि ग्राहकों को अच्छी जानकारी देना। डाक दिवस पर बेहतर काम करने वाले कर्मचारियों को पुरस्कृत भी किया जाता है।

काेटा शहर में ये हैं बडे़ डाकघर

  • नयापुरा
  • नईधान मंडी
  • तलवंडी
  • रामपुरा
  • कोटा जंक्शन

ये हैं डाक सामग्रियाें की दरें

  • पाेस्ट कार्ड
  • 50 पैसा रजिस्टर्ड लिफाफा 22 रुपए
  • मेघदूत पाेस्ट कार्ड 25 पैसा
  • डाक लिफाफा 5 रुपए
  • अंतरदेशीय पत्र ढाई रुपए
  • हवाई पत्र 8 रुपए 50 पैसा
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