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कोविड का ऐसा इफेक्ट! दोनों लंग्स खराब:7 माह से भर्ती है मरीज, 75 लाख ली. ऑक्सीजन ले चुका, अब ट्रांसप्लांट ही आखिरी उपाय

कोटाएक महीने पहले
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नए अस्पताल के आईसीयू में 7 महीने से भर्ती प्रेमचंद। - Dainik Bhaskar
नए अस्पताल के आईसीयू में 7 महीने से भर्ती प्रेमचंद।
  • नए अस्पताल में एडमिट है 26 वर्षीय मरीज, निगेटिव होने के बावजूद 25 ली./मिनट ऑक्सीजन देनी पड़ रही

उसकी एक-एक सांस कृत्रिम ऑक्सीजन के सहारे चल रही है। पलभर के लिए ऑक्सीजन मास्क हटाने से वह बेचैन होने लगता है। सारी जमा पूंजी खत्म है, अब कर्ज लेकर घर चलाना पड़ रहा है। यह कहानी है बूंदी के हिंडौली क्षेत्र के अकलोड़ गांव के प्रेमचंद ऐरवाल (26) की, जो 7 माह से कोटा के नए के आईसीयू में एडमिट हैं।

वह अब तक करीब 75.60 लाख लीटर कृत्रिम ऑक्सीजन ले चुके हैं। कोविड निगेटिव होने के बावजूद बीते सात माह में उन्हें औसत 25 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन देनी पड़ी है। प्रेमचंद को मई के शुरुआती सप्ताह में कोविड हुआ, तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर 11 मई को बूंदी जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से 28 मई को कोटा रेफर कर दिया गया। लंबे इलाज से वे कोविड से तो बच गए, लेकिन दोनों लंग्स में ऐसा फाइब्रोसिस हो चुका कि अब वह ठीक नहीं हो सकता।

जमा पूंजी खत्म, कर्ज लेकर काम चलाया, अब पाई-पाई के लिए मोहताज
प्रेमचंद के भाई भगवान ऐरवाल ने भास्कर को बताया कि परिवार में हम तीन भाई है, माता-पिता हैं और प्रेमचंद की पत्नी सुरेखा व एक छोटी बच्ची है। परिवार के दो से तीन सदस्यों को कोटा अस्पताल में रहना पड़ता है। पत्नी सुरेखा तो लगभग पूरे समय वहीं रहती है। पूरे 7 माह में वह एक बार गांव और एक दिन के लिए अपने पीहर गई। पूरी सावधानी बरतते हुए प्रेमचंद को कुछ खिलाना-पिलाना पड़ता है, क्योंकि कुछ समय के लिए मास्क हटाने पर ही ऑक्सीजन लेवल डाउन होने लगता है। ऐसे में खाना खाते वक्त भी नाक में नलची लगाकर ऑक्सीजन फ्लो मेंटेन रखा जाता है।

26 दिन बाद बारां में मिले 3 कोरोना पॉजिटिव मरीज
बारां में 26 दिन की राहत के बाद मंगलवार को तीन कोविड पॉजिटिव मरीज सामने आए हैं। इससे पहले जिले मे 18 नवंबर को पॉजिटिव मरीज मिला था। हालांकिकि राहत की बात यह है कि तीनों मरीजों में कोई गंभीर लक्षण नहीं मिले हैं। पॉजिटिव मरीजों व उनके संपर्क में आए परिजनो को होम क्वारेंटाइन किया गया है। तीनों मरीजों के सैंपल जीनाेम सीक्वेसिंग के लिए जयपुर भेजे जाएंगे। मरीजों के परिजनों समेत उनके संपर्क में आए 49 लोगों की जांच के लिए सैंपल लिए हैं। तीनों मरीजों की कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है।

अब फाइब्रोसिस ठीक होना असंभव
इस रोगी को देख चुके श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र ताखर ने बताया कि इस रोगी के लंग्स में इतना ज्यादा फाइब्रोसिस हो चुका कि रिवर्स होना असंभव जैसा है। मैंने परिजनों को समझाया भी था कि वे सिर्फ लंग्स ट्रांसप्लांट के लिए ही प्रयास करें। मैंने उन्हें यह भी बताया था कि हैदराबाद के किम्स इंस्टीट्यूट में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए अनुदान की व्यवस्था भी है। इस तरह से मरीज को बहुत ज्यादा दिनों तक नहीं चलाया जा सकता। यह कोविड की सबसे खतरनाक स्टेज है, जो डराती है।
हार्ट पर भी आने लगा असर
रोगी को ट्रीट कर रही मेडिसिन विभाग की सीनियर प्रोफेसर डॉ. मीनाक्षी शारदा ने बताया कि इस रोगी के लिए सारे प्रयास किए गए, लेकिन फाइब्रोसिस रिवर्स नहीं हो पाया। अब उसके हार्ट पर भी असर आने लगा है। क्योंकि पल्मोनरी आर्टरी पर प्रेशर आ रहा है। हम उसकी जरूरी ब्रीदिंग एक्सरसाइज भी करवा रहे हैं, लेकिन उसका भी बहुत ज्यादा रेस्पोंस नहीं है। इस रोगी को एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट कराने के लिए भी हमें ग्रीन कॉरिडोर बनवाना पड़ा था, क्योंकि बगैर ऑक्सीजन मरीज की हालत तत्काल डिटोरियेट बिगड़ने लगती है।

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