पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Kota
  • The Shadow Of 232 Children Of Kota Was Lifted From The Head, The Father Of 171, The Mother Of 43 Died, Both The Parents Of 18 Children Died

कोरोना ने छीनी गोद:कोटा के 232 बच्चों के सिर से उठा साया, 171 के पिता, 43 की मां की मौत, 18 बच्चों के माता-पिता दोनों ने दम तोड़ा

कोटा7 दिन पहलेलेखक: समकित जैन
  • कॉपी लिंक
रिश्ते-नाते की समझ आने के पहले ही इन मासूमों के सिर से उठ गया माता-पिता का साया - Dainik Bhaskar
रिश्ते-नाते की समझ आने के पहले ही इन मासूमों के सिर से उठ गया माता-पिता का साया
  • रिश्ते-नाते की समझ आने के पहले ही इन मासूमों के सिर से उठ गया माता-पिता का साया

कोरोना की पहली और दूसरी लहर ने कोटा के 232 बच्चाें (18 से कम उम्र) के सिर से माता-पिता का साया छीन लिया हैं। इनमें 18 बच्चे तो ऐसे हैं, जिनके माता-पिता दोनों की माैत हाे गई। बाकी 214 में 171 (80%) बच्चों के पिता और 43 (20% ) बच्चों की मां की मौत हो गई है।

केन्द्र सरकार ने हाल ही में ऐसे बालकों के लिए सहूलियतों की घोषणा की थी, जिन्होंने अपने माता व पिता दोनों को खो दिया हैं। इसके बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने ट्वीट करके जानकारी दी कि देश में ऐसे 577 बच्चे अनाथ हुए हैं, जिसके बाद भास्कर ने सच उजागर किया था कि राजस्थान में ही ऐसे 411 बच्चे हैं, जो अनाथ हो गए। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि 11 से 18 साल के उम्र के 129 बच्चाें के माता या पिता की माैत हुई है।

1. पापा को इशारों में बुलाता है 18 माह का तन्मय

महेंद्र मित्त्तल मई में काेराेना पाॅजिटिव हुए और 22 मई काे उनकी अस्पताल में माैत हाे गई। उनके परिवार में बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी डाेली, 5 साल की बेटी और 18 माह का बेटा तन्मय बचे हैं। पूरा परिवार महेंद्र की कमाई पर ही चलता था। डाेली बताती हैं कि तन्मय अभी ढंग से माता-पिता के रिश्ते को भी नहीं समझ पाया है, लेकिन उसको अपने पिता महेन्द्र मित्तल की गोद का अहसास आज भी है। आज भी वो इशारों में पापा को बुलाता है। डोली मित्त्तल का कहना है कि अब पूरे परिवार का दारोमदार उन पर आ गया है।

2. नानी की गोद में मां की ममता खोजता है दिव्यांशु

डेढ़ साल के दिव्यांशु की मां सुमन की भी काेराेना से माैत हाे चुकी है। सुमन मई में पाॅजिटिव आई थी। परिजनाें ने बताया कि ऑक्सीजन की कमी से उनकी माैत हाे गई। दिव्यांशु के पिता सुनील अभी तक इस सदमे से बाहर नहीं आए हैं। परिवार में काेई ऐसा नहीं बचा जाे दिव्यांशु का ध्यान रख सके।

मजबूरन दिव्यांशु काे उसके नाना-नानी के यहां छाेड़ना पड़ा। अब वाे नानी की गाेद में मां की ममता खोजता है क्योंकि अब उसके सोने, जगने, दूध पिलाने, खाना खिलाने की जिम्मेदारी नानी की है। मामा लोकेश के अनुसार सुमन गर्भवती थी, इसी दाैरान वाे पाॅजिटिव आ गई और एक झटके में सब उजड़ गया।

ऐसे सामने आया सच

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने पिछले दिनों राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से कोविड-19 के कारण माता-पिता या दोनों में से किसी एक को खो देने वाले बच्चों का डेटा बाल स्वराज पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश जारी किए थे।

जिसके बाद कोटा में बाल संरक्षण अधिकारी दिनेश शर्मा और उनकी 8 सदस्यीय टीम सीएमएचओ ऑफिस और समाज कल्याण विभाग से कोविड-19 की वजह से होने वाली मृत्यु और पालनहार योजना के आकंड़ों को खंगाल रही थी। लगातार 7 दिनों तक 2 हजार परिवारों से बातचीत के बाद यह आंकड़ा सामने आया।

अपील : इन नंबरों पर दें ऐसे बच्चों की जानकारी

बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक रामराज मीना ने बताया कि ऐसे अनाथ, बेसहारा और विशेष संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों का संरक्षण शिक्षा, आवास, पालनहार, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, वात्सल्य, स्पांसरशिप आदि योजनाओं से जोड़कर किया जाता है।

उक्त योजनाओं का लाभ प्राप्त करने व सूचना देने के लिए 9588239566, 9887188127, 7014526307, 7023669113 नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है। अभी कोविड की वजह से अनाथ हुए बच्चों का सर्वे चल रहा है। ऐसे में ये आंकड़ा और ज्यादा बढ़ सकता है। सर्वे पूरा होने के बाद विभाग ये आंकड़ा सरकार को भेजा जाएगा।