‌‌‌‌800 करोड़ की लागत से बन रहा चंबल रिवर फ्रंट:यहां होगी दुनिया की सबसे बड़ी घंटी, देश की सबसे बड़ी संगमरमर की मूर्ति

कोटा6 महीने पहलेलेखक: आशीष जैन
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चंबल रिवर फ्रंट का प्रस्तावित मॉडल। - Dainik Bhaskar
चंबल रिवर फ्रंट का प्रस्तावित मॉडल।

कोटा अब नगरीय नियोजन की मिसाल बनने जा रहा है। अगले 8 से 10 माह में शहर में ऐसे विश्व स्तरीय काम दिखेंगे, जो दूसरे शहरों के लिए उदाहरण होंगे। चंबल रिवर फ्रंट पर बन रहे अजूबे हर किसी के आकर्षण का केंद्र होंगे। चंबल नदी पर 700 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहे इस रिवर फ्रंट में दुनिया की सबसे बड़ी घंटी, देश की सबसे बड़ी संगमरमर की प्रतिमा, देश का पहला एलईडी गार्डन और देश का सबसे बड़ा नंदी समेत कई अजूबे दिखेंगे।

यह रिवर फ्रंट 2.75 किमी का है, जिसमें गंगा किनारे बसे बनारस की तर्ज पर एक छोर पर 14 और दूसरे छोर पर 12 घाट भी बनेंगे। प्रत्येक घाट अलग थीम पर होगा, इन घाटों पर न सिर्फ कला, संस्कृति व हेरिटेज भी नजर आएगा।

घंटाघर घाट में लगेगी 9.5 मीटर व्यास की घंटी
चंबल रिवर फ्रंट के पूर्वी छोर पर एक घंटाघर घाट होगा, जहां विश्व की सबसे बड़ी घंटी लगाई जा रही है। जिसे लोग बजा भी सकेंगे। यह 9.5 मीटर व्यास की होगी। वर्तमान में विश्व की सबसे बड़ी घंटी चीन में 8.2 गुणा 6.5 मीटर की है व मॉस्को की घंटी 8 गुणा 6.6 मीटर की है।

42 मीटर की चंबल माता की मूर्ति लगेगी
रिवर फ्रंट पर चंबल माता की 42 मीटर ऊंची व 3 हजार टन वजनी मूर्ति लगेगी। यह मूर्ति 20 मीटर के पैडस्टल पर लगाई जाएगी। वियतनाम मार्बल से बन रही यह मूर्ति भारत में लगी संगमरमर की मूर्तियों में से सबसे ऊंची होगी। पैडेस्टल सहित इसकी ऊंचाई 203 फीट होगी।

घाट पर बने मंच पर दिखेगी प्रदेश की विरासत
रिवर फ्रंट पर 360 मीटर लंबा राजस्थान विरासत घाट हाेगा, जहां पूरे प्रदेश की विरासत एक जगह नजर आएगी। इसमें ढूंढाड, बृज, हाड़ाैती, मेवाड़, मारवाड़, वागड़, शेखावटी, किशनगढ़ एवं गाेद्वार क्षेत्राें के हस्तशिल्प, खान-पान, इतिहास, कला व संस्कृति का काॅम्पलेक्स बनेगा।

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