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  • Times Are In Loss, Many Operators Are Looking To Change Business Next Year, Government Reduced License Fee Of 13 Lakhs To 6.50 Lakhs

काेराेना का साइड इफेक्ट:घाटे में हैं बार, अगले साल बिजनेस बदलने की साेच रहे कई संचालक, सरकार ने 13 लाख की लाइसेंस फीस घटाकर 6.50 लाख की

कोटा4 दिन पहले
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खाली पड़े बार
  • पांच साल तक लाइसेंस फीस में छूट चाहते हैं बार संचालक
  • लागत कम करने के लिए स्टाफ घटा रहे हैं

राज्य सरकार ने लॉकडाउन के दौरान शराब की दुकानें खोलकर अपनी रेवेन्यू का इंतजाम ताे कर लिया, लेकिन बार संचालकाें काे अभी तक काेराेना की मार झेलनी पड़ रही है। सरकार ने जून में बार संचालकों को राहत देते हुए सालाना लाइसेंस फीस 13 लाख से घटाकर आधी यानी 6.50 लाख रुपए कर दी थी, फिर भी काराेबार नहीं चल रहा है। काेराेना के डर के चलते लाेगाें ने बार में जाना लगभग बंद कर दिया है। इसी कारण शहर में संचालित सभी बार में सन्नाटा पसरा रहता है। ग्राहक नहीं आने के कारण इन्हें 8-9 बजे बंद करना पड़ रहा है।

भास्कर ने जब शहर के प्रमुख बार संचालकाें से बात की, ताे उन्हाेंने लाइसेंस फीस अाधी करने के लिए सरकार काे शुक्रिया कहा, लेकिन साथ ही इस छूट काे पांच साल तक बरकरार रखने की मांग भी की। उनका कहना है कि काेराेना के इस झटके से उबरने में समय लगेगा। यदि सरकार इस छूट काे पांच साल के लिए नहीं बढ़ाएगी, ताे अगले साल कई बार संचालक अपना बिजनेस बदल लेंगे।
लागत कम करने के लिए स्टाफ घटाया
काराेबार नहीं चलने के कारण बार संचालकाें ने स्टाफ भी आधा कर दिया है। उन्हें वेटर्स की छुट्टी करनी पड़ रही है। संचालकों का कहना है कि बार चलाने की लागत भारी पड़ रही है। कस्टमर्स का आना काफी कम हाे गया है। उन्हें काेराेना संक्रमण का डर सता रहा है। सरकार फीस में और कमी करने के साथ ही अन्य रियायतें भी दे।

बार संचालकाें ने बताई ये परेशानियां, राहत की उम्मीद

30 प्रतिशत रह गई बिक्री : बार मालिकों ने बताया कि इस समय बार चलाना बड़ी मुसीबत बन गया है। काेविड के दाैर में हमारी बिक्री सिर्फ 30 प्रतिशत रह गई है। पिछले वर्ष जिस बार की सेल राेज 60-70 हजार रुपए थी, वाे अब घटकर 20-25 हजार रुपए पर आ गई है। इससे खर्चा भी नहीं निकल रहा। स्टाफ की सैलरी कहां से दे पाएंगे।

लाइसेंस फीस में छूट नहीं बढ़ी, ताे बंद हाे जाएंगे कई बार : राज्य सरकार ने काेविड काे देखते हुए इस वर्ष 13 लाख की लाइसेंस फीस घटाकर 6.50 लाख रुपए की है। इससे राहत मिली है, लेकिन यह छूट करीब 5 साल के लिए देनी हाेगी। तब जाकर बार संचालक इस नुकसान से उबर पाएंगे। अगर सरकार इस बारे में कुछ करेगी, तभी शहर के सभी बार संचालक लाइसेंस काे रिन्यू करवाएंगे। ऐसा नहीं हाेता है, ताे 50 प्रतिशत बार बंद हा़े जाएंगे। सर्विस टैक्स काे भी हटाएं।

लाखाें का इन्वेस्टमेंट, कमाई नाम मात्र की : बार संचालक बलविंदर सिंह चावला ने बताया कि बार चलाने में हर महीने करीब 5-6 लाख रुपए का खर्चा आता है। इसमें 1 से 2 लाख रुपए बिल्डिंग किराया, सफाई कर्मचारियाें के वेतन पर 30-35 हजार रुपए, 10 से 15 वेटर्स की सैलेरी पर 80-90 हजार, चार शेफ काे 60-70 हजार और मैनेजर की सैलेरी पर 20 हजार रुपए खर्च हाेते हैं। बिजली का बिल भी एवरेज में लेते हैं, ताे करीब 40 से 50 हजार रुपए प्रति माह हाे जाता है। बार खोल तो ली है, लेकिन कमाई नाम मात्र की हाे रही है।

खर्चा कम करने के लिए कर रहे सभी जतन : इस समय बार के स्टाफ की सैलेरी भी नहीं निकल पा रही है। ऐसे में सभी बार संचालकों ने 15 वेटर काे घटाकर 7 से 8 कर दिया है। इसी प्रकार किचन में भी चार के स्टाफ में से सिर्फ एक या दाे ही रखे हैं। 7-8 सफाई कर्मचारियाें में से 4 से 5 काे ही रखा है। बिजली के खर्च काे भी कम किया जा रहा है। जहां पहले एक हाॅल में चार एसी चल रहे थे, वहां सिर्फ दाे ही एसी चलाए जा रहे हैं।

अगले साल आ सकती है बिजनेस बदलने की नाैबत : बार संचालक अनवर खान ने बताया कि इस वर्ष लाइसेंस फीस कम हाेने के बाद लाइसेंस रिन्यू करवा लिया है, लेकिन कुछ फायदा नजर नहीं आ रहा है। बार में राेज 10 हजार रुपए की सेल आ जाए ताे बहुत बड़ी बात है। ऐसे में अब व्यापार करने से पहले फीस के रूप में 6.50 लाख रुपए देने का लाभ नजर नहीं दिख रहा है। इस वर्ष ताे किसी न किसी तरीके से काम चला लेंगे, लेकिन अगले वर्ष इस फीस काे जमा नहीं करवाकर उस रकम से दूसरा बिजनेस शुरू कर दूंगा।

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