बाढ़ का दूसरा दिन:पानी रिवर फ्रंट के 10 फीट नीचे तक, कुछ सीढ़ियां डूबीं, रिटर्निंग वाॅल में रिसाव

कोटाएक महीने पहले
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कोटा बैराज के 18 गेट खोलने और 5.20 लाख क्यूसेक पानी छाेड़ने के बाद चंबल रिवर फ्रंट के 247 लेवल तक पानी पहुंच गया। जिससे सीढ़ियां डूब गई। यहां घाट, बिल्डिंग व एलिवेशन सभी लेवल 250 के ऊपर है। इसलिए सारा निर्माण सुरक्षित है, सीढ़ियाें काे नुकसान का पता पानी उतरने पर लगेगा।

वहीं बैराज के पास बनाई रिटर्निंग वाॅल में रिसाव हाेने से गार्डन में पानी भर गया, हालांकि किसी नुकसान की बात से यूआईटी के अधिकारी इनकार कर रहे हैं। रिवर फ्रंट का निर्माण वर्ष 2019 में सर्वाधिक पानी छाेड़ने का आधार मानकर किया गया। तब 250 के लेवल तक पानी पहुंचा था।

यूआईटी अधिकारियाें का कहना है कि तीन दिन आए पानी से रिवर फ्रंट के काम की एक तरह से टेस्टिंग हाे गई। काेई कमी रही हाेगी ताे पानी उतरने पर दुरुस्त करा लेंगे। इधर, यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने प्रशासन को जलभराव वाले क्षेत्र में पानी उतरने पर सर्वे के लिए निर्देश दिया। वहीं, महापौर मंजू मेहरा, उपमहापाैर साेनू कुरैशी ने बाढ़ग्रस्त क्षेत्र व आश्रय स्थलाें पर व्यवस्था देखी।

तीसरी रात भी नहीं साे सके गोताखोर : नयापुरा में मंगलवार रात तक 8 गोताखोर पुलिस जवानाें के साथ दो नावाें के साथ तैनात थे। कंट्रोल रूम पर भी 24 गोताखोर तैनात रखे गए। गोताखोर तीसरी रात भी अपने घर जाकर साे नहीं सके।

परेशानी इसलिए झेल रहा शहर... न काेई रैंप ताेड़ने देता है न यूआईटी-निगम तोड़ती है

जवाहरनगर, तलवंडी, दादाबाड़ी, अशाेका काॅलाेनी, विज्ञाननगर आदि काॅलाेनियाें में नालाें पर 4 से 6 फीट आगे तक रैंप बने हैं। जवाहरनगर में यूआईटी सड़क बनवा रही है, लेकिन रैंप नहीं हटाए जा रहे। जहां भी रैंप बने हैं, उन नालियाें की सफाई बरसाें से नहीं हुई। निगमकर्मी सफाई करने जाते हैं ताे काेई भी रैंप हटाने नहीं देता।

ऐसा ही रहा ताे गुमानपुरा बाजार में भरेगा पानी : अभी गुमानपुरा बाजार में पानी नहीं भरता है। आशंका है कि वहां भी पानी भरने लगेगा। क्याेंकि मैन बाजार में यूआईटी नाला बनवा रही है। नाले पर आरसीसी लगाई जा रही है। हालांकि हर मकान के बाद छाेटा चैंबर दिया गया है।

इस फुटपाथ पर दुकानदाराें ने काउंटर रख लिए। दाे चैंबराें के बीच में 40 से 50 फीट दूरी है, इसलिए चैंबर से सफाई करना आसान नहीं हाेगा। इससे समस्या आने की बात वहां के व्यापारी मानते हैं और नगर निगम भी चिंतित है, लेकिन यूआईटी के अफसर नहीं सुनते। अनंतपुरा की बरड़ा बस्ती के हालात सोमवार को नयापुरा जैसे थे। सोमवार रात 1 बजे तक वहां नाव चलाई।

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