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छठे दिन मिली सफलता:135 घंटे बाद मजदूर का मिला शव ,डॉग स्क्वायड द्वारा लोकेशन ट्रेस के बाद 4 ट्रक मलबा हटाया, दुर्गंध आने पर SDRF की टीम ने बाहर निकाला

कोटा-बारां4 दिन पहले
छबडा में मोतीपुरा थर्मल पावर प्लांट हादसे में दबे मजदूर का शव आज छठे दिन निकाला जा सका।

बारां के छबडा में मोतीपुरा थर्मल पावर प्लांट हादसे में दबे मजदूर का शव आज छठे दिन निकाला जा सका। SDRF, NDRF व थर्मल प्रशासन की टीम को 135 घंटे मशक्कत के बाद मलबे से शव को बाहर निकाला। शव को निकालते ही उसे पोस्टमार्टम के लिए तुरन्त अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया।दबे मजदूर दिनेश मेहता का शव बाहर निकालने के बाद थर्मल प्रशासन ने राहत की सांस ली है।

दबे मजदूर का शव होपर नम्बर 3 के पास मिला है।
दबे मजदूर का शव होपर नम्बर 3 के पास मिला है।

SDRF के हेड कांस्टेबल मोरपाल ने बताया कि दबे मजदूर का शव होपर नम्बर 3 के पास मिला है। इसी जगह पर सोमवार को डॉग स्क्वायड ने लोकेशन ट्रेस की थी। जिसके बाद आज सुबह से पीलर नम्बर 3 के आसपास के मलबे (राख) व स्लैब को हटाया गया। होपर के स्लैब को कटर से काटा गया।करीब 4 ट्रक मलबा हटाने के बाद दुर्गंध आना शुरू हुई।जिसके बाद सावधानी पूर्वक दबे मजदूर दिनेश मेहता के शव को करीब 6 बजे के आसपास बाहर निकाला गया।

SDRF, NDRF व थर्मल प्रशासन की टीम को 135 घंटे मशक्कत के बाद मलबे से शव को बाहर निकाला।
SDRF, NDRF व थर्मल प्रशासन की टीम को 135 घंटे मशक्कत के बाद मलबे से शव को बाहर निकाला।

दिन रात चला रेस्क्यू अभियान

हादसे के बाद से ही NDRF के 25, SDRF के 24 व थर्मल प्लांट के करीब 150 इंजीनियर व कार्मिक रेस्क्यू में जुटे रहे। साथ ही 3 LNT मशीन ,2 JCB मशीन ( 1बड़ी) लगाई गई। हेड कांस्टेबल मोरपाल, कांस्टेबल,.दीपक अमृतलाल, महेंद्र .मनीष कुमार.शैतान सिंह,रोहिताश, प्रकाश चन्द,धारा सिंह व कोटा एसडीआरएफ बी कंपनी में हेड कांस्टेबल, समेत 7 कांस्टेबल, 1 चालक कांस्टेबल दिन रात एक करके रेस्क्यू में सफलता पाई।

दिन रात एक करके रेस्क्यू में सफलता पाई।
दिन रात एक करके रेस्क्यू में सफलता पाई।

ये था मामला

गुरुवार 9 सितंबर को सुबह 1 बजे करीब यूनिट 4 (250 मेगावाट) की ऐश हैंडलिंग प्लांट (राख ईएसपी) का स्ट्रक्चर (होपर) भर भरा कर गिर गया। जिससे वहां काम कर रहे 4 मजदूर दब कर झुलस गए। तीन मजदूरों बाहर निकाल लिया गया था। दिनेश मेहता नाम का मजदूर दब गया था।

दो सेक्शन में कुल 56 होपर होते है। एक सेक्शन में 28 होपर होते है। ये मेटल के बने होते है। जिनमें से गर्म राख निकलती है। यहां से राख को पानी के पम्प के प्रेशर से पाइप लाइन के जरिये बाहर निकाला जाता है।28 होपर स्ट्रक्चर टूट गया था।

फोटो-शुभम निमोदिया, बारां

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